'चीन-तिब्बत बातचीत में किसी बाहरी दल की जरूरत नहीं'

स्टॉकहोम, 21 मई (आईएएनएस)। चीन-तिब्बत संबंधों में किसी बाहरी दल की भूमिका की जरूरत नहीं है। यह कहना है तिब्बत की निर्वासित सरकार के प्रधानमंत्री समथोंग रिंपोच का। उनके अनुसार दोनों देशों के बीच हालिया बातचीत से विश्वास कायम हुआ है।

स्टॉकहोम, 21 मई (आईएएनएस)। चीन-तिब्बत संबंधों में किसी बाहरी दल की भूमिका की जरूरत नहीं है। यह कहना है तिब्बत की निर्वासित सरकार के प्रधानमंत्री समथोंग रिंपोच का। उनके अनुसार दोनों देशों के बीच हालिया बातचीत से विश्वास कायम हुआ है।

स्वीडन में 18-24 मई तक तिब्बत सप्ताह की शुरुआत करने पहुंचे रिंपोच ने कहा कि दलाई लामा चीन के अधीन केवल तिब्बत की अधिक स्वायत्तता चाहते हैं। इसमें किसी तीसरे दल की भूमिका की जरूरत नहीं है।

उन्होंने कहा कि दोनों पक्षों ने मुद्दों पर आपसी समझदारी से काम लिया है। रिंपोच के अनुसार चीन के अधीन तिब्बत के सभी क्षेत्रों और उसके लोगों को एक इकाई के तौर रहने की उनकी मांग 1950 के दशक से एकसमान रही है।

उन्होंने कहा कि मानवता तिब्बती समाज और संस्कृति का नुकसान नहीं उठा सकती और न ही वह चाहेगी कि तिब्बती लोगों के शेष दुनिया से संबंध कटे रहें। तिब्बतियों की संख्या बेशक कम है लेकिन वह दक्षिण एशिया के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। रिंपोच ने कहा कि उनका एकमात्र लक्ष्य शांतिपूर्वक रहना है।

रिंपोच ने आईएएनएस को जानकारी दी कि धर्मशाला (भारत में दलाई लामा का निवास स्थान) का स्थान हरेक तिब्बती के दिल में है।

साथ ही उन्होंने कहा कि चीन द्वारा ल्हासा में दमन के बाद स्वीडन सहित अनेक उत्तरी यूरोपीय देशों में तिब्बत संबंधी मुद्दों पर काफी ध्यान दिया गया है।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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