उप्र के पूर्व राज्य मंत्री को वन्य जीव अधिनियम के तहत नोटिस
लखनऊ , 18 मई (आईएएनएस)। उत्तर प्रदेश के एक पूर्व राज्य मंत्री को वन विभाग ने बिना लाइसेंस के हाथी, मोर, हिरन और मगरमच्छ पालने के आरोप में वन्य जीव संरक्षण अधिनियम के तहत नोटिस जारी किया है। पूर्व मंत्री इस कार्रवाई को राजनीति से प्रेरित बता रहे हैं।
यह पूर्व मंत्री हैं जितेन्द्र जायसवाल उर्फ पप्पू जायसवाल जो गोरखपुर जिले की पिपराइच सीट से विधायक रह चुके हैं। प्रदेश के वन मंत्री फतेह बहादुर सिंह ने आईएएनएस को बताया कि पप्पू जायसवाल को नोटिस जारी किया गया है कि वे बगैर लाइसेंस के इन जानवरों को कैसे पाले हुए हैं।
वन मंत्री ने कहा कि जो भी कार्रवाई की गयी है वह पूरी तरह से विधि सम्मत है और अगर कुछ अनुचित है तो प्रभावित पक्ष को उसे चुनौती देने का अधिकार है।
उधर पप्पू जायसवाल का कहना है कि गोरखपुर में सौ से ज्यादा लोगों ने हाथी पाल रखा है लेकिन नोटिस केवल उन्हें ही दी गयी। इसी से पता चलता है कि कार्रवाई का उद्देश्य क्या है। उन्होंने कहा कि उनके घर में 1979 से हाथी है और वर्ष 2000 में उन्होंने नया हाथी खरीदा था।
तब उन्होंने लखनऊ में लाइसेंस बनवाने कि लिए आवेदन किया था लेकिन उन्हें बताया गया कि इस समय लाइसेंस नहीं बन रहा है और जब लाइसेंस बनाए जाएंगे तो उन्हें सूचित कर दिया जाएगा लेकिन विभाग ने उन्हें सूचना नहीं दी।
उल्लेखनीय है कि पप्पू जायसवाल के पिता बद्री प्रसाद जायसवाल महाराजगंज की पनियारा सीट से फतेह बहादुर सिंह के खिलाफ गत चुनाव में सपा प्रत्याशी थे। इसके पहले 2002 के चुनाव में भी दोनों आमने सामने थे और तब बद्री प्रसाद बसपा और फतेह बहादुर भाजपा प्रत्याशी थे। राजनीतिक प्रतिद्वंदिता के चलते पप्पू जायसवाल अपने खिलाफ हुई कार्रवाई को राजनीतिक रंग दे रहे हैं।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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