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शिवराज के गृह जिले में बगावत, 13 पार्षदों का भाजपा से इस्तीफा

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    भोपाल, 18 मई (आईएएनएस)। भारतीय जनता पार्टी शासित मध्य प्रदेश में बगावत के स्वर सुनाई देने लगे हैं। प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के गृह जिले सीहोर में असंतुष्ट 13 पार्षदों ने पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है। इन असंतुष्ट पार्षदों को मनाने की पार्टी की ओर से कोशिशें तेज हो गई हैं।

    अभी हाल ही में भाजपा की प्रदेश कार्यसमिति की भोपाल में बैठक हुई थी। इस बैठक में भी पार्टी के कुछ नेताओं के खिलाफ बगावती स्वर गूंजे थे। मध्य प्रदेश के चुनाव प्रभारी वेंकैया नायडू ने इस असंतोष को खत्म करने की हिदायतें भी दी थीं। इस बैठक के दौरान तो शहडोल में पार्टी के भीतर चल रही खींचतान उभरकर सामने आ गई थी। तब वहां के एक सौ से अधिक कार्यकर्ताओं ने सड़क पर उतरकर नारेबाजी तक कर डाली थी।

    सत्ता और संगठन के बीच बेहतर समन्वय बनाने के लिए हुई बैठक को एक सप्ताह भी नहीं गुजरा है कि असंतोष खुलकर सामने आने लगा है। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह के गृह जिले सीहोर के 13 पार्षदों ने एक साथ पार्टी से इस्तीफा देकर हलचल मचा दी है। पार्षद प्रभा ठाकुर का आरोप है कि उनके इलाके में विकास कार्य नहीं हो रहे हैं। वे पार्षद होने के बावजूद जनता की समस्याओं का निराकरण नहीं करा पा रही हैं।

    इसी तरह पार्षद राजू पहलवान अपनी पार्टी के नेताओं के रवैये से खुश नहीं हैं। पार्षदों का कहना है कि वे अपने क्षेत्र के विकास के लिए विधायक, सांसद और मंत्रियों तक से अनुनय विनय कर चुके हैं मगर उनकी कोई सुनने को तैयार नहीं है। उन्हें सबसे ज्यादा कष्ट इस बात को लेकर है कि प्रदेश के मुखिया उन्हीं के जिले और पार्टी के हैं फिर भी वे विकास कार्यों के लिए तरस रहे हैं। ऐसी स्थिति में उनके पास इस्तीफे के अलावा कोई दूसरा विकल्प ही नहीं बचता है।

    एक साथ 13 पार्षदों के इस्तीफे ने पार्टी में हलचल बढ़ा दी है। सीहोर के पार्टी जिलाध्यक्ष ललित नागौरी पार्षदों की नाराजगी पार्टी से नहीं बल्कि नगर पालिका से मानते हैं। उनका कहना है कि नगर पालिका पर कांग्रेस का कब्जा है जिससे भाजपा पार्षदों के वाडरें में विकास कार्य नहीं हो रहे हैं। पार्षद नगर पालिका से इस्तीफा देना चाहते थे मगर उनसे पार्टी का इस्तीफा लिखवा दिया गया।

    जिलाध्यक्ष का कहना है कि इस इस्तीफे के पीछे दूसरे लोगों का दिमाग लगा है। उन्हें उम्मीद है कि नाराज पार्षदों को मना लिया जाएगा और वे 19 मई तक इस्तीफे भी वापस ले लेंगे।

    इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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