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श्री करात ने नंदीग्राम तथा सिंगूर ही नहीं पश्चिम बंगाल में औद्योगिक विकास की नीति तक पर वाम दलों से मतभेद की बात स्वीकार की और माना कि वाम एक जुटता बनाये रखने से लेकर धर्मनिरपेक्ष तीसरा विकल्प बनाने तक की पहल करने की प्राथमिक जिम्मेदारी माकपा की है1 लेकिन. तीसरी मोर्चा. की बजाय. तीसरे विकल्प. पर जोर देने के कारणों के बारे में पूछने पर उन्होंने कहा कि मोर्चे से चुनावी गठबंधन का आशय प्रकट होता है. जबकि माकपा की दिलचस्पी भाजपा की साम्प्रदायिक एवं कांग्रेस की बुर्जुआ आर्थिक नीतियों के बरक्स तीसरा विकल्प बनाने में हैं
माकपा नेता ने ऐसे विकल्प में भागीदारी के लिए धर्मनिरपेक्ष होने. आमजनों की समस्याओं से मुकाबले तथा जनहित की आर्थिक नीतियों एवं कार्यक्रमों के प्रति वचनबद्धता तथा स्वतंत्र विदेश नीति एवं राष्ट्रीय संप्रभुता की रक्षा के प्रति समर्पण की शर्ते भी पेश की
उन्होंने ऐसे विकल्प में शामिल होने वाले दलों का नाम तो नहीं लिया. लेकिन राजनीतिक प्रस्ताव के मसौदे में समाजवादी पार्टी. तेलुगू देशम पार्टी. असम गण परिषद. इंडियन नेशनल लोकदल तथाारखंड विकास मोर्चा की सदस्यता वाले संयुक्त राष्ट्रीय प्रगतिशील गठबंधन .यू.एन.पी.ए. का विशेष उल्लेख कर इसका कुछ संकेत जरुर दिया गया है
राजेश.संजीव नंद1710 जारी.वार्ता












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