दंगों के समय कार्रवाई नहीं करने केलिए प्रशासन जिम्मेवार ठहराया जाए
नयी दिल्ली. 20 जनवरी. वाार्त.विभिन्न क्षेत्रों के बुद्धिजीवियों ने कट्टरपंथियों के खतरों से निबटने के लिए कदम उठाने पर बल देते हुए कहा है कि बार बार के दंगों और संगठित हमलों से देश के अल्पसंख्यक समुदाय में असुरक्षा बढती जा रही है1 वस्तुपरक अध्ययन संस्थान द्वारा कल यहां .अल्पसंख्यकों क ी असुरक्षा के मुद्दे तथा कानून की प्रभावोत्पादकता. विषय पर आयोजित संगोष्ठी में पारित प्रस्ताव में यह विचार व्यक्त किया गया है1 संगोष्ठी की अध्यक्षता उच्चतम न्यायालय के पूर्व मुख्य न्यायाधीश ए एम अहमदी ने की और इसमें पूर्व मुख्य न्यायाधीश वी एन खरे. दिल्ली उच्च न्यायालय के पूर्व मुख्य न्यायाधीश राजिंदर सच्चर. प्रो इकबाल ए अंसारी. वरिष्ठ वकील युसूफ हातिम मुछाला. फादर डोमनिक इमैन्युअल तथा डा आबुसला शरीफ ने भाग लिया
वक्ताओं ने गुजरात और उडीसा की घटनाओं पर चिंता प्रकट करते हुए ऐसे मामलों में निष्क्रियता के लिए प्रशासन को जिम्मेवार ठहराने के लिए कानून बनाने की मांग की1 प्रस्ताव में कहा गया है कि अपने राजनीतिक स्वाथो की पूर्ति के लिए घृणा फैलाना कुछ संगठनों की खासियत बन गयी है1 ऐसी खतरनाक गतिविधियों पर प्रशासन की आेर से किसी भी प्रकार की नरमी न बरती जाए
न्यायमूर्ति अहमदी ने हाल के चुनावों में कांग्रेस द्वारा मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी की कमजोरियों तथा अपनी ताकत जनता के सामने नहीं उठा पाने पर अफसोस जताया1 उन्होंने कहा कि गोधरा में ट्रेन में आग लगाने वालों तथा बाद में हुए व्यापक दंगों के दोषयिों को दंडित करने में प्रशासन के विफल रहने के कारण कानून को और प्रभावी बनाने की मांग उठी है
प्रस्ताव में .साहस की संस्कृति. को विकसित करने की मांग करते हुए कहा गया है कि उच्चतम न्यायालय के आदेश पर बिल्किस बानो प्रकरण के गुजरात से महाराष्ट्र में स्थानांतरण से यह साबित हो गया है कि जब कोई नागरिक अपने आधिकारों के लिए साहस जुटा लेता है तो इंसाफ जर मिलती है1 वक्ताओं ने न्यायापालिका जैसे संस्थानों में सभी समुदायों को उचित प्रतिनिधित्व देने क ी भी मांग की
सुमन.जितेन्द्र.रमेश1109वार्ता












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