अर्थ. तेल मूल्य .. उद्योग दो अंतिम नयी दिल्ली
फिक्की द्वारा किये गये ताजा सवर्ेक्षण में जिसमें 165 कंपनियों ने अपने विचार व्यक्त किये हैं जिसमें सभी उद्योगों ने एकमत से पेट्रोलियम उत्पादों पर उत्पाद एवं सीमा शुल्क ढांचे की समीक्षा पर जोर दिया है1 उद्योगों का कहना है कि तेल उत्पादों के मामले में सरकार को लचीला शुल्क ढांचा तैयार करना चाहिये
सवर्ेक्षण में 52 प्रतिशत उद्योगों का मत था कि तेल मूल्यों की वर्तमान तेजी से भारतीय अर्थव्यवस्था पर गंभीर असर होगा1 तेल मूल्यों में तेजी से महंगाई बढेगी और व्यापार संतुलन भी गडबडायेगा इस पर भी बहुमत था1 करीब 60 प्रतिशत ने तो यहां तक कहा कि कुल मिलाकर कर मुद्रास्फीति पर गहरा असर होगा जबकि 55 प्रतिशत के मुताबिक व्यापार संतुलन में भी स्थिति बिगडेगी
प्लास्टिक और प्लास्टिक उत्पाद. ग्लास. उर्वरक. सूती कपडा. सिंथेटिक कपडा. कास्टिंग एण्ड फोजिग. रंग रोगन और धातु उत्पाद का कारोबार करने वाली कंपनियां मूल्य वृद्धि से सबसे ज्यादा प्रभावित हैं1 इनमें से 80 प्रतिशत उद्योगों ने कहा है कि पेट्रोलियम उत्पादों के दाम बढने से पिछले छह महीनों से उनकी उत्पादन लागत काफी बढ गई है
इनमें से ज्यादातर उद्योगों में इधन अथवा ऊर्जा का उत्पादन लागत में 20 प्रतिशत अथवा इससे कम योगदान होता है जबकि 49 प्रतिशत उद्योगों के मुताबिक उनकी उत्पादन लागत में ऊर्जा की लागत 10 प्रतिशत अथवा इससे भी कम रहती है1 ऐसे भी उद्योगों की कमी नहीं है जिनमें उनकी उत्पादन लागत के मुकाबले ऊर्जा लागत कहीं अधिक है1 ऐसे उद्योगों में लोहा और इस्पात. धातु उत्पाद. प्लास्टिक और ग्लास उद्योग प्रमुख हैं
महाबीर जितेन्द्र मनोरंजन 1222 वार्ता.












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