भाप इंजन पर चढके विदेश यात्रा. कैसे रूके दुर्घटना

नयी दिल्ली 14 अक्टूबर .वार्ता. भारत में 140 वर्षों से ज्यादा समय तक रेलगाडियों को खींचने वाले भाप के इंजनों को 21वीं सदी में भले ही .रेल धरोहर. का दर्जा देकर सोने का अण्डा देने वाली मुर्गी के रूप में बदल दिया गया हो. लेकिन मुर्गी का पेट चीर कर सारे अण्डे एक बार में ही निकाल लेने पर आमादा अधिकारियों की लापरवाही और बेरहमी पूर्ण रवैये के कारण अति विशिष्ट यात्रियों की जान कभी भी संकट में आ सकती है1 इसी महीने के पहले पखवाडे में विदेशी पर्यटको को राजस्थान की सैर कराके तगडी कमायी करने वाली विश्व प्रसिद्ध पर्यटन रेलगाडी .पैलेस आन व्हील्स. और रेल मंत्री के संसदीय निर्वाचन क्षेत्र में विशेष रूप से चलने वाली धरोहर रेलगाडी के भाप इंजनों में ब्वायलर फ्टने की घटनाओं ने इन .रेल धरोहरों. के रख रखाव की प्रक्रिया पर सवालिया निशान लगा दिये हैं1 रेलवे के सूत्रो के अनुसार देश में बचे एक मात्र स्टीम लोको शेड रेवाडी में भाप इंजनों की मरम्मत और देख रेख के जिम्मेदार रेलवे के बडे अधिकारी साल में शायद ही कभी शेड देखने की जहमत उठाते हैं. जबकि टीम इंजन के नाम पर बि्रटेन. अमरीका की यात्रा के मौकों पर गिद्ध दृष्टि लगाए रहते हैं

शिशिर सचिन जगबीर1450जारी वार्ता

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