Vikas Divyakirti Drishti: तीनों सगे भाइयों के सरनेम अलग-अलग क्यों? खुद ने ही खोले जिंदगी के कई राज
Drishti IAS के सीईओ, फाउंडर व एमडी डॉ. विकास दिव्यकीर्ति ( Vikas Divyakirti) ने अपने नए इंटरव्यू में परिवार, निजी जिंदगी, यूपीएससी सफर, गृह मंत्रालय की नौकरी छोड़ने और दृष्टि आईएएस कोचिंग से जुड़ी कई बातें शेयर की।
Dr. Vikas Divyakirti Life Secrets : नई दिल्ली के ओल्ड राजेंद्र नगर में कोचिंग के बेसमेंट में पानी भरने से UPSC की तैयारी करने वाले 3 अभ्यर्थियों की मौत का मामला गहराने के बाद एमसीडी ने विकास दिव्यकीर्ति की कोचिंग संस्थान 'दृष्टि आईएएस' का सेंटर भी सील कर दिया। इस मौके पर जानिए विकास दिव्यकीर्ति के जीवन के रोचक किस्से।

भारत के बेहतरीन शिक्षकों में खान सर व डॉ. विकास दिव्यकीर्ति का नाम बड़ी अदब के साथ लिया जाता है। दृष्टि आईएएस कोचिंग संस्थान के सीईओ, फाउंडर व एमडी विकास दिव्यकीर्ति ने एक टॉक शो के मंच पर अपनी निजी जिंदगी व कोचिंग से जुड़े कई राज खोले हैं। मसलन कि दृष्टि आईएएस कोचिंग के अहम फैसले ये रात को सैर करते समय लेते हैं। किसी खास वजह से इनके तीनों भाइयों के सरनेम अलग-अलग हैं।
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आर्य समाज को मानता है विकास दिव्यकीर्ति का परिवार
27 जनवरी 2023 को जोश टॉक शो में विकास दिव्यककीर्ति ने बताया कि उनका परिवार आर्य समाज को मानता है। आर्य समाज की एक विशेषता है कि वह जाति व्यवस्था को खारिज करता है। इनके परिवार में भी तीन पीढ़ियों से यह परम्परा चली आ रही है कि ये अपनी जाति को लेकर कभी कोई जिक्र नहीं करते। अपने बच्चों को भी नहीं बताते कि हमारी जाति क्या है?

विकास दिव्यकीर्ति के पिता हरियाणा के नामी साहित्कार
विकास दिव्यकीर्ति का परिवार साहित्य में काफी रूचि रखता है। इनके पिता हरियाणा के नामी साहित्कार रहे हैं। हरियाणा साहित्य अकादमी द्वारा उनको कई बड़े पुरस्कारों से नवाजा जा चुका है। उन्होंने कई उपन्यास लिखे हैं। इनके परिवार में बच्चों के नामों भी साहित्य की झलक देखने को मिलती है।

तीनों भाइयों के अलग सरनेम की वजह
विकास दिव्यकीर्ति तीन भाइयों में सबसे छोटे हैं। परिवार आर्य समाजी होने के कारण जाति में विश्वास नहीं रखते। ऐसे में अपने नाम के साथ सरनेम में जाति लिखने की बजाय साहित्य के शब्द जोड़े। इसीलिए बड़े भाई का सरनेम मधुवर्षी, दूसरे का सरनेम प्रियदर्शी और इनका सरनेम दिव्यकीर्ति है। बचपन में विकास का सरनेम चक्रवर्ती था। फिर पिता को पता चला कि चक्रवर्ती तो पश्चिम बंगाल में एक जाति है। इसलिए चक्रवर्ती हटाकर दिव्यकीर्ति कर दिया।

विकास दिव्यकीर्ति आईएएस बने या नहीं?
विकास दिव्यकीर्ति बताते हैं कि उन्होंने संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) की सिविल सेवा परीक्षा 1996 में पहली बार भाग्य आजमाया था। पहले प्रयास में 23 साल की उम्र में यूपीएससी पास कर डाली और 384वीं रैंक पाकर होम मिनस्टिरी कैडर में केंद्रीय सचिवालय सेवा (CSS) में नौकरी पाई। आठ माह बाद इस्तीफा दे दिया। विकास दिव्यकीति आईएएस नहीं बन पाए थे। हालांकि दृष्टि आईएएस कोचिंग खोलकर हजारों युवाओं को आईएएस बना चुके हैं।

विकास दिव्यकीर्ति का यूपीएससी का सफर
- रोल नंबर-97484
- रैंक-384
- प्री में विषय- समाजशास्त्र
- मैंस में विषय- हिंदी साहित्य व समाजशास्त्र
- मैंस में हिंदी में 343 नंबर
- जीएस में 321 नंबर
- समाजशास्त्र में 247 नंबर
- निबंध में 112 नंबर
- इंटरव्यू में 156 नंबर
- कुल 1169 नंबर
- सर्विस-केंद्रीय सचिवालय सेवा (CSS)
- कैडर- होम मिनिस्टरी
- ज्वाइनिंग डेट- 2 जुलाई 1997
- इस्तीफा- 8 से 10 की अवधि में

दृष्टि आईएएस कोचिंग में विकास दिव्यकीर्ति की भूमिका
साल 1999 में विकास दिव्यकीर्ति ने दिल्ली में दृष्टि आईएएस कोचिंग संस्थान की नींव रखी। वर्तमान में दिल्ली के मुखर्जी नगर, करोल बाग, सिविल लाइन्य प्रयागराज व जयपुर में दृष्टि आईएएस कोचिंग सेंटर हैं। दृष्टि आईएएस कोचिंग में अपनी भूमिका पर विकास दिव्यकीर्ति चुटीले अंदाज में कई तरह से व्याख्या करते हैं। कहते हैं कि दृष्टि आईएएस कोचिंग में उनकी भूमिका सिर्फ देश के राष्ट्रपति की तरह है। रबड़ स्टाम्प जैसे हैं। फैसलों पर साइन कर देते हैं।
या फिर यूं मान लिजिए कि जैसे ट्रेन में चेन पुलिंग के सिस्टम की तरह हूं। माने ट्रेन (दृष्टि आईएएस कोचिंग) तो चलती रहती है और जरूरत पड़ने पर यात्री (दृष्टि आईएएस कोचिंग स्टाफ) द्वारा चेन खींच ली जाती है। फिर वे स्टाफ की समस्या का समाधान कर देते हैं।

रात सैर करते हुए लेते हैं दृष्टि आईएएस कोचिंग से जुड़े अहम फैसले
विकास दिव्यकीर्ति अपनी दिनचर्या पर चर्चा करते हुए कहते हैं कि उन्हें सुबह देर तक सोना पसंद है। दृष्टि आईएएस कोचिंग में भी उनकी बैठकें दोपहर एक बजे बाद ही रखी जाती हैं। नौ-दस बजे तक जगते हैं। सुबह 11 बजे तक परिजनों के साथ बैठकर नाश्ता करते हैं।
रात को नियमित रूप से एक घंटे की सैर पर निकलते हैं। वो भी रात को 11 बजे के बाद। ताकि सड़क पर भीड़भाड़ कम मिले। इसी दौरान डिप्टी सीईओ विवेक भी विकास दिव्यकीर्ति के साथ होते हैं। सैर करते-करते डिप्टी सीईओ इनको दिनभर का अपडेट देते हैं। दोनों उसी समय दृष्टि आईएएस कोचिंग से जुड़े अहम फैसले भी लेते हैं।

कौन चलाता है दृष्टि आईएएस कोचिंग?
एमडी विकास दिव्यकीर्ति कहते हैं कि 1999 से लेकर 2011 तक वे अकेले ही पढ़ाया करते थे। कुल तीन चार लोगों का स्टाफ था। वर्तमान में दृष्टि आईएएस कोचिंग संस्थान चलाने के लिए मैनेजमेंट में 1200 लोगों की टीम है। विभिन्न विषयों के बेहतरीन 80 शिक्षक हैं। विकास दिव्यकीर्ति ने आईआईटी दिल्ली से मैनेजमेंट का कोर्स भी कर रखा है। पांच साल पहले इन्होंने दृष्टि आईएएस कोचिंग का संविधान भी लिखा है, जिसे एम्प्लॉई हैंड बुक कहते हैं। उसमें नौकरी से जुड़ी तमाम जिम्मेदारी, नियम व शर्तें लिखी होती हैं। लंबे समय से दृष्टि आईएएस कोचिंग संस्थान ने अपने किसी कर्मचारी को नौकरी से नहीं निकाला।

राजनीति में उतरे तो अवसाद में आ गए
विकास दिव्यकीर्ति कहते हैं कि साल 2015 में मुझे लोगों ने कहा आपको राजनीति में जाना चाहिए। मैंने प्रयोग करके देखना चाहा। मैंने अपनी सोसायटी का चुनाव लड़ा और जीता। डेढ़ साल काम किया, लेकिन मेरे व्यक्तित्व में राजनीति में नहीं थी। मैं तो टीचर रहा हूं। राजनीति में खराब तरीके से विरोध की आदत नहीं है। मेरे पद संभालने के 15 दिन बाद तबीयत खराब हो गई। फिर न्यूरो डॉक्टर ने बताया कि आपको किसी बात की एंजाइटी परेशान कर रही। उसने सात दिन तक के लिए मोबाइल फोन छुड़वा दिया। ताकि मैं राजनीतिक नकारात्मकता से दूर रहूं। फिर मैं ठीक हे गया और सोसायटी वाला पद भी छोड़ दिया। इस्तीफा देने के बाद अवसाद वाली स्थिति में जिंदगीभर कभी नहीं गया।

कौन हैं विकास दिव्यकीर्ति?
डॉ. विकास दिव्यकीर्ति मूलरूप से हरियाणा के भिवानी के रहने वाले हैं। वर्तमान में रहते हैं। विकास दिव्यकीर्ति का जन्म 26 दिसम्बर 1973 को टीचर दम्पति के घर हुआ। 26 मई 1997 को कॉलेज की दोस्त तरुणा से इन्होंने शादी की। दोनों के एक बेटा सात्विक दिव्यकीर्ति है। पिछले दिनों विकास दिव्यकीति माता सीता पर टिप्पणी को लेकर खासे चर्चा में रहे।












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