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Success Story: खेतों में पसीना बहाकर मिट्टी से निकाला सोना, महिलाएं बनी लखपति

Success Story सागर जिले के ग्रामीण क्षेत्र की महिलाएं सफलता की कहानी गढ़ रही हैं। जिले के रीछई और नाहरमऊ की रहने वाली दो महिलाओं ने समूह से जुड़कर अपनी तकदीर बदल डाली। खेतों की मिट्टी में पसीना बहाया तो फसल सोना उगलने लगी। महिलाओं ने अब लग्जरी कारें तक खरीद ली हैं।

महिलाएं बनी लखपति

Government द्वारा गांवों में महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए स्व-सहायता समूह बनाकर मदद कर रही हैं। यदि ईमानदारी और लक्ष्य बनाकर मेहनत की जाए तो तकदीर पलटने में ज्यादा समय नहीं लगता। मप्र के सागर जिले के नाहरमऊ की रक्षा लोधी और रीछाई गांव की राजकुमारी लोधी इसकी मिसाल बन गई हैं। ये दोनों महिलाएं खेतों में सामान्य मजदूरों की तरह खेती का काम करती रही हैं। इन्होंने समूह से जुड़कर प्रशिक्षण लिया, खेती के काम के तरीके में थोड़ा बदलाव किया। सरकारी योजनाओं का लाभ उठाया तो इनकी किस्मत भी चमकने लगी। खेतों की मिट्टी से उपज के रुप में सोना निकलने लगा। अब इन्होंने अपने खेती व समूह के माध्यम से मिले काम का विस्तार किया तो इन्हें वाहनों की आवश्यकता पड़ने लगी है। दीपावली पर दोनों महिलाओं ने लग्जरी कारें खरीद ली हैं।

समूह से जुड़कर सपने को साकार किया है

नाहरमऊ गांव की रक्षा लोधी

सागर जिले के बंडा विकासखंड के नाहरमऊ गांव की रक्षा लोधी ने हाल ही दीपावली में लग्जरी कार खरीदी है। समूह से जुडकर उन्होंने अपने इस सपने को साकार किया है। वे बताती है कि समूह से जुड़ने के पहले वह अपने ही खेतों में काम करती थी। उन्होंने बीए तक की पढ़ाई की है। गांव में कोई अन्य विकल्प नहीं होने के कारण उन्हें खेतों में काम करना जरूरी हो गया था। साल 2016 में आजीविका मिशन से जुड़कर प्रशिक्षण लिया था। उन्हें कियोस्क संचालन का दायित्व सौंपा गया। उन्होंने अपनी खेती और पशुपालन के व्यवसाय को प्रशिक्षण में सीखे गए तरीकों को अपनाते हुए सुधारना शुरू किया तो धीरे-धीरे आमदनी बढ़ना शुरु हो गई।

जमीन की उपज बेचकर बनी लखपति

राजकुमारी लोधी

जिले के रीछई गांव की राजकुमारी लोधी समूह से जुड़ने के पहले एक ग्रहणी और सामान्य महिला किसान की तरह ही सोचती थीं। आजीविका मिशन के समूह के माध्यम से प्रशिक्षण मिला। इसमें बताया गया कि एक साथ कई प्रकार की अलग.अलग समय पर फल देने वाली फसल देने वाली खेती करना चाहिए। उन्होंने रवि और खरीफ की फसलों में सब्जी उत्पादन फलोत्पादन, पशुपालन को भी जोड़ दिया। सब्जी की खेती में कम अवधि से लेकर अधिक अवधि में अधिक अवधि तक फल देने वाली सब्जियां उन्होंने लगाई। इसके लिए उन्होंने कई बार समूह से ऋण भी लिया। धीरे.धीरे उनकी आमदनी 10 हजार महीना से बढ़कर 25 हजार रुपए प्रति माह तक पहुंच गई। आमदनी के साथ काम भी बढ़ा तो अब उन्होंने बिजनेस को आगे बढ़ाने के लिए कार खरीदी है।
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