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Success Story: 6 सरकारी नौकरियां छोड़ मनीषा रावत बनीं लेफ्टिनेंट, खेतों में किया काम, पशुओं का गोबर भी ढोया

"मैं अपने गांव से भारतीय सेना में लेफ्टिनेंट बनने वाली पहली लड़की हूं, जिस पर मुझे गर्व है। साथ ही मैं यह भी चाहती हूं कि मैं आखिरी न रहूं। मेरे बाद भी गांव की अन्य बेटियां अफसर बनें।"

यह कहना है हरियाणा के महेंद्रगढ़ जिले की ग्राम पंचायत नावां की ढाणी मंधियाली की रहने वाली मनीषा रावत का, जो हाल ही में एनडीए (राष्ट्रीय रक्षा अकादमी) की परीक्षा पास कर भारतीय सेना में बतौर लेफ्टिनेंट शामिल हुई हैं।

Success Story of Manisha Rawat Haryana Girl

खेतों से लेकर सेना तक का सफर

गुर्जर परिवार में पली-बढ़ी मनीषा रावत की यह कहानी उन ग्रामीण बेटियों के लिए प्रेरणास्त्रोत है, जिन्हें लगता है कि गांव की पृष्ठभूमि कामयाबी की राह में रुकावट बनती है। मनीषा ने बचपन से ही खेतों में काम किया है, चूल्हा-चौका संभाला और पशुओं का गोबर तक उठाया है। यही नहीं, सेना में जाने के अपने सपने के लिए उन्होंने 6 सरकारी नौकरियों को ठुकरा दिया।

Success Story of Manisha Rawat Haryana Girl

परिवार का सपोर्ट, खुद पर भरोसा

वनइंडिया हिंदी से बातचीत में मनीषा के पिता छाजूराम ने बताया, "मई में एनडीए का रिजल्ट आया और बेटी ने लेफ्टिनेंट के रूप में सेना में जॉइन कर लिया है। मुझे गर्व है कि मेरी बेटी गांव की पहली महिला अफसर बनी है। मैंने और मेरे पिता ने रेलवे में नौकरी की, लेकिन मनीषा ने पूरे गांव का नाम रौशन किया है।"

Success Story of Manisha Rawat Haryana Girl

मनीषा बताती हैं कि "भारतीय सेना में लेफ्टिनेंट बनने से पहले मैंने जेईई मेंस और एयरफोर्स जैसी परीक्षाएं भी पास की हैं। दो सरकारी नौकरियों के ऑफर लैटर अब भी मेरे पास हैं। इससे पहले चार नौकरियां ठुकरा चुकी हूं। मेरा सपना सिर्फ भारतीय सेना में अफसर बनने का था और अब वह सपना पूरा हो गया है।"

अपनी सफलता का श्रेय वह अपने माता-पिता, भाई और गणित के शिक्षक देवेंद्र पूनिया को देती हैं। उन्होंने शिक्षा भारती स्कूल से पढ़ाई की है और हमेशा अपने शिक्षकों से प्रेरणा पाई।

Success Story of Manisha Rawat Haryana Girl

मां और पिता की जुबानी बेटी की मेहनत

पिता छाजूराम बताते हैं, "मेरे तीन बेटियां और एक बेटा हैं। मैंने कभी किसी पर करियर का दबाव नहीं डाला। मनीषा शुरू से ही मेहनती और होशियार रही है। हम पर कभी बोझ नहीं डाला, खुद अपने दम पर सब संभाला। मैं स्टेशन मास्टर हूं, मनीषा को एसएसबी एग्जाम दिलाने तक का वक्त नहीं निकाल पाता था, लेकिन उसने हमेशा कहा - पापा, आप चिंता मत करो, मैं खुद मैनेज कर लूंगी।"

गुर्जर समाज की बेटी बनी गांव की पहली लेफ्टिनेंट! #gurjar #Gujjar #lieutenant #NDA

Posted by Haryana News 24 on Monday, June 30, 2025

मनीषा की मां सुमन बताती हैं, "मुझे शुरू से ही उम्मीद थी कि मेरी बेटी भारतीय सेना में जाएगी। मनीषा जब दिल्ली से तैयारी करके लौटती थी तो खेतों में काम करने और गोबर उठाने तक से परहेज नहीं करती थी। घर के कामों के साथ-साथ NDA की तैयारी भी करती थी।"

NDA में कैसे मिले सफलता?

मनीषा रावत कहती हैं, "अगर आप NDA पास करना चाहते हैं तो इसकी तैयारी स्कूल के समय से ही शुरू कर देनी चाहिए। इंटरव्यू में आत्मविश्वास बहुत जरूरी है। भाषा को लेकर झिझक न रखें, न अंग्रेजी से डरें और न हिंदी से। जरूरी है कि आप खुद को व्यक्त कर सकें।"

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