Organ Donation के इस फैसले से भर आएंगी आंखें, 59 साल के रूपचंद्र की मौत से पांच लोगों को जीवनदान!
AIIMS Delhi में 59 साल के रूपचंद्र को जब भर्ती कराया गया तो किसी को अंदाजा नहीं रहा होगा कि उनके अंगों से किसी और की जान बचाई जा सकेगी। परिवार ने ब्रेन डेड रूप चंद्र के उपयोगी अंगों को दान करने का फैसला लिया है।

Organ Donation ऐसा काम है, जिसमें आप कई बार जिंदा रहते तो कई बार मरने के बाद भी अमर होने का एहसास कर पाते हैं। ऐसे ही एक मामले में 59 वर्षीय ब्रेन-डेड व्यक्ति ने एम्स में अंगदान कर पांच लोगों की जान बचाई।
पांच लोगों की जिंदगी रोशन हुई
सड़क दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल हुए 59 वर्षीय रूपचंद्र सिंह धरती के भगवान कहे जाने वाले डॉक्टरों की शरण में थे। हालांकि नियती को कुछ और मंजूर था, शायद इसलिए खुद रूपचंद्र को तो जीवनदान नहीं मिला, लेकिन इन्होंने पांच लोगों की जिंदगी रोशन कर दी।
लीवर, किडनी, हार्ट, कॉर्निया सब दे दिया
अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) दिल्ली में अपने अंगों का दान कर रूपचंद्र ने अपना लीवर, किडनी, हृदय और कॉर्निया दान किया। पांच लोगों की जान बचाने वाले ब्रेनडेड रूप चंद्र के परिवार ने भी इसके लिए जरूरी सहमति देने में कोई हिचकिचाहट नहीं दिखाई।
बाइक से एक्सीडेंट के बाद ब्रेन डेड
रूपचंद्र सिंह 30 अप्रैल को अपने बेटे के साथ मोटरसाइकिल से कहीं जा रहे थे। सड़क दुर्घटना में उन्हें सिर में गंभीर चोट लगी और एम्स के ट्रॉमा सेंटर लाया गया। मंगलवार को डॉक्टरों ने उन्हें ब्रेन डेड घोषित कर दिया।
AIIMS में काउंसलिंग के बाद अंगदान का फैसला
एम्स के कर्मचारियों ने कहा, ऑर्गन रिट्रीवल बैंकिंग ऑर्गनाइजेशन (ओआरबीओ) ट्रांसप्लांट काउंसलर और कोऑर्डिनेटर की काउंसलिंग के बाद परिवार अंगदान के लिए राजी हुआ।

शुरुआत में, परिवार को अंग दान के बारे में पता नहीं था। लेकिन, अंग दान के संबंध में ओआरबीओ प्रत्यारोपण सलाहकारों और समन्वयकों के परिवार के सदस्यों ने कई परामर्श सत्रों में बातें कीं, जिसके बाद वे अंगदान पर सहमत हुए।
अंग दान के पक्ष में सहमति उदाहरण से बनी
एम्स ने बताया, सूर्य प्रताप सिंह, एक दूसरे मल्टी ऑर्गन डोनर के भाई हैं। उन्होंने इसी वर्ष मार्च में एम्स में अपने अंग दान किए थे। उन्होंने भी अपने परिवार के अंग दान के अनुभव को साझा किया। बाद में रूपचंद्र सिंह के परिवार ने भी सर्वसम्मति से अंग दान के पक्ष में सहमति व्यक्त की। ।
परिवार सदमे को सहकर देता है बड़ा संदेश
ऑर्गन डोनेशन की इस प्रेरक कहानी में समाचार एजेंसी ANI के अनुसार, ओआरबीओ एम्स की प्रमुख डॉ. आरती विज ने कहा, "परिवार के लिए अंगदान के बारे में निर्णय लेना बहुत कठिन होता है। खासकर सड़क दुर्घटना जैसी दुर्भाग्यपूर्ण घटनाओं में, जिसमें परिवार सदमे की स्थिति में होता है।
ऑर्गन डोनर का फैसला होने के बाद किन विभागों की अहम भूमिका होती है
हालांकि, जब कोई परिवार फैसला ले लेता है तो उनके साहसिक निर्णय के बाद इलाज करने वाले डॉक्टरों का रोल काफी अहम होता है। साथ ही प्रत्यारोपण समन्वयक, अंग प्रत्यारोपण टीम, फोरेंसिक विभाग भी बेहद अहम रोल में होते हैं।
पिता के निधन पर भावुक बेटे ने क्या बताया
पुलिस और सभी सहायक विभाग कोऑर्डिनेशन बनाकर ऐसे काम करते हैं, जिससे डोनर बाधाओं से मुक्त रहें और प्रोसेस भी तेजी से हो। 59 वर्षीय नागेंद्र के बेटे ने कहा, "मेरे पिता बहुत ही दयालु और सामाजिक इंसान थे।"
मौत के बाद भी लोगों को जीवनदान दे गए रूपचंद्र
बेटे के अनुसार, पिता को बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण तरीके से खोने के बाद परिवार की इच्छा है कि उनके अंगों से दूसरों को जीवन मिले जो बीमार हैं।" उन्होंने कहा, जब वह जीवित थे तो उन्होंने सभी की मदद की और जब मौत के बाद भी उन्होंने वही किया।

अलग-अलग अस्पतालों में भेजे गए ऑर्गन
रूपचंद्र सिंह के अंगों को जरूरतमंद लोगों तक कैसे पहुंचाया गया? इस संबंध में समाचार एजेंसी ANI की रिपोर्ट के अनुसार, राष्ट्रीय अंग और ऊतक प्रत्यारोपण संगठन (NOTTO) के माध्यम से डोनर के अंग आवंटित किए गए।
रूपचंद्र की आंखों से देख सकेगा कोई और भी
हार्ट अपोलो अस्पताल, दिल्ली को आवंटित किया गया। लिवर को आर्मी हॉस्पिटल (रिसर्च एंड रेफरल) को आवंटित किया गया, जबकि किडनी का आवंटन दो अस्पतालों- एम्स और राममनोहर लोहिया अस्पताल में किया गया। रूपचंद्र सिंह की कॉर्निया को एम्स के नेशनल आई बैंक में रखा गया है।
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कैसे तेजी से भेजे जाते हैं ऑर्गन
डॉ विज बताती हैं कि ऑर्गन डोनेशन के बाद प्राप्त अंग समय सीमा के भीतर मरीज के पास सुरक्षित पहुंचें इसके लिए ग्रीन कॉरिडोर की मदद ली जाती है। इस संबंध में ओआरबीओ दिल्ली ट्रैफिक कंट्रोल रूम तक पहुंच गया है। इसने दिल्ली के विभिन्न हिस्सों में अलग-अलग अस्पतालों में अंगों का तेजी से स्थानांतरण सुनिश्चित किया है।
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