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Muskan ki Rasoi: महज पांच रुपये में घर का बना खाना खिला रहीं स्वाति श्रृंगी, चेहरों पर बिखेर रहीं मुस्‍कान

Muskan ki Rasoi:आज के जमाने में जब पांच रुपये में एक समोसा तक नहीं मिलता है उसी पांच रुपये में एक महिला भूखे लोगों का पेट भर रही हैं। जी हां आपने सही सुना पांच रुपये में पूरा खाना।
पांच रुपये में जरूरतमंदों को खाना खिलाने वाली एक महिला है, जो शहर में एक ठेला लगाती हैं और हर दिन लोगों को पांच रुपये में खाना वो भी घर का बना ताजा खाना खिलाती हैं।

Muskan ki Rasoi

कोटा में स्‍वाती खिला रही पांच रुपये में घर का बना खाना

ये कोटा की 43 साल की स्वाति श्रृंगी हैं जो मुस्‍कान की रसोई नाम की दुकान चलाती हैं। मुस्‍कान की रसोई की शुरूआत स्‍वाति श्रृंगी ने कैसे की ये कहानी गांव कनेक्‍शन से शेयर की हैं। जिसमें उन्‍होंने बताया कि मुस्‍कान की रसोई कोटा में शुरू करने की प्रेरणा उन्‍हें नोएडा में अनूप खन्‍ना द्वारा चलाई जा रही दादी की रसोई से मिली।

Muskan ki Rasoi

जानें स्‍वाति को कहां से मिली ये प्रेरणा

स्‍वाति बताती है कि उन्‍होंने कहा जब देश की राजधानी में दादी की रसोई को देखा तो मैंने सोचा मैं क्‍यों नहीं पांच रुपये में भूखे लोगों को खाना खिला सकती हूं।

मुस्‍कान की रसोई के कोटा में अब हैं ये तीन काउंटर

इसके बाद स्‍वाति ने मुस्‍कान की रसाई कोटा में शुरू की और सबसे पहले 2018 को अपना सबसे पहला काउंटर जैन सर्जिकल अस्‍पताल के सामने खोला, दूसरे न्‍यू मेडिकल कालेज के सामने, और तीसर सुधा हॉस्पिटल के सामने शुरू किया।

इतना सस्‍ता क्‍यों बेच रही खाना?

स्‍वाति बताती हैं कि कोटा में दूर-दराज से बच्‍चे पढ़ने आते हैं वहीं इलाज करवाने के लिए मरीज को लेकर महीनों उनके तीमारदार अस्‍पालों के आगे दिन काटते हैं। उन्‍हें घर का बना खाना नसीब नहीं होता। इसलिए मैंने अस्‍पताल के आगे अपने तीनों काउंटर लगाए।

क्‍यों पांच रुपये में स्‍वाती बेचती है खाना

स्‍वाती ने कि पांच रुपये इसलिए लेती हूं ताकि उनका स्‍वाभिमान बन रहे,उन्‍हें ये ना लगे कि वो फ्री खाना खा रहे हैं। उन्‍होंने कहा ये करके मैं लोगों के चेहरे पर मुस्‍कान लाना चाहती थी,लोग जो दुआएं देकर जाते है वो ही मेरी असली कमाई हैं।

मुस्‍कान की रसोई में जानें कितने लोग जुड़ चुके हैं

स्‍वाती ने बताया कि उन्‍होंने अकेले ही अपने घर से खाना बनाना शुरू कर अपना पहला काउंटर शुरू किया। मुस्‍कान की रसोई के लिए वो सुबह चार बजे से उठकर खाना बनाती थी लेकिन अब काउंटर बढ़ने के बाद उनके साथ 114 लोग मुस्‍कान की रसोई संभाल रहे हैं

मुस्‍कान की रसोई पांच साल पहले शुरू की थी

स्‍वाती बनती है कि शुरूआती दौर में मैंने पूरा पैसा अपनी जेब से लगाकर इसे शुरू किया। इसके बाद लोग जरूरतमंदों और परेशान लोगों का पांच रुपये में खाना खिलाने के लिए आर्थिक सहयोग करने लगे। स्‍वाती बताती हैं कि कोटा में वर्तमान समय में तीन काउंटर हैं। हर काउंटर पर हर दिन तीन सौ लोगों को खाना खिलाया जाता है। बीते पांच साल में मुस्‍कान की रसोई में लगभग तीन लाख यहां पर पांच रुपये में खाना खा चुके हैं।

थाली में सर्व किया जाता है ये खाना

मुस्‍कान की रसोई में जो खाना पांच रुपये में बेचा जाता है वो घर के बने खाने की तरह स्‍वादिष्‍ट होता है। जिसके कारण उनके काउंटर पर लोगों की भीड़ हमेशा लगी रहती है। पांच रुपये की प्‍लेट में हर दिन अलग-अलग व्‍यंजन होते हैं जिसमें की दाल, चावल, सजी तो कभी राजमा चावल रोटी तो कढ़ी चावल रोटी सब्जी समेत अन्‍य भोजन होता है।

स्‍वाती कहां से निकालती हैं कमाई

इसे अलावा स्‍वाती बताती हूं कि अपनी मुस्‍कान की रसोई चलाने के लिए पार्टियों में कैटरिंग का का भी शुरू कर दिया है। बर्थडे पार्टी अन्‍य फंग्शन के लिए एडवांस बुकिंग करवानी पड़ती है।

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