भारतीय छात्रा को मिला अमेरिका का सबसे प्रतिष्ठित 'यंग स्कॉलर' अवार्ड

वॉशिंगटन। भारत में जन्मी छात्रा राजलक्ष्मी नंदकुमार को अमेरिका में प्रतिष्ठित 'यंग स्कॉलर' का अवार्ड के लिए चुना गया है। राजलक्ष्मी को यह पुरस्कार ऐसी तकनीक विकसित करने के लिए गया है जो स्मार्टफोन की मदद से स्वास्थ्य संबंधी संभावित जानलेवा समस्याओं का पता लगाने में सक्षम है। वाशिंगटन यूनिवर्सिटी में पढ़ाई कर रहीं राजलक्ष्मी के माता-पिता तमिलनाडु के मदुरै शहर के रहने वाले हैं।

India-born student Rajalakshmi Nandakumar to get 2018 ‘Young Scholar’ award
2018 के मार्कोनी सोसायटी पॉल बेरेन यंग स्कॉलर अवार्ड के लिए चुनी गई राजलक्ष्मी ने ऐसी टेक्नोलोजी बनाई है जो फोन को एक्टिव सोनार सिस्टम में बदलकर उससे होने वाले स्वास्थ्य खतरों का पता लगा सकता है। यह शारीरिक गतिविधि और सांसों की हरकत से स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का पता लगाने में सक्षम है। इसमें डिवाइस का आपके शरीर से जुड़ा रहना जरूरी नहीं है। इसके लिए उन्होंने चमगादड़ों से प्रेरणा ली है। यह तकनीक किफायती भी है।

राजलक्ष्मी ने चेन्नई से कंप्यूटर साइंस एंड इंजीनियरिंग में स्नातक किया है। वह बेंगलुरु में माइक्रोसॉफ्ट रिसर्च के लिए भी काम कर चुकी हैं। जिसके बाद 2013 में अमेरिका चली गई। जहां वे वाशिंगटन यूनिवर्सिटी में शोध कार्यों में जुटी हुईं थी। उन्हें इस अवार्ड के अंतर्गत 5000 अमेरिकी डॉलर की रकम मिलेगी।

राजलक्ष्मी ने अपने शोध के बारे में बताते हुए कहा कि, मैं फिजियोलॉजिकल सिग्नल्स का पता लगाने के तरीकों के बारे में पता लगाना चाहती थी। ऐसा इसलिए क्योंकि ये हेल्थकेयर एप्लीकेशन के लिए सबसे ज्याद इस्तेमाल किए जाने वाले सिग्नल हैं।

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