IAS Priti Beniwal Biography: 14 ऑपरेशन के बाद आईएएस बनीं प्रीति बेनीवाल, शादी टूटने का दंश भी झेला
IAS Preeti Beniwal: आईपीएस प्रीति बेनीवाल हरियाणा के पानीपत जिले की रहने वाली है। यूपीएससी 2020 में 754वीं रैंक हासिल की। कुरुक्षेत्र विवि से एमटेक किया।

ट्रेन एक्सीडेंट के बाद 14 सर्जरी हुई। एक साल तक बिस्तर पर ही गुजारे। शादी टूटने का दंश झेला। इसके बावजूद नहीं हारी। मुश्किल हालात में भी मेहनत करना छोड़ा। नतीजा यह है आज प्रीति बेनीवाल भारतीय प्रशासनिक सेवा की अधिकारी हैं।
हरियाणा के पानीपत की रहने वाली प्रीति बेनीवाल को संघ लोक सेवा आयोग की सिविल सेवा परीक्षा में चौथे प्रयास में सफलता प्राप्त हुई। पहले तीन प्रयासों में प्रीति प्री भी पास नहीं कर पाई थी। यूपीएससी की सिविल सेवा परीक्षा 2020 में प्रीति ने 754वीं रैंक हासिल की थी।
प्रीति ने ये नौकरी भी पाई
- साल 2013 में एमटेक करने के बाद ग्रामीण बैंक में लिपिक पद पर नौकरी लगी।
- साल 2016 में फूड कॉपरेशन ऑफ इंडिया में असिस्टेंट जनरल टू के पद पर ज्वाइन किया।
- साल 2021 में विदेश मंत्रालय में असिस्टेंट सेक्शन अफसर पर चयन हुआ।
आईएएस प्रीति बेनीवाल का जीवन संघर्ष
- फरवरी 2016 में प्रीति बेनीवाल की शादी मतलौड़ा ब्लॉक के एक गांव में हुई।
- दिसम्बर 2016 एफसीआई की डिपार्टमेंटल प्रमोशन के लिए गाजियाबाद में एग्जाम देने के लिए जा रही थी।
- गाजियाबाद रेलवे स्टेशन पर अचानक पैर फिसलने से ट्रेन के आगे आ गई। ट्रेन के तीन कोच शरीर के ऊपर से गुजर गए। बायपास सर्जरी हुई और अन्य 14 ऑपरेशन हुए।
- एक्सीडेंट के बाद प्रीति एक साल तक बेड पर रही। एक्सीडेंट के चलते पति ने इसे छोड़ दिया और ससुराल से निकाल दिया।
प्रीति बेनीवाल की शिक्षा
- प्रीति की शुरुआती शिक्षा निकटवर्ती गांव फफड़ाना के यूनिक स्कूल से हुई।
- छठी से लेकर 10वीं तक की शिक्षा थर्मल के राजकीय स्कूल से हुई।
- 12वीं नॉन मेडिकल की शिक्षा इंडियन स्कूल मतलौड़ा से हुई।
- एनसी कॉलेज इसराना से इलैक्ट्रिक एंड कम्यूनिकेशन इंजीनियरिंग से बीटेक किया।
- 2011 से लेकर 2013 तक एसजीआई कॉलेज समालखा से एमटेक की डिग्री पाई।
परिवार से सपोर्ट से आईएएस बनी प्रीति
- प्रीति के पिता सुरेश कुमार थर्मल में जेई वन की पोस्ट पर रहे।
- मां बबीता आंगनबाड़ी कार्यकर्ता रही।
- पटवारी भाई पंकज बेनीवाल व लेक्चरर भाभी ने प्रीति का सपोर्ट किया।
- गाजियाबाद रेलवे स्टेशन पर एक्सीडेंट के बाद ससुराल की बजाय मायका वाले ने
- सपोर्ट किया।












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