जब दरोगा जी ने गरीब बच्चों से खरीदे दीए और चुटकियों में जीत लिया उनका दिल

नई दिल्ली। फेक एनकाउंटर करने वाली पुलिस के नाम से कुख्यात हो चुकी यूपी पुलिस का दीवाली पर एक बेहद ही मानवीय चेहरा दुनिया के सामने आया है। जब यूपी के एक कस्बे में पुलिस वालों ने दिवाली पर दीए बेच रहे गरीब बच्चों की मदद कर लाखों लोगों का दिल जीत लिया। उनकी एक फोटो सोशल मीडिया पर काफी तेजी से वायरल हो रही है। इस तस्वीर में दो छोटे-छोटे बच्चे बैठ कर मिट्टी के दीये बेचते हुए दिखाई दे रहे हैं वहीं उनके सामने पुलिस वाले खड़े हुए दिखाई दे रहे हैं। दरअसल इस घटना को एक फेसबुक यूजर ने अपनी वॉल पर शेयर किया था। जिसके बाद से लोग पुलिसकर्मियों की जमकर प्रशंसा कर रहे हैं।

पुलिस का एक दस्ता बाज़ार का मुआयना करने पहुंचा था

पुलिस का एक दस्ता बाज़ार का मुआयना करने पहुंचा था

Mohd Asgar नाम के फेसबुक यूजर ने इस वाकए को फेसबुक पर शेयर करते हुए लिखा कि, बेहद मासूम। सुबह से बैठे हैं। उम्मीद है दीए बिकेंगे। जिन बच्चों को त्योहार पर उछल कूद करनी चाहिए वो बाज़ार में बैठे हैं। मजबूरी है, गरीबी की। बेबसी की। चार पैसे आ जाएं तो खुश हो जाएं, मगर बच्चों की लाचारी देखिए दीये नहीं बिक रहे। लोग बाज़ार आ रहे हैं तो लाइट खरीद रहे हैं। झालर खरीद रहे हैं। महंगे आइटम खरीद रहे हैं। अगर कोई दीया खरीद भी रहा तो बच्चों से नहीं, बड़े दुकानदारों से।

बच्चे बेबसी से लोगों को आते और जाते देख रहे हैं...। सोच रहा हूं जब ये बच्चे अपने पैरेंट्स के साथ खरीदारी करने आए बच्चों को देख रहे होंगे, तो इन दो मासूमों के दिल की कैफियत क्या होगी? क्या दिल में हलचल होगी?जहां ये बच्चे बैठे हैं वो जगह है यूपी का ज़िला अमरोहा, गांव सैद नगली। ये मेरा अपना गांव है, जहां मैं पला बढ़ा हूं। दिवाली का बाज़ार सजा है। तभी पुलिस का एक दस्ता बाज़ार का मुआयना करने पहुंचता है।

 हम गरीब हैं। दिवाली कैसे मनाएंगे

हम गरीब हैं। दिवाली कैसे मनाएंगे

चश्मदीद का कहना है कि दस्ते में सैद नगली थाना के थानाध्यक्ष नीरज कुमार थे। दुकानदारों को दुकानें लाइन में लगाने का निर्देश दे रहे थे, उनकी नजर इन दो बच्चों पर गई। जो ज़मीन पर बैठे कस्टमर का इंतज़ार कर रहे हैं। चश्मदीद का कहना है कि मुझे लगा अब इन बच्चों को यहां से हटा दिया जाएगा। बेचारों के दीये बिके नहीं और अब हटा दिए जाएंगे। रास्ते में जो बैठे हैं।

थानाध्यक्ष बच्चों के पास पहुंचे। उनका नाम पूछा। पिता के बारे में पूछा। बच्चों ने बेहद मासूमियत से कहा, 'हम दीये बेच रहे हैं। मगर कोई नहीं खरीद रहा। जब बिक जाएंगे तो हट जाएंगे। अंकल बहुत देर से बैठे हैं, मगर बिक नहीं रहे। हम गरीब हैं। दिवाली कैसे मनाएंगे?

थानाध्यक्ष ने लोगों से की दीए खरीदने की अपील

थानाध्यक्ष ने लोगों से की दीए खरीदने की अपील

चश्मदीद का कहना है बच्चों की उस वक़्त जो हालत थी बयां करने के लिए लफ़्ज़ नहीं हैं। मासूम हैं, उन्हें बस चंद पैसों की चाह थी, ताकि शाम को दिवाली मना सकें। नीरज कुमार ने बच्चों से कहा, दीये कितने के हैं, मुझे खरीदने हैं...। थानाध्यक्ष ने दीये खरीदे। इसके बाद पुलिस वाले भी दीये खरीदने लगे। इतना ही नहीं, फिर थाना अध्यक्ष बच्चों की साइड में खड़े हो गए। बाज़ार आने वाले लोगों से दीये खरीदने की अपील करने लगे। बच्चों के दीये और पुरवे कुछ ही देर में सारे बिक गए। जैसे जैसे दीये बिकते जा रहे थे। बच्चों की खुशी का ठिकाना नहीं था।

जब सब सामान बिक गया तो थाना अध्यक्ष और पुलिस वालों ने बच्चों को दिवाली का तोहफा करके कुछ और पैसे दिए। पुलिस वालों की एक छोटी सी कोशिश से बच्चों की दिवाली हैप्पी हो गई। घर जाकर कितने खुश होंगे वो बच्चे। आप अंदाजा भी नहीं लगा सकते।

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