पैरेंट्स की इन गलतियों की वजह से बच्चा करने लगता है इग्नोर, आज ही करें ये 6 काम
Parents Tips: आमतौर पर बच्चे अपने माता-पिता की बातें नहीं सुनते और ये एक सामान्य समस्या है। कई माता-पिता शिकायत करते हैं बच्चे की उनकी बातों को जानबूझकर इग्नोर करते हैं। या फिर बात कुछ भी करने से साफ मना कर देते हैं। इसकी वजह से बच्चे और पैरेंट्स के बीच लड़ाई होने लगती है।
अगर आपका बच्चा इग्नोर कर रहा है तो यह कई कारणों से हो सकता है। यह महत्वपूर्ण है कि हम इस समस्या को समझें और इसे सुधारने के लिए उपाय अपनाएँ। यहां 6 तरीके दिए गए हैं जो आपको मदद कर सकते हैं:

1. बच्चों को सिखाएं कि माता-पिता की बात की क्या वैल्यू होती है। जब आप उनसे बात कर रहे हों, उन्हें ध्यान से सुनें। इससे उन्हें यह समझ में आएगा कि आप भी उनकी बातों को कितनी गंभीरता से लेते हैं।
2. कभी-कभी बच्चे आपकी बातों को इसलिए इग्नोर करते हैं क्योंकि बातें बहुत लंबी होती हैं या उन्हें समझ नहीं आतीं। कोशिश करें कि आप अपने निर्देशों को सरल और स्पष्ट रखें। जैसे, "अपना खिलौना रखो" की बजाय "तुम्हारा खिलौना यहाँ नहीं रखना चाहिए" कहना।
3. जब आपका बच्चा आपकी बात सुनता है, तो उसकी प्रशंसा करें। इससे उसे यह एहसास होगा कि सही व्यवहार के लिए उसे सराहा जा रहा है। अगर आप बच्चे को बार-बार हर बात के लिए डाटेंगे तो वह आपकी बातों को इग्नोर ही करेंगे। इसलिए ये एक बेहतर विकल्प हो सकता है।
4. कभी-कभी, बच्चों का ध्यान दूसरी चीजों पर होता है। इसलिए, एक निश्चित समय निर्धारित करें जब आप उनसे बात करें। इससे वे आपकी बातों को गंभीरता से लेंगे। जैसे, खाना खाने के समय या सोने से पहले।
5. बच्चे अक्सर अपने माता-पिता की नकल करते हैं। जब आप किसी से बात कर रहे हों, उन्हें दिखाएँ कि आप कैसे संवाद करते हैं। उदाहरण के लिए, जब आप किसी मित्र से बात कर रहे हों, तो उसे दिखाएँ कि आप उसे सुन रहे हैं और ध्यान दे रहे हैं।
6. बच्चों की भावनाओं को समझना बहुत ज़रूरी है। यदि वे थक गए हैं या परेशान हैं, तो उनकी सुनने की क्षमता कम हो सकती है। उनकी भावनाओं को समझने की कोशिश करें और जब वे अच्छा महसूस कर रहे हों, तब संवाद करने का प्रयास करें। कई बार माता-पिता को यह भी सोचना जरूरी होता है कि आपका बच्चा आपसे क्या चाहता है और उसकी क्या उम्मीदें हैं।
निष्कर्ष
बच्चों का आपकी बातों को इग्नोर करना एक आम समस्या है, लेकिन इसे सुधारने के लिए सही तरीके अपनाने से काफी फर्क पड़ सकता है। बच्चों को समझना और उनकी भावनाओं का सम्मान करना सबसे महत्वपूर्ण है। इससे आपके और बच्चे के बीच रिश्ता और भी ज्यादा मजबूत होगा।












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