जब पिताजी के मुंह में हो कारतूस

बंता : क्या तुम्हारे पिताजी मुंह में कारतूस भर कर गाते थे।
पत्नी : आज मैनें एक हसीन महिला देखी। उसकी सुंदरता का क्या बयां करूँ, मेरा तो एक औरत होने के बावजूद मन डोल गया।
संता : अच्छा , फिर क्या हुआ ?
पत्ती : मैने सोचा कि मैं आईने के सामने से हट जाऊं।
संता : आज शाम की चाय बाहर पीते हैं?
पत्नी : क्यों? तुम्हें क्या लगता है कि मैं चाय बनाते-बनाते थक गई हूं ?
संता : नहीं, दरअसल मैं ही कप प्लेट धोते-धोते तंग आ गया हूं।












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