Fact Check: चंद्रयान-3 के लिए लॉन्चपैड बनाने वाले HEC कर्मियों को नहीं मिला 18 माह से वेतन? जानें खबर का सच
Fact Check News: भारत के सफल मून मिशन 'चंद्रयान 3' का डंका पूरे विश्व में बजा है। भारत चांद के साउथ पोल पर सॉफ्ट लैंडिंग करने वाला दुनिया का पहला पहला देश बन गया। ऐसे में अलग-अलग मीडिया ग्रुप्स 'चंद्रयान-3' से जुड़े इसरो के वैज्ञानिकों के बारे में कई तरह की स्टोरी छाप रहे हैं।
इसी कड़ी में एक मीडिया रिपोर्ट में दावा किया गया है कि "इसरो के लिए लॉन्चपैड बनाने वाले एचईसी के लोग चाय और इडलीबेच रहे हैं, उनको 18 महीने से वेतन नहीं मिला है। ऐसे में क्या यह इस खबर की सच्चाई जानिए।

दावा- 18 महीने के वेतन बकाया
बीसीसी हिंदी ने ग्राउंड रिपोर्ट के हवाले से एक रिपोर्ट छापी है, जिसमें दावा किया गया है कि इसरो के लिए कई अहम काम करने वाले हैवी इंजीनियरिंग कॉरपोरेशन लिमिटेड (एचईसी) के कर्मचारियों को 18 महीने के बकाया वेतन नहीं मिला है। ऐसे में जब 18 महीने बीत गए और उन्हें वेतन नहीं मिला तो कई कर्मचारी चाय और इडली बेचने को मजबूर हैं।
अब इस खबर की सच्चाई के बारे में बताते हुए सरकार की नोडल एजेंसी पत्र सूचना कार्यालय की पीआईबी फैक्ट चेक ने ट्वीट करते हुए रिपोर्ट को भ्रामक बताया है।
ट्वीट कर बताई खबर की सच्चाई?
पीआईबी फैक्ट ने बताया कि BBC Hindi ने अपने एक आर्टिकल के हेडलाइन में दावा किया है कि ISRO के लिए लॉन्चपैड बनाने वाले हैवी इंजीनियरिंग कॉरपोरेशन लिमिटेड (एचईसी) के कर्मचारियों का 18 महीने का वेतन बकाया है। यह हेडलाइन भ्रामक है।
पोस्ट में आगे कहा गया कि एचईसी को 'चंद्रयान 3' के लिए किसी भी घटक के निर्माण का काम नहीं सौंपा गया था। एचईसी ने इसरो के लिए सितंबर 2003 से जनवरी 2010 तक कुछ बुनियादी ढांचे की आपूर्ति की थी।

Fact Check
दावा
दावा किया गया है कि ISRO के लिए लॉन्चपैड बनाने वाले हैवी इंजीनियरिंग कॉरपोरेशन लिमिटेड (एचईसी) के कर्मचारियों का 18 महीने का वेतन बकाया है।
नतीजा
पीआईबी फैक्ट ने ट्वीट करते हुए बताया कि खबर भ्रामक है।












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