क्या दुश्मनों के हाथ लग गया भारतीय फौज का भगोड़ा मुश्ताक? पहलगाम हमले पर झूठा वीडियो करवा रहा वायरल
Fact Check of Deserter Indian Army Soldier: गलती से बॉर्डर पार करने पर पाक रेंजर्स द्वारा सीमा सुरक्षा सुरक्षा बल के कांस्टेबल पूर्णम कुमार शॉ तो आज 14 मई 2025 को 21 दिन बाद सुरक्षित भारत लौट आए हैं।अब सोशल मीडिया पर एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें एक शख्स खुद को भारतीय सेना का जवान बताते हुए केंद्र सरकार, सुरक्षा एजेंसियों और सेना पर 22 अप्रैल 2025 को हुए पहलगाम आतंकी हमले को लेकर गंभीर आरोप लगाता दिखाई दे रहा है। ऐसा लग रहा है कि भारतीय सेना का यह फौजी दुश्मनों के हाथ लग गया है।
सोशल मीडिया पर एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें एक शख्स खुद को भारतीय सेना का जवान बताते हुए केंद्र सरकार, सुरक्षा एजेंसियों और सेना पर 22 अप्रैल 2025 को हुए पहलगाम आतंकी हमले को लेकर गंभीर आरोप लगाता दिखाई दे रहा है। यह वीडियो लोगों के बीच भ्रम और नाराज़गी पैदा कर रहा है।

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वीडियो में दिखाई देने वाला युवक खुद को जम्मू-कश्मीर के त्राल (पुलवामा) का रहने वाला दिलशायर मुश्ताक बता रहा है, जो भारतीय सेना की 29 राष्ट्रीय राइफल्स (RR) यूनिट से संबद्ध है। उसका दावा है कि वह आठ साल पहले सेना में भर्ती हुआ था और पिछले तीन वर्षों से कश्मीर में तैनात है।
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वीडियो में मुश्ताक अपने परिवार और भाई को भी संदेश देता है। वह कहता है कि उसके माता-पिता ने उसे सेना में भेजकर गलती की, और वह अपने भाई को सेना छोड़ने की सलाह देता है। यह बयान अपने आप में संदेहास्पद है और इसके पीछे दबाव की आशंका जताई जा रही है।
आखिरी बार चाची के घर पर देखा गया
मीडिया रिपोर्टों और सूत्रों के अनुसार, लांस नायक दिलशायर मुश्ताक (12 जेएके एलआई), जो वर्तमान में पट्टन में तैनात 29 आरआर से संबद्ध हैं, मार्च 2025 से ड्यूटी से नदारद हैं। मुश्ताक को आखिरी बार गांदरबल जिले के वास्कुरा में अपनी चाची के घर पर देखा गया था। परिवार ने उसकी गुमशुदगी की शिकायत 11 मार्च 2025 को वास्कुरा पुलिस चौकी में दर्ज कराई थी, जिसके बाद से उसका कोई अता-पता नहीं है।
कहीं मनोवैज्ञानिक युद्ध रणनीति का हिस्सा तो नहीं?
सूत्रों का मानना है कि यह वीडियो विरोधी तत्वों द्वारा मनोवैज्ञानिक दबाव या जबरदस्ती में रिकॉर्ड करवाया गया हो सकता है। जिस तरह से वीडियो में सरकार और सेना के खिलाफ आरोप लगाए गए हैं, वह इस ओर इशारा करता है कि सैनिक संभवतः कैद में है या कट्टरपंथी ताकतों के दबाव में। इस तरह की घटनाएं आमतौर पर शत्रुतापूर्ण ताकतों द्वारा सुरक्षा बलों को बदनाम करने और जनता में भ्रम फैलाने की एक सोची-समझी रणनीति (psychological warfare) का हिस्सा होती हैं।
सोशल मीडिया पड़ताल में भी मिला यह वीडियो
वनइंडिया हिंदी की फैक्ट चेक टीम ने वायरल वीडियो की गूगल लेंस के माध्यम से पड़ताल की। उन्हें यह वीडियो कई प्लेटफॉर्म्स पर मिला। इसी दौरान उन्हें NoukeqalamNews.com की एक खबर भी मिली, जिसमें जवान के बारे में विस्तृत जानकारी दी गई थी।
खबर में आशंका जताई गई कि यह वीडियो किसी दबाव में आकर रिकॉर्ड किया गया हो सकता है और सैनिक से झूठे आरोप जबरन बुलवाए गए हों। यह संदिग्ध परिस्थितियों की ओर संकेत करता है, जिससे यह मामला और अधिक गंभीर हो जाता है।
PIB Fact Check का दावा: भगोड़ा है यह जवान
PIB Fact Check की जांच में यह वीडियो झूठा और भ्रामक पाया गया है। फैक्ट चेक टीम ने पुष्टि की है कि वीडियो में दिखाई देने वाला व्यक्ति एक भगोड़ा सैनिक (Deserter) है, जो मार्च 2025 से ड्यूटी पर नहीं लौटा है। वह न तो अपनी यूनिट में है और न ही अपने परिवार के संपर्क में है। PIB ने लोगों से अपील की है कि ऐसे भ्रामक वीडियो से सतर्क रहें और आधिकारिक स्रोतों से मिली जानकारी पर ही भरोसा करें।
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Fact Check
दावा
पहलगाम हमले को लेकर भारत सरकार व सेना पर कई गंभीर आरोप।
नतीजा
यह भारतीय सेना का भगोड़ा जवान है।












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