अमिताभ बच्चन के कितने रूप

बहुतों के लिए यह जानना दिलचस्प होगा कि अमिताभ बच्चन ने 35 फिल्मों में एक अपराधी (दादा, डान, हत्यारे या चोर-तस्कर) की भूमिका निभायी है। 20 फिल्मों में वह पुलिस अफसर बने हैं। 16 फिल्मों में उन्होंने कलाकार की किरदार निभाया है।

13 फिल्मों में वे अधिकारी की भूमिका में रहे हैं और 11 फिल्मों में उन्होंने देशभक्त तथा 9 फिल्मों में किसान अथवा ग्रामीण की भूमिका अदा की है। यह तथ्य भावना सौमैया ने अपनी ताजा पुस्तक 'बच्चननालियाः द फिल्म एण्ड मेमोरोबिलिया ऑफ अमिताभ बच्चन" में उद्घाटित किया है।

कहा जाता है कि बहुत सारी अलग-अलग तरह की भूमिकाएं कलाकार के प्रभाव को कम कर देती हैं। लेकिन अमिताभ बच्चन के मामले में यह स्थापना गलत साबित होती है और उनकी लोकप्रियता इतनी विविध अवतारों के बावजूद भारतीय समाज में अद्वितीय है।

भावना सौमैय्या की इस पुस्तक में अमिताभ बच्चन की उन तमाम फिल्मों के पोस्टर जो 1971 से 2008 यानि 'सात हिन्दुस्तानी" से लेकर 'गाड तुस्सी ग्रेट हो" को संग्रहित किया गया है और उनका विश्लेषण, फिल्म से जुड़े लोगों की टिप्पणियॉ और स्मृतियॉ तथा स्वंय अमिताभ बच्चन की स्मृतियों को पुस्तक में सजोया गया है।

पुस्तक कुछ सर्वथा नयी जानकारियॉ पाठकों को देती हैं जैसे 'सात हिन्दुस्तानी' में जो अमिताभ बच्चन की पहली फिल्म थी और जिसे ख्वाजा अहमद अब्बास ने बनाया था, में उनकी हीरोइन की भूमिका हास्य अभिनेता आगा की पुत्री शहनाज आगा ने दिखायी थी और इस फिल्म के लिए उन्हें मात्र 1000 रूपये पारिश्रमिक प्राप्त हुआ था। शूटिंग के दौरान उन्हें सरकारी गेस्ट हाउस में जमीन पर अन्य कलाकारों से सोना पड़ा था।

पुस्तक में आपको अमिताभ बच्चन की उन फिल्मों के पोस्टर भी मिलेंगे जिनसे अधिकांश फिल्मी दर्शक अपरिचित हैं। जैसे जया भादुड़ी के साथ आयी उनकी फिल्म 'बंशी और बिरजू" तथा 'एक नजर" जो सन्‌ 1971-72 में प्रदर्शित हुई थी और यही से उनके प्रेम की शुरूआत हुई थी।

इस पुस्तक से यह भी पता चलता है कि अमिताभ बच्चन की पहली होम प्रोडक्शन फिल्म 'अभिमान" थी जो उनकी शादी के पहले बननी शुरू हुई थी जबकि फिल्म का अंतिम दृश्य उनकी शादी के बाद सूट हुआ और शूटिंग से सीधे वे अपने हनीमून पर चले गये थे।

पुस्तक को ओसियान प्रकाशन ने प्रकाशित किया है। भावना सौमैय्या एक फिल्म पत्रकार हैं जो पिछले 30 वर्षों से फिल्मों पर लिख रही है और इसके पहले भी उनकी दो पुस्तकें अमिताभ बच्चन पर प्रकाशित हो चुकी हैं। पहली- 'द लिजेन्ड" और दूसरी-'सलाम वालीवुड"। यह पुस्तक सिनेमा अध्ययन की नये आयाम खोलती है और लेखन की नई संभावनाओं के ओर इशारा करती है।

[चंद्रभूषण 'अंकुर' जाने-माने फिल्म आलोचक हैं और सिनेमा तथा इसके सामाजिक प्रभावों के बारे में लेख व टिप्पणियों के लिए जाने जाते हैं।]

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