Shambhavi Tiwari: कौन हैं ISC टॉपर शांभवी तिवारी? परफेक्ट स्कोर लाकर रचा इतिहास, क्या है फ्यूचर प्लान?
Shambhavi Tiwari: काउंसिल फॉर द इंडियन स्कूल सर्टिफिकेट एग्जामिनेशन (CISCE) द्वारा घोषित 2026 के परिणामों में झारखंड का मान पूरे देश में बढ़ा है। इस साल के नतीजे न केवल समयबद्धता बल्कि छात्रों के असाधारण प्रदर्शन के लिए भी याद रखे जाएंगे। ISC रिजल्ट (12वीं) में परफेक्ट स्कोर लाकर झारखंड की छात्रा ने इतिहास रच दिया है।
देशभर के लाखों छात्र बेसब्री से सुबह 11 बजे का इंतजार कर रहे थे और जैसे ही परिणाम आए, जमशेदपुर की एक बेटी ने अपनी सफलता से सबको चौंका दिया। छोटे शहरों से प्रतिभा निकलने का सिलसिला इस बार भी जारी रहा, जहां कोल्हान क्षेत्र के विद्यार्थियों ने राष्ट्रीय स्तर पर अपनी धाक जमाई है। विशेषकर जमशेदपुर की शांभवी तिवारी (Shambhavi Tiwari) ने 'परफेक्ट स्कोर' हासिल कर यह साबित कर दिया कि दृढ़ संकल्प और सही मार्गदर्शन से किसी भी लक्ष्य को पाया जा सकता है।

कौन हैं शांभवी तिवारी, ISC रिजल्ट में लाया परफेक्ट स्कोर
जमशेदपुर के सेक्रेड हार्ट कॉन्वेंट स्कूल की मेधावी छात्रा शांभवी तिवारी ने ISC (12वीं) की परीक्षा में 100 प्रतिशत अंक प्राप्त कर नेशनल टॉपर बनने का गौरव हासिल किया है। शांभवी का स्कोर कार्ड किसी मिसाल से कम नहीं है; उन्होंने बायोलॉजी, केमिस्ट्री, फिजिक्स और इंग्लिश जैसे कठिन विषयों में 100 में से 100 अंक अर्जित किए, जबकि हिंदी में उन्हें 99 अंक मिले। उनकी इस ऐतिहासिक उपलब्धि ने न केवल उनके स्कूल बल्कि पूरे झारखंड राज्य को गौरवान्वित किया है।
सफलता का मंत्र, अनुशासन और कड़ा परिश्रम
अपनी इस शानदार जीत पर शांभवी ने साझा किया कि उनकी सफलता का कोई शॉर्टकट नहीं था। वह प्रतिदिन 7 से 8 घंटे तक नियमित पढ़ाई करती थीं। शांभवी का मानना है कि निरंतरता और शिक्षकों का मार्गदर्शन ही उन्हें इस मुकाम तक ले आया है।
उनके परिवार में भी शिक्षा का माहौल रहा है। उनकी माता, निभा सिन्हा, खुद एक केमिस्ट्री टीचर हैं और पिता, राकेश रमन, एयर इंडिया में प्रोग्राम एग्जीक्यूटिव के पद पर कार्यरत हैं। परिवार के अनुसार, शांभवी बचपन से ही मेधावी रही हैं और हर कक्षा में अव्वल आती रही हैं।
डिजिटल डिस्ट्रैक्शन से बनाई दूरी
आज के दौर में जहां छात्र सोशल मीडिया पर काफी समय बिताते हैं, शांभवी ने एक अलग राह चुनी। उनके पिता ने बताया कि परीक्षा की तैयारी के दौरान शांभवी ने सोशल मीडिया से पूरी तरह दूरी बना ली थी और मोबाइल फोन का इस्तेमाल न के बराबर किया। उनका पूरा ध्यान केवल अपने पाठ्यक्रम और रिविजन पर केंद्रित रहा।
डॉक्टर बनकर शांभवी करना चाहती हैं समाज सेवा
12वीं की टॉपर बनने के बाद शांभवी के पास जश्न मनाने का समय कम है क्योंकि उनका अगला लक्ष्य और भी बड़ा है। वह 3 मई को होने वाली मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET की तैयारी में पूरी गंभीरता से जुटी हुई हैं। शांभवी का सपना एक कुशल डॉक्टर बनकर समाज की सेवा करना है।
कोल्हान क्षेत्र का दबदबा
सिर्फ शांभवी ही नहीं, बल्कि झारखंड के कोल्हान क्षेत्र के अन्य छात्रों ने भी इस बार शानदार प्रदर्शन किया है। ICSE (10वीं) के नतीजों में भी इस क्षेत्र के कई छात्रों ने स्टेट टॉपर्स की लिस्ट में जगह बनाई है। यह इस बात का प्रमाण है कि कोल्हान अब शिक्षा के एक बड़े केंद्र के रूप में उभर रहा है।
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