नकल पर नकेल के लिए पश्चिम बंगाल बोर्ड ने निकाली अजब तरकीब! स्टूडेंट्स के टॉयलेट जाने पर ही लगा दी रोक
No Toilet Breaks During Exam: कल्पना कीजिए एक ऐसा एग्जाम हॉल, जहां घड़ी की टिक-टिक के साथ आपका टाइम भी दौड़ रहा हो, सवाल भी सामने हों और मन में बेचैनी भी हो, लेकिन आप चाहकर भी टॉयलेट नहीं जा सकते! पश्चिम बंगाल में कुछ ऐसा ही नया नियम लागू किया गया है। राज्य की उच्चतर माध्यमिक परीक्षा के दौरान अब छात्रों को टॉयलेट ब्रेक नहीं मिलेगा। इस ऐलान ने स्टूडेंट्स के साथ-साथ पेरेंट्स की चिंता भी बढ़ा दी है।
परीक्षा की अवधि 1 घंटा 15 मिनट तय की गई है, और इस दौरान वॉशरूम जाना पूरी तरह मना होगा। रिपोर्ट के अनुसार ऐसा नकल रोकने के उद्देश्य से किया गया है। बोर्ड का कहना है कि सिर्फ मेडिकल इमरजेंसी में ही स्टूडेंट को टॉयलेट जाने की अनुमति मिलेगी। बोर्ड ने इस बदलाव को जरूरी बताया है, लेकिन पेरेंट्स, डॉक्टर्स और कानूनी विशेषज्ञ इसे बच्चों के अधिकारों और सेहत के खिलाफ मान रहे हैं। क्या यह फैसला वाकई बच्चों के भविष्य को बेहतर बनाएगा या फिर और मुश्किलें खड़ी करेगा?

छात्रों के लिए आई नई गाइडलाइन
पश्चिम बंगाल उच्चतर माध्यमिक शिक्षा परिषद (WBCHSE) ने परीक्षा के लिए 23 पन्नों की गाइडलाइन जारी की है। सबसे बड़ा बदलाव यह है कि अब छात्रों को परीक्षा के दौरान टॉयलेट जाने की अनुमति नहीं दी जाएगी। यह नियम खास तौर पर सेमेस्टर 3 की परीक्षा के लिए लागू होगा, जो केवल 1 घंटा 15 मिनट की होगी।
ये भी पढ़ें: स्टूडेंट्स के लिए स्पेशल स्कीम, 5 KM से दूर हुआ स्कूल तो मिलेगा ट्रेवल अलाउंस, क्या है रजिस्ट्रेशन प्रोसस?
OMR शीट पर पहली बार परीक्षा
इस बार तीसरे सेमेस्टर की परीक्षा OMR शीट पर होगी। पहले इसके लिए नियमों की जानकारी भी दी गई थी। अब यह तय किया गया है कि परीक्षा पूरी तरह OMR मोड में होगी। वहीं, यदि पर्यवेक्षक की कमी होती है तो प्राइमरी और अपर प्राइमरी स्कूलों के शिक्षक भी ड्यूटी पर लगाए जा सकते हैं, लेकिन केवल स्थायी शिक्षक ही इस काम के लिए योग्य होंगे।
टॉयलेट न जाने देने पर उठे सवाल
छात्रों को परीक्षा के बीच टॉयलेट न जाने देने का यह फैसला विवादों में आ गया है। पैरेंट्स, डॉक्टर, वकील और एसोसिएशन इस फैसले की आलोचना कर रहे हैं। पैरेंट्स का कहना है कि यह बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य पर असर डाल सकता है और यह फैसला उनके हक के खिलाफ है।
'सेहत के लिए नुकसानदायक'
साइकोलॉजिस्ट का कहना है कि परीक्षा के समय बच्चों में पहले ही तनाव होता है। ऐसे में टॉयलेट रोकने से घबराहट और बेचैनी और बढ़ सकती है। बार-बार टॉयलेट रोकने से यूरिनरी इंफेक्शन, ब्लैडर पर असर और किडनी की समस्या हो सकती है। ये खासतौर पर लड़कियों और छोटे बच्चों में ज्यादा देखने को मिलता है।
पेरेंट्स एसोसिएशन का विरोध
दिल्ली पेरेंट्स एसोसिएशन (Delhi Parents Association) की अध्यक्ष अपराजिता गौतम ने इसे बच्चों के अधिकारों का उल्लंघन बताया। उन्होंने कहा कि परीक्षा में सुरक्षा के लिए कई उपाय किए जा सकते हैं, लेकिन बच्चों को टॉयलेट न जाने देना सही नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि JEE और NEET जैसे एग्जाम में भी बच्चों को सुरक्षा जांच के बाद अनुमति दी जाती है।
बच्चों से संवाद और काउंसलिंग जरूरी
एसोसिएशन का मानना है कि बच्चों को पहले से समझाया जाए कि परीक्षा के समय टॉयलेट न जाना उनके ही फायदे में होगा। साथ ही, अगर बच्चे को परीक्षा के दौरान घबराहट होती है तो पैरेंट्स को पहले से उसकी काउंसलिंग करानी चाहिए। कंपटीटिव एग्जाम में हर मिनट कीमती होता है।
ये भी पढ़ें: UP TGT Exam 2025: upsessb.pariksha.nic.in पर जल्द जारी होगा एडमिट कार्ड, चेक करें परीक्षा की तारीख और पैटर्न












Click it and Unblock the Notifications