Sushila Karki: नेपाल की नई पीएम सुशीला कार्की ने ली है कौन सी डिग्री? BHU से है बेहद खास रिश्ता
Sushila Karki Education: नेपाल की राजनीति में इन दिनों एक नया और ऐतिहासिक मोड़ आया है। देश में लगातार Gen-Z के विरोध प्रदर्शन और उथल-पुथल के बीच सरकार गिर गई। तब सारा ध्यान एक ऐसे चेहरे पर गया जिसे लोग ईमानदारी और साहस का प्रतीक मानते हैं। यह चेहरा है सुशीला कार्की का। वह महिला जिसने न्यायपालिका में रहते हुए भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त फैसले सुनाए। अब प्रधानमंत्री की कुर्सी पर बैठकर देश को स्थिरता की ओर ले जाने की जिम्मेदारी संभाल रही हैं।
दिलचस्प बात यह है कि उनकी जड़ें भारत के वाराणसी से भी जुड़ी हैं। उन्होंने यहां के BHU से राजनीति शास्त्र की पढ़ाई की थी। अब नेपाल की पहली महिला अंतरिम प्रधानमंत्री के तौर पर कार्की से देश को उम्मीद है कि वे लोकतंत्र और न्याय की दिशा में नई राह दिखाएंगी।

वाराणसी से की है सुशीला कार्की ने पढ़ाई
नेपाल की नई अंतरिम प्रधानमंत्री सुशीला कार्की का भारत से गहरा रिश्ता रहा है। उन्होंने 1973 से 1975 के बीच वाराणसी स्थित बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी (BHU) से राजनीति शास्त्र में MA किया था। पढ़ाई के दिनों से ही वे सामाजिक और राजनीतिक माहौल को करीब से समझने लगी थीं।
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प्रारंभिक जीवन और करियर
सुशीला कार्की का जन्म 7 जून 1952 को बिराटनगर में हुआ। पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने वकालत शुरू की और 1979 में न्यायिक सेवा से जुड़ीं। आगे चलकर वे सुप्रीम कोर्ट तक पहुँचीं और 2009 में पहली बार वहाँ जज बनीं।
नेपाल की पहली महिला चीफ जस्टिस
जुलाई 2016 से जून 2017 तक उन्होंने नेपाल की पहली महिला चीफ जस्टिस के रूप में काम किया। इस दौरान उन्होंने कई अहम फैसले सुनाए और भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त रुख अपनाया। उनकी यही छवि आज उन्हें राजनीति में भी मजबूत बनाती है।
प्रधानमंत्री बनने का रास्ता
हाल ही में नेपाल में लगातार विरोध प्रदर्शन और हिंसा के बाद सरकार ने इस्तीफा दिया। हालात बिगड़ने के बाद राष्ट्रपति ने सुशीला कार्की को अंतरिम प्रधानमंत्री बनाया। 12 सितंबर 2025 को उन्होंने शपथ ली और अब वे चुनाव होने तक सरकार चलाएँगी।
चुनौतियां और जिम्मेदारियां
- अंतरिम पीएम बनने के बाद उनके सामने कई मुश्किल काम हैं।
- प्रदर्शन और हिंसा से प्रभावित इलाकों में शांति बहाल करना।
- घायलों के लिए मुफ्त इलाज और पीड़ित परिवारों को मुआवजा दिलाना।
- भ्रष्टाचार के मामलों में सख्ती और जवाबदेही तय करना।
- मार्च 2026 में होने वाले चुनाव को निष्पक्ष और शांतिपूर्ण तरीके से कराना।
युवा और जनता की उम्मीदें
सुशीला कार्की की साफ-सुथरी छवि और न्यायपालिका का अनुभव उन्हें जनता के बीच लोकप्रिय बना रहा है। खासकर युवा पीढ़ी उन्हें उम्मीद की तरह देख रही है, क्योंकि वे पहले भी भ्रष्टाचार और गलत फैसलों के खिलाफ खड़ी रही हैं।
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