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Astro Tips: जन्मपत्री से कैसे जानें वास्तु दोष?

By Pt Anuj K Shukla
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    लखनऊ। भवन हमारें जीवन का एक खास हिस्सा है। हम दुनिया घूम आये आलीशान होटलों में रह लें लेकिन असली शान्ति हमें अपने घर में ही मिलती है। घर में सुकून व शान्ति मिलने में असली भूमिका निभाती है, वहां की ऊर्जा। ऊजा अगर सकारात्मक है तो दिन-दूने, रात-चौगुने आपकी प्रगति होगी किन्तु नकारात्मक ऊर्जा मिलने पर तनाव, रोग, अशान्ति, झगड़े व प्रगति में बाधायें आती है।

    आइए जानते है कि जन्मपत्री से कैसे जानें वास्तु दोष...

    जन्म कुण्डली का चतुर्थ भाव

    जन्म कुण्डली का चतुर्थ भाव

    • जन्म कुण्डली का चतुर्थ भाव हमारे मकान व अचल संपत्ति का कारक होता है। चतुर्थ भाव, चतुर्थेश पर यदि पाप प्रभाव ही तो वास्तु दोष संबंधी संभावनाएं बढ़ जाती हैं। चतुर्थ भाव में यदि राहु स्थित हों अथवा चतुर्थ भाव से उसका किसी भी प्रकार का संबंध हो जाये तो निश्चित रूप से व्यक्ति के भवन में वास्तु दोष परिलक्षित होता है।
    • अक्सर ऐसा देखने को मिलता है कि व्यक्ति एक बड़ा प्लाट खरीद लेता है और अपनी जरूरत के अनुसार उसके कुछ हिस्से में निर्माण कर लेता है। अपनी जरूरत पड़ने पर आधे प्लाट को बेच देता है या किसी और के नाम पर हस्तान्तरित कर देता है। ऐसा करने पर भवन में वास्तुदोष के संकट मॅडराने लगते है। अतः ऐसा कदापि न करें।
    यदि किसी जातक की कुण्डली में मंगल राहु हो तो

    यदि किसी जातक की कुण्डली में मंगल राहु हो तो

    • यदि किसी जातक की कुण्डली में मंगल राहु का आपस में किसी भी प्रकार का आपसी संबंध हो, एवं वो संबंध चतुर्थ भाव या चतुर्थेश को किसी प्रकार प्रभावित कर दे तो मकान में वास्तुदोष देखने को मिलते है। राहु मंगल का एक साथ होने से घर में रहने वाले लोगों में चारित्रिक दोष के कारण भी वास्तु दोष उत्पन्न होते है।
    • जन्म पत्रिका में जो ग्रह सबसे कमजोर है और यदि वे ग्रह चतुर्थ भाव से किसी तरह का संबंध बना रहे हैं तो भी दोष की सूचना देता है। यदि चतुर्थेश का षड्बल कम है तो दोष की संभावना और बढ़ जाती है। दोष वहां खोजें जहां चतुर्थेश बैठे हैं।
    राहु और शुक्र

    राहु और शुक्र

    • अगर किसी कुण्डली में राहु और शुक्र का किसी भी प्रकार से सम्बन्ध है तो जातक का चरित्र अच्छा नहीं होता है। मकान में रहने के बाद भी यदि स्त्री/पुरूष अन्य लोगों से सम्बन्ध स्थापित करते है तो निश्चित रूप से उस भवन में वास्तु दोष का प्रभाव आ जायेगा, जिस कारण रहने वाले लोगों में झगड़े, तनाव व विकास में प्रगति नहीं होगी।
    • यदि गोचर में चतुर्थ भाव से पाप ग्रह शनि, राहु अथवा केतु का शुभ संचार हो रहा हो तो मान लीजिए दोष निवारण के लिए उस दिशा में तोड़फोड़ अवश्य होगी।
    दोष निवारण

    दोष निवारण

    • वास्तु का विकास या सुधार उसी दिशा में होगा , जो ग्रह की दिशा है। सूर्य-पूर्व, चंद्रमा-वायव्य , मंगल-दक्षिण, बुध-उत्तर, बृहस्पति-ईशान, शुक्र-आग्नेय कोण, शनि-पश्चिम दिशा, राहु-केतु -नैऋत्य कोण।
    • जिस ग्रह का षड्बल कम होगा उस दशा में दोष परेशानी पैदा करेंगे और अधिक षड्बल वाले ग्रह की दशा -अंतर्दशा में दोष की निवृत्ति की संभावना बढ़ेगी।जिन भावों के स्वामी ग्रह वक्रि हैं उन भावों से सम्बंधित स्थानो में वास्तु दोष होता है।

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    English summary
    Birthdays are directly associated with Janampatri, which holds all the ups, this is the article based on the realation between Janampatri and Vastu.

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