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Surya ka Aadra Nakshatra mai Pravesh: खुश हो जाइए, सूर्य का आर्द्रा नक्षत्र में प्रवेश, अब होगी झमाझम बारिश

Surya ka Aadra Nakshatra mai Pravesh: सूर्य जब मिथुन राशि में होता है, तो वह क्रमशः मृगशिरा, आर्द्रा और पुनर्वसु नक्षत्रों में गोचर करता है। जब सूर्य आर्द्रा नक्षत्र में प्रवेश करता है, तो इसे एक विशेष खगोलीय और ज्योतिषीय घटना माना जाता है। यह समय वर्षा ऋतु के आगमन का संकेतक होता है और भारतीय पंचांग में इसे \"आर्द्रा प्रवेश\" या \"आर्द्रारंभ\" कहा जाता है।

यह विशेषत: कृषि, पर्यावरण पर प्रभाव डालता है। सूर्य के आर्द्रा नक्षत्र में रहने के दौरान अच्छी वर्षा होती है। सूर्य इस नक्षत्र में लगभग 15 दिन रहेगा, ऐसे में इन पंद्रह दिनों में अच्छी वर्षा होगी जो प्रकृति और पर्यावरण के लिए शुभ रहेगा। सूर्य 22 जून को प्रात: 6 बजकर 18 मिनट पर आर्द्रा नक्षत्र में प्रवेश करेगा।

Surya ka Aadra Nakshatra mai Pravesh

सूर्य के आर्द्रा में प्रवेश के मुख्य प्रभाव

  • सूर्य के आर्द्रा नक्षत्र में प्रवेश करते ही मानसून सक्रिय होता है। इस कारण इसे \"आर्द्रा प्रवेश पर्व\" भी कहा गया है। दक्षिण भारत विशेषकर आंध्र, कर्नाटक और तमिलनाडु में इसका बड़ा महत्व होता है।
  • आर्द्रा नक्षत्र का स्वामी राहु है, जो परिवर्तन और उथल-पुथल का प्रतीक है। इसलिए इस समय मौसम अचानक बदलता है। तेज हवाएं, गरज-चमक, बिजली और बादलों की गड़गड़ाहट के साथ भारी वर्षा होती है। पूर्व और उत्तर-पश्चिम भारत में इस समय तेज वर्षा होती है।
  • राहु की प्रकृति के कारण इस समय लोगों के मन में बेचैनी, कल्पनाशीलता और अनिश्चितता बढ़ सकती है। कुछ लोगों को मानसिक अस्थिरता, चिड़चिड़ापन या असंतुलन का अनुभव हो सकता है। वाद-विवाद की आशंका भी रहती है।

धरती के लिए जल की आपूर्ति का संकेत

  • सूर्य के आर्द्रा नक्षत्र में आने पर किसान खेतों की जुताई, बीज बोने जैसे कार्य शुरू करते हैं। यह समय धरती के लिए जल की आपूर्ति का संकेत है।
  • आर्द्रा नक्षत्र तामसिक और उग्र स्वभाव का होता है। सूर्य जैसे तेजस्वी ग्रह का इसमें प्रवेश कुछ क्षेत्रों में अशांति, प्राकृतिक आपदाएं या राजनीतिक अस्थिरता भी दर्शा सकता है, विशेषकर यदि राहु की दशा या गोचर से संबंधित हो।

रुद्र के अश्रु माना गया है

कुछ धार्मिक परंपराओं में इसे रुद्र के अश्रु (शिव के रोने का प्रतीक) माना गया है। अतः यह समय आंतरिक शुद्धि, आत्मचिंतन और तपस्या के लिए उपयुक्त होता है।

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