Solar eclipse 2018: सूर्य ग्रहण और शनिअमावस्या साथ-साथ इसलिए रखें इस बात का ख्याल
नई दिल्ली। आज एक ऐतिहासिक खगोलीय घटना आकाश में घटने जा रही है, जी हां आज 'सूर्यग्रहण' लगेगा। जहां आज ग्रहण है वहीं दूसरी ओर आज शनि अमावस्या भी है इसलिए धार्मिक दृष्टिकोण से ये ग्रहण काफी प्रभावी है। हालांकि ये ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा लेकिन इसके बावजूद इसका अपना महत्व है इसलिए आज का दिन जाया ना होने दें क्योंकि ये दुर्लभ संयोग आपको जल्दी नहीं मिलेगा।

अमावस्या का दिन पितरों को समर्पित
काशी के पंडित दिवाकर शास्त्री के मुताबिक अगर अमावास्या शनिवार को हो और सूरज और चंद्रमा एक सीध में हो तो ये योग के दृष्टिकोण से काफी शुभ होता है। वैसे भी ये सावन की अमावस्या है, आज का दिन पितरों को समर्पित है और आज के दिन विशेष पूजा का विधान है, ऊपर से ग्रहण लग जाने की वजह से आज के दिन की गई पूजा सफल होगी, ऐसा माना जाता है।

रखें इन बातों का ख्याल
अमावस्या की पूजा घर के अंदर ना करें क्योंकि ग्रहण के सूतक काल में भगवान को छूआ नहीं जाता है इसलिए पूजा नदी या नहर किनारे ही करें। इस अमावस्या का हिन्दू धर्म में विशेष महत्त्व है। इस दिन मौन व्रत रहने से सहस्र गोदान का फल मिलता है।

क्या करें?
- भगवान का ध्यान करें।
- घर में धूप और अगरबत्ती जलाकर रखें।
- नदी किनारे स्वच्छ वातावरण में साफ मन से पितरों का ध्यान करें। पंडितों और गरीबों को दान करें।
- सूर्य को अर्ध्य दें।
- भगवान शिव, माता पार्वती और तुलसी की पूजा करें।
- ग्रहण समाप्त होने के बाद स्नान करें और अन्न, वस्त्र, धनादि का दान करें।
- सूर्य ग्रहण के बाद मंदिर की सफाई करें और भगवान को नये कपड़े पहनाएं।
- सूर्य ग्रहण के बाद तुलसी और घर में गंगाजल छिड़कें।
- भगवान को मीठे का भोग लगाएं और घर के सभी लोगों को खिलाएं।













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