Surya Grahan 2026 Date: साल का दूसरा सूर्य ग्रहण कब? क्या भारत में आएगा नजर? ज्योतिषी ने दिया ये जवाब

Surya Grahan 2026 Date: साल 2026 का पहला सूर्य ग्रहण फरवरी में था लेकिन वो भारत में नहीं दिखाई दिया था और अब दूसरा सूर्य ग्रहण 12 अगस्त को लगेगा जो कि इस वर्ष का आखिरी सूर्य ग्रहण होगा लेकिन वो भी इंडिया में नजर नहीं आएगा इसलिए इसका सूतक काल नहीं लगेगा, इसका मतलब है कि ना तो 12 अगस्त को मंदिर के कपाट बंद होंगे और ना ही मांगलिक कार्यों पर रोक लगेगी।

आपको बता दें कि ये ग्रहण भारतीय समयानुसार, यह रात 9 बजकर 4 मिनट पर शुरू होगा और सुबह 4:25 AM पर समाप्त होगा। ये पूर्ण ग्रहण ग्रीनलैंड, आइसलैंड, स्पेन और पुर्तगाल के कुछ हिस्सों में देखा जाएगा। इसके अतिरिक्त, यूरोप, उत्तरी अमेरिका और पश्चिमी अफ्रीका में ये आंशिक ग्रहण के रूप में नजर आएगा।

Surya Grahan 2026 Date

काशी के पंडित दयानंद शास्त्री के मुताबिक सूर्य ग्रहण एक महत्वपूर्ण खगोलीय और धार्मिक घटना है भले ही ये इंडिया में दिखाई ना पड़े लेकिन इसका प्रभाव ज्योतिष और आध्यात्मिक दृष्टि से सभी राशियों पर पड़ता है इसलिए सूर्यग्रहण के दौरान कुछ बातों का विशेष ख्याल रखने की जरूरत होती है।'

सूर्य ग्रहण के दौरान तुलसी पूजा नहीं करनी चाहिए

'ग्रहणकाल में तुलसी पूजा नहीं करनी चाहिए और ना ही पूजा स्थल को हाथ लगाना चाहिए बल्कि इस दौरान मंत्र जाप, ध्यान और पूजा करना शुभ माना जाता है, ग्रहण के बाद दान-पुण्य का विशेष महत्व होता है।' दयानंद शास्त्री ने कहा कि 'ज्योतिष के अनुसार सूर्य ग्रहण को आमतौर पर अशुभ प्रभाव वाला माना जाता है, लेकिन यह पूरी तरह नकारात्मक नहीं होता।'

सूर्य ग्रहण हमेशा अशुभ नहीं होता है: दयानंद शास्त्री

'ग्रहण की वजह से मानसिक तनाव या भ्रम की स्थिति पैदा होती है। निर्णय लेने में कठिनाई होती है और इसका स्वास्थ्य पर भी गलत प्रभाव पड़ता है लेकिन ग्रहण शुभ संकेत भी देता है। ग्रहण काल आत्मचिंतन और आध्यात्मिक उन्नति का समय होता है।'

सूर्य ग्रहण को सावधानी और सकारात्मक सोच से देखें

'तो वहीं ये पुराने कामों को सुधारने का मौका भी होता है, इस दौरान किए गए ध्यान और साधना से सकारात्मक ऊर्जा मिलती है जो इंसान को मजूबत बनाती है, इसे डर के बजाय सावधानी और सकारात्मक सोच के साथ देखना चाहिए।'

सूर्य ग्रहण कब लगता है?

सूर्य ग्रहण तब लगता है जब चंद्रमा , पृथ्वी और सूर्य के बीच आ जाता है और सूर्य की रोशनी को आंशिक या पूर्ण रूप से ढक देता है। इस खगोलीय घटना को अंग्रेजी में Solar Eclipse कहा जाता है। यह घटना हमेशा अमावस्या के दिन ही होती है, लेकिन हर अमावस्या पर ग्रहण नहीं लगता क्योंकि चंद्रमा की कक्षा थोड़ी झुकी हुई होती है।

सूर्य ग्रहण 4 प्रकार का होता है

  • पूर्ण सूर्य ग्रहण : जब चंद्रमा पूरी तरह से सूर्य को ढक लेता है, तो इसे पूर्ण सूर्य ग्रहण कहते हैं।
  • आंशिक सूर्य ग्रहण : जब चंद्रमा सूर्य के केवल एक हिस्से को ढकता है, तो इसे आंशिक ग्रहण कहते हैं।
  • वलयाकार सूर्य ग्रहण : जब चंद्रमा सूर्य के बीच में आ जाता है लेकिन उसका आकार छोटा दिखता है, तो सूर्य के चारों ओर एक आग का छल्ला बनता है।
  • हाइब्रिड सूर्य ग्रहण : यह एक दुर्लभ प्रकार है, जिसमें ग्रहण कुछ स्थानों पर पूर्ण और कुछ जगहों पर वलयाकार दिखाई देता है।

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