Surya Grahan 2022: शनिचरी अमावस्या के दिन सूर्य ग्रहण, इन तीन राशियों पर होगी धनवर्षा लेकिन...
नई दिल्ली, 29 अप्रैल। साल का पहला सूर्य ग्रहण शनिवार को लगने जा रहा है। इस दिन शनिचरी अमावस्या भी है, जब अमावस्या शनिवार के दिन पड़ती है तो उसे शनिचरी अमावस्या कहते हैं। हालांकि ये ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा इसलिए सूतक काल मान्य नहीं है लेकिन ग्रहण का असर राशियों पर पड़ता है और अमावस्या का भी प्रभाव राशियों पर होता है।

इसलिए आइए जानते हैं कि ये ग्रहण सभी राशियों के लिए कैसा होगा?
ज्योतिष शास्त्र के मुताबिक यह ग्रहण मेष, कर्क और वृश्चिक राशियों को प्रभावित कर सकता है और उन्हें मानसिक रूप से प्रभावित करेगा। इसलिए इन राशि के लोगों को काफी संभलकर रहने की जरूरत है।
संभल कर रहें मेष, कर्क और वृश्चिक
मेष वाले ग्रहण वाले दिन यात्रा करने से भी बचें तो वहीं कर्क वाले अपनी वाणी पर संयम रखें और शांत रहने की कोशिश करें तो वहीं वृश्चिक राशि वाले जातकों के लिए भी यह सूर्य ग्रहण ठीक नहीं है, वो आपसी लोगों पर क्रोध करने से बचें और स्वास्थ्य का ख्याल रखें। हालांकि बाकी राशियों के लिए ये ग्रहण सामान्य रहेगा।
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मेष, वृषभ, मकर और धनु की बदलेगी किस्मत
जहां ग्रहण इन तीन राशियों को परेशान कर सकता है वहीं शनि देव मेष, वृषभ, मकर और धनु के लिए बहुत ज्यादा लकी साबित होने वाले हैं। दरअसल शनि की चाल बदली है।
तरक्की, धन प्राप्ति, प्रमोशन-इंक्रीमेंट
इसलिए वो इन तीन राशियों को तरक्की, धन प्राप्ति, प्रमोशन-इंक्रीमेंट और सम्मान प्रदान करने वाला है। बाकी राशियों पर भी शनि देव की कृपा बनी रहेगी। शनि न्याय के देवता है और हमेशा परेशान नहीं करते हैं इसलिए कुछ लोग उनको लेकर वहम में रहते हैं।
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शनिचरी अमावस्या की पूजा विधि
- सबसे पहले सुबह उठकर नहाधोकर शनिदेव का ध्यान कीजिए।
- संभव हो तो शनिदेव के मंदिर जाइए।
- अगर नहीं तो घर पर ही पूजा स्थल पर शनिदेव की पूजा करें।
- कुछ लोग इस दिन उपवास भी रखते हैं।
- शनिदेव को सरसों के तेल में काले तिल मिलाकर अभिषेक करें।
- शनि देव के लिए मंत्र पढ़ें।
- और क्षमा याचना के बाद आरती करें और पीपल के पेड़ में दीपक जलाएं।

दान-पुण्य करने का महत्व
आपको बता दें कि अमावस्या का योग शनिवार को सुबह से लेकर शाम 3 बजकर 20 मिनट तक रहेगा। इस दिन नदियों में स्नान करने के साथ-साथ दान-पुण्य करने का महत्व है। संभव है तो गरीबों और ब्राह्मण को इस दिन भोजन करवाएं और तिल और तेल का दान करें। कुछ लोग इस दिन पितरों को खुश करने के लिए तर्पण भी करते हैं।












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