Sun-Ketu conjunction: सिंह राशि में हुई सूर्य-केतु युति, बचकर रहें वरना झेलेंगे तगड़ा नुकसान

Sun-Ketu conjunction in Leo: सूर्य और केतु की युति को ज्योतिष की दृष्टि में एक गंभीर युति माना जाता है। सूर्य और केतु जब गोचर में एक ही राशि में आ जाते हैं तो यह ग्रहण दोष का निर्माण करता है और यही पितृ दोष भी कहलाता है। सूर्य 16 अगस्त को रात्रि में 1 बजकर 52 मिनट पर अपनी ही राशि सिंह में प्रवेश कर गए हैं।

एक और सूर्य सिंह राशि में हैं तो वहीं इस राशि में पूर्व से केतु बैठा हुआ है। सिंह राशि में सूर्य-केतु युति व्यक्ति के मनोभावों को सर्वाधिक प्रभावित करने वाली है। व्यक्ति का स्वभााव उग्र हो सकता है। उसके द्वारा लिए जाने वाले निर्णय पर संशय होता है।

Sun-Ketu conjunction

सूर्य-केतु युति के प्रभाव (Sun-Ketu conjunction in Leo)

  • सिंह राशि में हो रही सूर्य-केतु युति के कारण व्यक्ति के आत्मविश्वास में कमी आ सकती है। उसे अपने ही किए हुए कार्यों पर भरोसा नहीं रहेगा कि वह पूरा होगा भी या नहीं।
  • इस युति के प्रभाव के कारण लोगों के अपने पिता से संबंध खराब होंगे। उनसे विचारों में मतभेद, दूरी या स्वास्थ्य संबंधी परेशानी आ सकती है।
  • समाज में मान-सम्मान में कमी, किसी कारण से कलंक लगने जैसी स्थिति बन सकती है। इसलिए सतर्क रहना होगा।
  • निर्णय लेने में भ्रम पैदा होगा। किसी भी निर्णय पर नहीं पहुंच पाएंगे। निर्णय ले भी लेंगे तो उसे बार-बार बदलने का मन करेगा।
  • केतु को मोक्ष का कारक भी कहा गया है। इसलिए जब-जब यह सूर्य के साथ युति करता है तो व्यक्ति को अकेला कर देता है और उसे गहरे आध्यात्मिक मार्ग पर जाने के लिए प्रेरित करता है।
  • व्यक्ति के जीवन में अचानक ऐसी घटनाएं होने लगती हैं जिससे उसका सारा अहंकार चूर चूर हो जाता है।

पितृ दोष बनेगा (Sun-Ketu conjunction in Leo)

सूर्य केतु युति के कारण पितृ दोष का निर्माण होता है। यदि व्यक्ति नवम या पंचम भाव में यह युति होगी तो कठोर पितृ दोष का निर्माण होगा, जिसके परिणाम स्वरूप कार्यों में विफलता मिलने की आशंका रहती है। धार्मिक कार्यों में रुकावट आती है। अचानक रोगों पर धन खर्च होने लगता है। आर्थिक तंगी आने लगती है।

दोष का निवारण कैसे करें (Sun-Ketu conjunction in Leo)

  • सूर्य-केतु युति के दुष्प्रभावों से बचने के लिए इस युति के दिन या इस युति के दौरान आने वाले रविवार को पितरों का तर्पण या श्राद्ध करना चाहिए।
  • रविवार के दिन तांबे के कलश में जल भरकर गेहूं और गुड़ डालकर सूर्य को अर्घ्य देना चाहिए।
  • पांच रविवार को लाल कपड़े में बांधकर गेहूं और गुड़ का दान करना चाहिए।
  • लाल गाय को गेहूं और गुड़ खिलाने से सूर्य केतु युति का दुष्प्रभाव दूर होता है।
  • केतु की शांति के लिए नीला कपड़ा, नारियल और तिल का दान करना श्रेष्ठ रहता है।
  • सूर्य केतु युति ठीक एक माह तक रहेगी। 16 अगस्त से 16 सितंबर। इस दौरान आने वाले प्रत्येक रविवार के दिन हनुमान जी को सिंदूर का चोला चढ़ाएं या पंडित से चढ़वाएं।
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