Solar and Lunar Eclipse 2021: नए साल में आएंगे दो चंद्र ग्रहण और 2 सूर्य ग्रहण, जानिए इसके बारे में सबकुछ

नई दिल्ली। Solar and Lunar Eclipse 2021: नव वर्ष 2021में कौन-कौन से और कब ग्रहण होंगे यह जानने में अधिकांश लोगों की उत्सुकता है।लोगों में ग्रहण को लेकर भ्रम और भय भी रहता है। हालांकि ये खगोलीय घटना है, लेकिन ज्योतिष के हिसाब से इसका खासा असर इंसान के ऊपर पड़ता है। आपको बता दें कि साल 2021 में दो चंद्र ग्रहण (Chandra grahan 2021) और दो सूर्य ग्रहण (Surya grahan 2021) आने वाले हैं।

चलिए विस्तार से जानते हैं इसके बारे में

सबसे पहले बात करते हैं सूर्य ग्रहण की

सबसे पहले बात करते हैं सूर्य ग्रहण की

पहला सूर्य ग्रहण 10 जून 2021 को लगेगा, जो कि उत्तरी अमेरिका, यूरोप और एशिया में आंशिक, जबकि उत्तरी कनाडा, ग्रीनलैंड और रूस में पूर्ण रूप से दिखाई देगा, हमारे देश भारत में ये ग्रहण आंशिक होगा और इसका सूतक काल प्रभावी होगा। यह सूर्य ग्रहण भारतीय समय के अनुसार इस दिन दोपहर 01:42 बजे शुरू होगा। और इस सूर्य ग्रहण की समाप्ति शाम 06:41 बजे होगी, इसकी कुल अवधि लगभग 05 घंटा 39 मिनट की होगी।

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दूसर सूर्य ग्रहण का सूतक काल इंडिया में नहीं लगेगा

दूसर सूर्य ग्रहण का सूतक काल इंडिया में नहीं लगेगा

दूसरा सूर्यग्रहण 4 दिसंबर 2021 को लगेगा, जो कि अंटार्कटिका, दक्षिण अफ्रीका, अटलांटिक, ऑस्ट्रेलिया और दक्षिण अमेरिका में दिखाई देगा लेकिन भारत में इसका सूतक काल भी प्रभावी नहीं होगा। यह ग्रहण दोपहर 1.42 से बजकर शाम के 6.51 तक रहेगा।

अब बात करते हैं चंद्र ग्रहण की

अब बात करते हैं चंद्र ग्रहण की

पहला चंद्र ग्रहण 26 मई 2021 को लगेगा जो कि दोपहर करीब 02 बजकर 17 मिनट से शाम 07 बजकर 19 मिनट तक रहेगा। ये एक पूर्ण चंद्र ग्रहण होगा जो पूर्वी एशिया, ऑस्ट्रेलिया, प्रशांत महासागर और अमेरिका में दिखाई देगा लेकिन इंडिया में यह उपच्छाया ग्रहण के तौर पर देखा जाएगा।

दूसरा चंद्र ग्रहण आंशिक होगा

दूसरा चंद्र ग्रहण आंशिक होगा

दूसरा चंद्र ग्रहण 19 नवंबर 2021 लगेगा, जो कि दोपहर 11.30 बजे से शाम 05 बजकर 33 मिनट तक रहेगा, ये एक आंशिक चंद्र ग्रहण होगा, जो कि भारत, अमेरिका, उत्तरी यूरोप, पूर्वी एशिया, ऑस्ट्रेलिया और प्रशांत महासागर क्षेत्र दिखाई देगा।

'चंद्र ग्रहण' किसे कहते हैं

'चंद्र ग्रहण' किसे कहते हैं

जब चंद्रमा और सूर्य के बीच में पृथ्वी आती है तो उसे 'चंद्र ग्रहण' कहते हैं, इस दौरान पृथ्वी की छाया से चंद्रमा पूरी तरह या आंशिक रूप से ढक जाता है और एक सीधी रेखा बन जाती है, इस स्थिति में पृथ्वी सूर्य की रोशनी को चंद्रमा तक नहीं पहुंचने देती है लेकिन 'उपछाया चंद्र ग्रहण' या 'पेनुमब्रल' के दौरान चंद्रमा का बिंब धुंधला हो जाता है और वो पूरी तरह से काला नहीं होता है इस वजह से चांद थोड़ा 'मलिन रूप' में दिखाई देता है। आपको बता दें कि चंद्र ग्रहण हमेशा 'पूर्णिमा' को लगता है

क्या होता है 'सूर्य ग्रहण '

क्या होता है 'सूर्य ग्रहण '

भौतिक विज्ञान की दृष्टि से जब सूर्य और पृथ्वी के बीच में चंद्रमा आ जाता है तो चंद्रमा के पीछे सूर्य का बिम्ब कुछ समय के लिए ढक जाता है, इसी घटना को सूर्य ग्रहण कहा जाता है। पृथ्वी सूरज की परिक्रमा करती है और चांद पृथ्वी की। कभी-कभी चांद, सूरज और धरती के बीच आ जाता है। फिर वह सूरज की कुछ या सारी रोशनी रोक लेता है जिससे धरती पर अंधेरा फैल जाता है। इस घटना को 'सूर्य ग्रहण' कहा जाता है।

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