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Shani Vakri : साढ़ेसाती वाले करें विशेष उपाय, कम होंगी परेशानियां मिलेगी सफलता

Shani Vakri 2025 : शनि 13 जुलाई से 28 नवंबर तक वक्री रहेगा। शनि के वक्री रहने के दौरान सबसे ज्यादा साढ़ेसाती वाले जातक प्रभावित होंगे। शनि वर्तमान में मीन राशि पर चल रहा है। इस कारण कुंभ, मीन और मेष राशि पर साढ़ेसाती चल रही है। सिंह और धनु राशि पर लघु ढैया चल रहा है।

शनि के वक्री रहने के दौरान साढ़ेसाती वाले जातकों के जीवन में बड़ी उठापटक हो सकती है। अचानक परेशानियां बढ़ सकती हैं। इसलिए इस दौरान शनि को प्रसन्न रखने के उपाय करें।

Shani Vakri

ये उपाय अवश्य करें (Shani Vakri 2025)

  • शनि की साढ़ेसाती और ढैया वाले जातक शनि के वक्री होने के दौरान प्रत्येक शनिवार को शनि मंदिर में आटे के सात दीपक तिल के तेल के लगाएं। यह प्रत्येक शनिवार को सायंकाल में करें। वहीं बैठकर शं शनैश्चराय नम: मंत्र की एक माला काले हकीक की माला से जपें। आसन भी काले कंबल या काले कपड़े का बिछाएं।
  • शनिदेव की मूर्ति, चित्र, यंत्र यदि घर या दुकान में हों तो उन्हें तुरंत हटा दें। इन्हें किसी शनि मंदिर में रख आएं। शनि के वक्री रहनेे के दौरान शनि से जुड़ी कोई भी वस्तु घर या दुकान में नहीं होनी चाहिए। इससे विपरित प्रभाव पड़ते हैं।

काली उड़द की दाल भिगो दें (Shani Vakri 2025)

  • शुक्रवार के दिन 100-100 ग्राम की मात्रा में काले देसी चने, काली उड़द की दाल भिगो दें। शनिवार के दिन उसे एक काले कपड़े में रखकर नदी या तालाब में जहां मछलियां हों वहां डाल आएं। ऐसा प्रत्येक शनिवार को करें। शनि की पीड़ा कम होगी।
  • नित्य सूर्योदय से पूर्व उठकर स्नानादि करके शनिदेव के आगे तेल का दीया लगाकर बैठें। 100 ग्राम गुड़ और 25 ग्राम काली तिल मिलाकर शनिदेव काे भोग लगाएं। बीज मंत्र ऊं शं शनैश्चराय नम: का तीन माला पाठ करें। पाठ पूरा होने के बाद प्रसाद को किसी पेड़ के नीचे जीव-जंतुओं के लिए अपनी मनोकामना बोलकर डाल आएं। यह प्रयोग लगातार 40 दिन करें

पीपल की सात परिक्रमा करते हुए कच्चा सूत बांधें (Shani Vakri 2025)

  • प्रत्येक शनिवार को पीपल के पेड़ के नीचे 50 ग्राम काली तिल, 50 ग्राम उड़द, 50 ग्राम गुड़ और 50 ग्राम तेल पीपल की परिक्रमा करते हुए चढ़ाएं। इस सामग्री को जल में मिलाकर भी चढ़ाया जा सकता है। पीपल की सात परिक्रमा करते हुए कच्चा सूत भी बांधें। यह करने से शनि की पीड़ा कम होगी और उसके वक्री काल में मिलने वाले अशुभ परिणामों से बचे रहेंगे।
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