Arvind Kejriwal बोले- देश को दूसरे पीएम की जरूरत है, ट्रंप के सामने भारतीयों की मौत को लेकर चुप्‍पी पर घेरा

Arvind Kejriwal on Modi foreign Policy: आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक और दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की विदेश नीति पर शनिवार को जमकर हमला बोला है। केजरीवाल ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत का पक्ष मजबूती से रखने में पूरी तरह विफल रहे हैं।

केजरीवाल का ये बयान फ्रांस में आयोजित जी-7 शिखर सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की मुलाकात के बाद आया है।

Arvind Kejriwal

अमेरिकी हमले में मारे गए भारतीयों का मुद्दा उठाया

20 जून को जारी एक वीडियो संदेश में अरविंद केजरीवाल ने हाल ही में अमेरिकी सैन्य कार्रवाई में मारे गए तीन भारतीय नागरिकों की मौत का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि यह घटना बेहद दुखद और चिंताजनक है, जिसने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है। इसके बावजूद केंद्र सरकार इस मामले को अमेरिकी प्रशासन के समक्ष मजबूती से रखने में असफल रही है।

ट्रंप के सामने प्रधानमंत्री की चुप्पी पर उठाए सवाल

केजरीवाल ने सवाल उठाया कि जिस अमेरिकी राष्ट्रपति के आदेश पर हुई कार्रवाई में तीन भारतीय नागरिकों की जान गई, उसी राष्ट्रपति के साथ प्रधानमंत्री मोदी ने गर्मजोशी से मुलाकात की और उनकी प्रशंसा की। उन्होंने दावा किया कि दोनों नेताओं की बैठक के आधिकारिक विवरण में इस गंभीर घटना का कोई उल्लेख नहीं किया गया।

ट्रंप के बयान का भी किया जिक्र

आप प्रमुख ने उस घटना का भी जिक्र किया जिसमें एक विदेशी पत्रकार ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से भारतीय नागरिकों की मौत पर प्रतिक्रिया मांगी थी। केजरीवाल के अनुसार, ट्रंप ने इस मामले में किसी प्रकार का खेद व्यक्त नहीं किया। उन्होंने कहा कि ऐसे समय में भारत की ओर से कड़ी प्रतिक्रिया की अपेक्षा थी, लेकिन प्रधानमंत्री की चुप्पी ने देश के आत्मसम्मान को आघात पहुंचाया है।

देश की संप्रभुता और नागरिकों की सुरक्षा का मुद्दा

केजरीवाल ने कहा कि जब अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारतीय नागरिकों के जीवन की अनदेखी होती है और सरकार प्रभावी विरोध दर्ज नहीं कराती, तो इससे दुनिया को गलत संदेश जाता है। उन्होंने कहा कि इससे यह धारणा बनती है कि भारत अपने नागरिकों के हितों की रक्षा करने में भी हिचकिचाता है, जो कूटनीतिक दृष्टि से चिंताजनक स्थिति है।

कूटनीतिक विरोध का सुझाया तरीका

अपनी आलोचना के दौरान केजरीवाल ने कहा कि वह किसी तरह की अभद्रता या आक्रामक व्यवहार की वकालत नहीं कर रहे हैं। उनका मानना है कि एक संप्रभु राष्ट्र के रूप में भारत को अपनी बात शालीनता के साथ लेकिन पूरी दृढ़ता से रखनी चाहिए। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय गौरव से किसी भी परिस्थिति में समझौता नहीं होना चाहिए।

मोदी को सुझाया संभावित बयान

केजरीवाल ने कहा कि प्रधानमंत्री को अमेरिकी राष्ट्रपति के सामने स्पष्ट शब्दों में कहना चाहिए था कि भारत इस कार्रवाई पर अपनी कड़ी नाराजगी दर्ज कराता है, जिसमें तीन निर्दोष भारतीय नागरिक मारे गए। साथ ही अमेरिका से इस घटना पर आधिकारिक माफी की मांग भी की जानी चाहिए थी। उनके अनुसार, इससे यह संदेश जाता कि भारत अपने नागरिकों के सम्मान और सुरक्षा के प्रति गंभीर है।

संवेदना संदेश नहीं देने पर भी जताई नाराजगी

अरविंद केजरीवाल ने यह भी आरोप लगाया कि भारत सरकार और प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर से अब तक मृतकों के परिवारों के प्रति कोई सार्वजनिक संवेदना संदेश जारी नहीं किया गया है। उन्होंने इसे संवेदनहीनता बताते हुए कहा कि किसी भी लोकतांत्रिक सरकार को अपने नागरिकों की मृत्यु पर संवेदनशीलता दिखानी चाहिए।

विदेश नीति के केंद्र में होनी चाहिए नागरिकों की सुरक्षा

केजरीवाल ने कहा कि भारत आज वैश्विक स्तर पर अपनी मजबूत कूटनीतिक पहचान बनाने का दावा कर रहा है। ऐसे समय में विदेश नीति का सबसे महत्वपूर्ण उद्देश्य देश के नागरिकों की सुरक्षा और सम्मान सुनिश्चित करना होना चाहिए। यदि नागरिकों के हितों की रक्षा नहीं की जाती, तो अंतरराष्ट्रीय मंचों पर प्राप्त उपलब्धियों का महत्व कम हो जाता है।

देश को मजबूत और मुखर नेतृत्व की जरूरत

अपने संबोधन के अंत में केजरीवाल ने कहा कि देश को ऐसे नेतृत्व की आवश्यकता है जो वैश्विक मंचों पर महाशक्तियों के सामने भी भारतीय नागरिकों के अधिकारों, सम्मान और सुरक्षा की मजबूती से रक्षा कर सके। उन्होंने कहा कि जब तक यह दृढ़ता नहीं दिखाई जाएगी, तब तक विदेश नीति की उपलब्धियां अधूरी मानी जाएंगी।

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