Saturn Retrograde 2021: शनि 23 मई से हो रहे हैं वक्री, साढ़ेसाती वाले रखें विशेष ध्यान
नई दिल्ली, 20 मई। शनिदेव वैशाख शुक्ल एकादशी 23 मई 2021 रविवार को दोपहर 2.53 बजे मकर राशि में वक्री हो रहे हैं। शनि आश्विन शुक्ल षष्ठी 11 अक्टूबर 2021 सोमवार को प्रात: 7.44 बजे पुन: मकर राशि में ही मार्गी होंगे। इस प्रकार शनि 141 दिन वक्री अवस्था में रहेंगे। शनि स्वयं की राशि में मकर में चल रहे हैं और अपनी ही राशि में वक्री होने से साढ़ेसाती और लघु कल्याणी ढैया वालों पर विपरीत प्रभाव पड़ सकता है।

साढ़ेसाती वालों पर प्रभाव
शनि की साढ़ेसाती का अंतिम ढैया धनु राशि पर चल रहा है। मकर राशि पर दूसरा ढैया और कुंभ पर प्रथम ढैया चल रहा है। धनु राशि के लिए द्वितीय स्थान में शनि वक्री हो रहा है। मकर राशि पर लग्न में और कुंभ राशि पर द्वादश में शनि वक्री हो रहा है।
धनु : इस राशि के द्वितीय स्थान में शनि का वक्री होना कई बड़े बदलाव का संकेत है। धनु राशि के लिए द्वितीय स्थान में बैठे शनि की तीसरी, सातवीं और दसवीं पूर्ण दृष्टि क्रमश: चतुर्थ, अष्टम और एकादश पर पड़ रही है। इन भावों से संबंधित फल में न्यूनता आएगी। द्वितीयेश धन स्थान होने से आर्थिक संकट के साथ आय में कमी महसूस होगी। आर्थिक कार्य सारे अटकते दिखाई देंगे। चूंकिएकादश स्थान को भी शनि पूर्ण दृष्टि से देख रहा है इसलिए आय के साधन कम होंगे। कर्ज लेने की नौबत आ सकती है। चतुर्थ स्थान पर दृष्टि होने से सुखों में कमी आने की संभावना है। भौतिक सुखों से वंचित होना पड़ सकता है। अष्टम पर दृष्टि होने से आर्थिक संकट, आकस्मिक घटना-दुर्घटना की आशंका बन सकती है, अत: सतर्क रहें। अग्निभय, वाहन-मशीनरी से चोट लगने की आशंका रहेगी।
क्या उपाय करें : धनु राशि के जातकों को शनि की शांति के निमित्त शनि से जुड़ी चीजों का दान करना चाहिए। सरसो का तेल सवा लीटर, काले तिल, काला कम्बल या काला वस्त्र, जूते किसी जरूरतमंद को दान दें। शनि 141 दिन वक्री रहेगा इस पूरे समय में प्रतिदिन शनि चालीसा का पाठ आवश्यक रूप से करना होगा। इस दौरान कोई अनैतिक कार्य न करें। मांसाहार, शराब, नशे का सेवन पूरी तरह प्रतिबंधित रखना होगा। शनिवार के व्रत रखें।
मकर : इस राशि में ही शनि वक्री होने जा रही है। लग्न में शनि का वक्री होना शारीरिक और मानसिक रूप से कष्टप्रद रहेगा। तृतीय, सप्तम और दशम पर पूर्ण दृष्टि होने से पारिवारिक विवाद, भाई-बहनों से मतभेद उभरेंगे। पैतृक संपत्ति को लेकर विवाद संभव है। कोट-कचहरी के मामले भी परेशान कर सकते हैं। सप्तम भाव को शनि पूर्ण दृष्टि से देखेगा इसलिए दांपत्य जीवन में परेशानी पैदा होगी। कार्य क्षेत्र के लिए शनि विशेष परेशानी पैदा कर सकता है। नौकरीपेशा लोगों को भटकाव रहेगा और काम पर फोकस नहीं हो पाएगा, इस कारण कार्यस्थल पर तनाव पैदा होगा। कारोबारियों को कार्य में नुकसान की आशंका है। कार्य लगभग ठप पड़ा रहेगा। हालांकिधीरे-धीरे रास्ते खुलने भी लगेंगे। शनि के वक्रत्व काल के अंतिम चरण में नए कार्य मिलने लगेंगे जिससे राहत मिलेगी।

क्या उपाय करें : मकर राशि के जातक लोहे की अंगूठी धारण करें। यदि नाव की कील या काले घोड़े की नाल से बनी अंगूठी पहनेंगे तो और भी अधिक लाभदायक रहेगा। 141 दिनों में आने वाले प्रत्येक शनिवार को हनुमानजी को चमेली के तेल और सिंदूर का चोला चढ़ाएं संकटों से राहत मिलेगी। शनि स्तवराज का नियमित रूप से पाठ करें।
कुंभ : कुंभ राशि के लिए शनि वक्री द्वादश स्थान में होगा। यह सबसे खराब स्थिति में रहेगा। इस दौरान राशि वालों को खर्च की अधिकता, रोगों पर खर्च करना पड़ेगा। द्वितीय, षष्ठम और नवम स्थान पर शनि की पूर्ण दृष्टि होने के कारण अच्छे-बुरे दोनों तरह के परिणाम प्राप्त होंगे। शनि को भाग्य का देवता भी कहा गया है, इसलिए यहां शनि भाग्य भाव को पूर्ण दशम दृष्टि से देख रहा है। यह कुछ मामलों में भाग्य को बल देने वाला भी साबित हो सकता है। यदि पुरानी योजनाएं जिनमें आपकी मेहनत की कमाई का पैसा लगा है तो यहां आपको लाभ होता दिख रहा है। छठे स्थान पर दृष्टि होने के कारण रोगों की आशंका है और रोगों पर खर्च की संभावना भी बन रही है। इसलिए अपने कर्म ठीक रखें तो कई परेशानियों से बचे रहेंगे। यदि कोई अपराध किया है तो उसे स्वीकार कर लें।
क्या उपाय करें : कुंभ राशि के जातक शनिदेव की प्रसन्नता के लिए गरीबों, जरूरतमंदों को प्रत्येक शनिवार को भोजन करवाएं। दिव्यांग, अपंगों, दृष्टिहीनों, वृद्धों की सेवा करें। शनिवार को शनि चालीसा का पाठ करें तिल के व्यंजनों का नैवेद्य शनिदेव को लगाएं।












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