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सोना, चांदी का भी होता है आपके जीवन पर असर, जानिए कैसे?

मनुष्य और प्रकृति के सही-सही संचालन में धातुओं का बड़ा महत्व है। जिस तरह पृथ्वी के गर्भ में अनेक प्रकार की धातुएं होती हैं, उसी तरह मनुष्य के शरीर में भी अनेक धातुओं का समावेश होता है।

नई दिल्ली। मनुष्य और प्रकृति के सही-सही संचालन में धातुओं का बड़ा महत्व है। जिस तरह पृथ्वी के गर्भ में अनेक प्रकार की धातुएं होती हैं, उसी तरह मनुष्य के शरीर में भी अनेक धातुओं का समावेश होता है। लोहा, तांबा व अन्य कई धातुएं मनुष्य के शरीर को संतुलित रखती हैं। इनकी कम या ज्यादा मात्रा शरीर में कई तरह की गड़बडि़यां पैदा करती हैं। मनुष्य के शरीर में मौजूद सातों चक्रों की भी एक-एक प्रतिनिधि धातु होती है। रत्नों को पहनने के लिए भी उसकी निर्धारित धातु है। आइये आज जानते हैं किस धातु का हमारे शरीर पर क्या प्रभाव पड़ता है। ये धातुएं न केवल मनुष्य को स्वस्थ रहने में मदद करती है, बल्कि उसके ग्रहों को भी अनुकूल करती हैं।

सोना, चांदी का भी होता है आपके जीवन पर असर, जानिए कैसे?
  • सोना: सोने को ऊर्जा कारक और तीक्ष्ण धातु माना जाता है। इसे पहनने से मनुष्य के शरीर में स्फूर्ति और ताजगी बनी रहती है। उसके चेहरे की चमक बढ़ती है। स्वर्ण पर बृहस्पति का आधिपत्य माना गया है। इसलिए यदि किसी व्यक्ति की कुंडली में बृहस्पति खराब स्थिति में हो या वक्री हो उसे सोने का कोई न कोई आभूषण अवश्य धारण करना चाहिए। बृहस्पति की महादशा या अंतर्दशा में भी सोना पहनना लाभकारी होता है। इससे व्यक्ति के पराक्रम और बल में वृद्धि होती है। व्यक्ति निरोगी और दीर्घायु बनता है। बृहस्पति के रत्न पुखराज को भी सोने में ही पहनना शुभ होता है।
  • चांदी: चांदी पर चंद्रदेव का प्रभाव रहता है। जिन लोगों की मानसिक स्थिति ठीक नहीं रहती। मन विचलित रहता है। अनिर्णय की स्थिति रहती है। दिल और दिमाग में तालमेल नहीं बन पाता है तो उन्हें चांदी की चेन, अंगूठी या छल्ला धारण करना चाहिए। इससे मानसिक स्थिरता प्राप्त होती है। दिमागी संतुलन ठीक रहता है। शरीर में हार्मोन का संतुलन बना रहता है। कुंडली में चंद्र अन्य बुरे ग्रहों के साथ हो या चंद्र की महादशा, अंतर्दशा चल रही हो तो व्यक्ति को चांदी धारण करना चाहिए। कालसर्प दोष वाले व्यक्तियों को भी शरीर से टच होता हुआ चांदी का कोई आभूषण पहनना चाहिए।
  • तांबा: इस धातु पर मंगल का प्रभाव होता है। तांबा शरीर का रक्त संतुलन ठीक रखता है। यह महिलाओं के लिए अधिक गुणकारी होता है। तांबे का छल्ला पहनने से महिलाओं को मासिक धर्म में अनियमितता की समस्या नहीं हटती। इससे रक्त शु़िद्ध होती है इसलिए यह कील-मुहांसों और त्वचा की अन्य परेशानियों में तुरंत आराम देता है। जो लोग हड्डी और जोड़ों के दर्द की समस्या से पीडि़त हैं उन्हें भी तांबे की अंगूठी धारण करना चाहिए। मंगल के प्रतिनिधि रत्न मूंगा के गणेश जी को तांबे की चेन में धारण करने से सुख-समृद्धि में वृद्धि होती है। कर्ज मुक्ति होती है।
  • लोहा: यह शनि की धातु है। यदि व्यक्ति बार-बार दुर्घटना का शिकार हो रहा हो। अचानक धन खर्च अधिक हो रहा हो। बीमारियां आ रही हों। व्यापार-व्यवसाय में हानि हो रही हो तो व्यक्ति को तांबे का छल्ला, अंगूठी या कड़ा धारण करना चाहिए। शनि की पीड़ाएं लोहे से दूर होती हैं। यदि कोई व्यक्ति पेट, रक्त, हड्डी या मांसपेशियों के रोगों से परेशान है तो उसे लोहे की कोई वस्तु शरीर से टच होती हुई अवश्य पहनना चाहिए।
  • कांसा: कांसे के आभूषण आमतौर पर नहीं पहने जाते हैं, लेकिन यह शरीर के अनेक रोगों को मिटाने में लाभकारी परिणाम देता है। कांसे का प्रभाव व्यक्ति के तंत्रिका तंत्र पर पड़ता है। इससे व्यक्ति की मांसपेशियां और नसों की सेहत ठीक रहती है। कमजोर नसों को कांसा मजबूती देता है। इसके गिलास में रखा पानी सप्ताह में कम से कम दो दिन अवश्य पीना चाहिए। लगातार इसके पानी का सेवन बिलकुल न करें। कांसे में रात भर रखा पानी भी हानिकारक हो जाता है, इसे पांच मिनट पानी रखें और पी लें।
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