Surya Grahan 2025: पितृ विसर्जन पर सूर्य ग्रहण का साया, बचकर रहें ये राशिवाले, हो सकता है बड़ा नुकसान
Surya Grahan 2025 and Pitru Visarjan: साल का आखिरी सूर्य ग्रहण आज लगने जा रहा है, हालांकि ये ग्रहण भारत में प्रभावी नहीं है और इसी कारण इसका सूतक नहीं लगेगा लेकिन सूर्य ग्रहण पितृ विसर्जन यानी कि अमावस्या के दिन लग रहा है इसलिए इसका असर राशियों पर पड़ेगा। वैसे भी ज्योतिष धर्म में सूर्य ग्रहण को अशुभ माना जाता है।
आपको बता दें कि सूर्या का कन्या राशि में 17 सितंबर में गोचर हुआ था, जिसकी वजह से ये ग्रहण कन्या राशि के लोगों को सबसे ज्यादा प्रभावित कर सकता है, इनकी लवलाइफ गड़बड़ा सकती है और इनको आर्थिक कष्ट भी हो सकता है इसलिए कन्या राशिवालों को जरा संभलकर रहने की जरूरत है इन्हें सलाह दी जाती है कि ये आज पैसों के लेन-देन से बचें।

आज का सूर्य ग्रहण आंशिक हैं , ये रात 10.59 PM से शुरू होकर 22 सिंतबर 3:23 AM तक रहेगा। इस समय भारत में सूर्य क्षितिज से नीचे होगा, इसलिए यहां के लोग इस खगोलीय घटना को नहीं देख पाएंगे। यह नजारा दक्षिणी गोलार्ध, खासकर पूर्वी ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड, अंटार्कटिका और प्रशांत द्वीपों में ही दिखाई देगा।
कहां-कहां दिखाई देगा Surya Grahan 2025
ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड में लोगों को ग्रहण का सबसे शानदार दृश्य देखने को मिलेगा। अंटार्कटिका के कुछ क्षेत्रों में चंद्रमा सूर्य के अधिकांश हिस्से को ढक लेगा। प्रशांत महासागर के विस्तृत हिस्सों में, द्वीप समुदाय भी आसमान के आंशिक अंधेरे का अनुभव करेंगे। भारत, यूरोप, अफ्रीका और अमेरिका सहित अन्य देशों को यह ग्रहण बिल्कुल भी दिखाई नहीं देगा।
पितृ विसर्जन पर Surya Grahan 2025
पितरों की आत्मा को तृप्त करने के लिए अमावस्या तिथि सर्वोत्तम मानी जाती है। जब उसी दिन सूर्य ग्रहण हो, तो पितृ तर्पण और दान का पुण्य कई गुना बढ़ जाता है। ग्रहण के प्रभाव से वातावरण में ऊर्जा परिवर्तन होता है, इसलिए शुद्धता और नियमों का पालन अनिवार्य माना गया है, इसलिए ग्रहण शुरू होने से पहले गंगाजल या शुद्ध जल से स्नान करें और पितरों के लिए संकल्प लें।
पितृ तर्पण मंत्र का जाप करना शुभ
ग्रहण काल में सूर्य मंत्र, महामृत्युंजय मंत्र और पितृ तर्पण मंत्र का जाप करना शुभ माना गया है। इस दिन ब्राह्मणों को भोजन कराएं और दान करें। ग्रहण समाप्ति के बाद पुनः स्नान करके घर को शुद्ध करें और गंगाजल का छिड़काव करें और सात्त्विक भोजन ही करें। इस दिन श्रद्धा और नियमों का पालन करके पितरों को प्रसन्न करने से व्यक्ति को दीर्घायु, समृद्धि और परिवार में शांति का आशीर्वाद प्राप्त होता है।
Disclaimer: इस आलेख का मतलब किसी भी तरह का अंधविश्वास पैदा करना नहीं है। यह सूचना इंटरनेट पर उपलब्ध मान्यताओं और सूचनाओं पर आधारित है। वनइंडिया लेख से संबंधित किसी भी इनपुट या जानकारी की पुष्टि नहीं करता है इसलिए किसी भी जानकारी को अमल में लाने से पहले कृपया किसी जानकार ज्योतिष या पंडित की राय जरूर लें।
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