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Jupiter's transit in Libra in 2018: 9 मार्च से 123 दिन के लिए वक्री हो रहे हैं गुरु, होगा हम पर असर

नई दिल्ली। सुख, सौभाग्य, पद, प्रतिष्ठा, सम्मान और वैवाहिक सुख का प्रतिनिधि ग्रह गुरु 9 मार्च को प्रातः 10.09 बजे से 10 जुलाई को रात्रि 10.46 बजे तक तुला राशि में वक्री हो रहा है। इन 123 दिनों के बीच यह सभी राशियों को प्रभावित करेगा।वक्री ग्रहों के संबंध में ज्योतिष प्रकाशतत्व नामक ग्रंथ में कहा गया है कि क्रूरा वक्रा महाक्रूराः सौम्या वक्रा महाशुभा।। अर्थात क्रूर ग्रह वक्री होने पर अतिक्रूर फल देते हैं और सौम्य ग्रह वक्री होने पर अतिशुभ फल देते हैं। जातक तत्व और सारावली ग्रंथों के अनुसार यदि शुभ ग्रह वक्री हो तो मनुष्य को धन, वैभव, सुख, सौभाग्य की प्राप्ति होती है, लेकिन क्रूर ग्रह वक्री होने पर धन, यश, सम्मान, प्रतिष्ठा की हानि करते हैं। चूंकि बृहस्पति सौम्य ग्रह है इसलिए इसके वक्री होने से समस्त राशि वाले जातकों को कहीं न कहीं इसके शुभ फलों की प्राप्ति होगी।

 गुरु का गोचर शुभ

गुरु का गोचर शुभ

  • मेष: मेष राशि वालों के लिए वर्तमान में गुरु सप्तम भाव में तुला राशि में स्थित है। इनके लिए गुरु का गोचर शुभ रहेगा। वैवाहिक कार्यों में आ रही रूकावटें दूर होंगी। दांपत्य जीवन में यदि दिक्कत चल रही है तो वह दूर होगी। विदेश यात्रा के योग बन रहे हैं। धन संबंधी परेशानियां दूर होंगी। नौकरी, बिजनेस में लाभ होगा। मेष राशि के विद्यार्थी वक्री गुरु के प्रभाव से कोई बड़ी उपलब्धि हासिल कर सकते हैं।
  • वृषभ: छठा भाव रोग, बीमारियों का स्थान है। वृषभ राशि के लिए गुरु छठे भाव में वक्री होंगे। अतः इन लोगों को मिलाजुला फल मिलने वाला है। शिक्षा के क्षेत्र से जुड़े वृषभ राशि के जातक लाभ की स्थिति में रहेंगे। इस राशि के जो लोग बीमार चल रहे हैं, उनके रोग मुक्त होने की संभावना बनेगी, लेकिन इनके ठीक होते-होते भी बीमारियों पर भारी खर्च हो सकता है।
  • मिथुन: इस राशि वालों के लिए गुरु पंचम भाव में वक्री होगा। पंचम स्थान संतान पक्ष का भाव होता है। इसलिए इस राशि के जातकों को संतान की ओर से कोई शुभ समाचार प्राप्त हो सकता है। संतान की वजह से आपको सम्मान प्राप्त होगा। साथ ही धन संबंधी रूकावटें भी दरार होंगी। इस राशि के जातक कोई नया कार्य प्रारंभ करना चाहें तो कर सकते हैं। पार्टनरशिप में कोई बड़ प्रोजेक्ट हाथ लगेगा।
  • तीसरे स्थान में गुरु वक्री होगा

    तीसरे स्थान में गुरु वक्री होगा

    • कर्क: कर्क राशि वालों के लिए गुरु चतुर्थ भाव यानी सुख स्थान में वक्री होगा। यह गुरु की उच्च राशि भी है। इसलिए इसके प्रभाव से इनके सुखों में वृद्धि होने के संकेत हैं, लेकिन ध्यान रहे जरा भी घमंड की भावना आई या किसी के साथ बुरा किया तो बृहस्पति दंड भी देंगे। आपकी प्रतिष्ठा मिटते देर नहीं लगेगी, इसलिए चाहे कितना भी धन आपके पास आ जाए कभी उसका घमंड ना करें। वाणी और क्रोध पर संयम रखना होगा।
    • सिंह: इस राशि के लिए तीसरे स्थान में गुरु वक्री होगा। भाई-बहनों को साथ लेकर चलना होगा। किसी बात पर मनमुटाव हो तो आप ठंडे दिमाग से काम लेते हुए मामले को सुलझा लें। धन का आगमन अच्छा होने वाला है। पैतृक संपत्ति प्राप्त होगी। नया भवन, भूमि, वाहन खरीदने के योग बन रहे हैं। वैवाहिक जीवन में मधुरता आएगी। जीवनसाथी के साथ चल रहा मनमुटाव भी दूर होगा।
    • कन्या: कन्या राशि के लिए गुरु द्वितीय स्थान यानी धन स्थान में वक्री हो रहा है। इसके प्रभाव से दो तरह की स्थितियां बन सकती हैं। या तो अचानक कहीं से खूब सारा धन प्राप्त होगा या अचानक कोई बड़ी धन राशि गंवाना पड़ सकती है। निवेश के संबंध में सावधान रहें। नया कार्य, व्यवसाय प्राप्त होगा। नौकरीपेशा व्यक्तियों का प्रमोशन, वेतनवृद्धि मिलने के योग हैं। सरकारी नौकरी मिलेगी।
    • प्रथम भाव का गुरु अत्यंत शुभ होता है

      प्रथम भाव का गुरु अत्यंत शुभ होता है

      • तुला: इस राशि के लिए प्रथम भाव यानी लग्न में ही गुरु वक्री हो रहे हैं। प्रथम भाव का गुरु अत्यंत शुभ होता है। इसलिए तुला राशि के जातकों को बृहस्पति के शुभ प्रभाव प्राप्त होंगे। रूके हुए सभी काम तेजी से होने लगेंगे। धन का आगमन अच्छा होगा। लंबे समय से रूका हुआ पैसा लौट आएगा। कर्ज मुक्ति होगी। चल-अचल संपत्ति खरीदेंगे। परिवार के साथ सुखी जीवन व्यतीत करेंगे। अविवाहितों के विवाह के योग बनेंगे।
      • वृश्चिक: इस राशि के लिए द्वादश स्थान में गुरु वक्री होंगे। यह स्थान व्यय स्थान है। अतः अचानक खर्च बढ़ने से इस राशि वाले मानसिक तनाव में आ जाएंगे, लेकिन घबराएं नहीं जल्द ही सारी चीजें व्यवस्थित हो जाएंगी। पारिवारिक जीवन में सुख, शांति बनी रहेगी। विदेश यात्रा के योग बनेंगे। आर्थिक स्थिति में सुधार आने लगेगा। संबंधों को सहेजना सीखें।
      • धनु: इस राशि का स्वामी ही बृहस्पति है और ग्यारहवें भाव में वक्री होगा। अतः धन संबंधी मामलों में आ रही परेशानियां दूर होंगी। पैसों के कारण यदि कोई काम अटका हुआ है तो वह अब हो जाएगा। व्यापारी वर्ग कोई नया बिजनेस प्रारंभ कर सकेंगे, वर्तमान कार्य का विस्तार भी कर लेंगे। नौकरीपेशा लोगों का प्रमोशन के साथ स्थानांतरण का योग है। अविवाहितों को विवाह सुख मिलेगा।
      • दसवें भाव में बृहस्पति वक्री होगा

        दसवें भाव में बृहस्पति वक्री होगा

        • मकर: मकर राशि में गुरु नीच का होता है और इस राशि के दसवें भाव में बृहस्पति वक्री होगा। अतः नौकरीपेशा लोग सतर्क रहें, कोई साथी ही आपकी प्रतिष्ठा धूमिल करने का प्रयास करेगा। उच्च अधिकारियों से अच्छा तालमेल बनाकर चलेंगे तो जॉब के लिए ठीक रहेगा। प्रमोशन होगा। वैवाहिक जीवन सुखद रहेगा। आर्थिक संकट दूर होगा। वाहन खरीदने के योग हैं।
        • कुंभ: इस राशि के लिए नवम स्थान में गुरु वक्री होगा। धार्मिक कार्यों में रुचि बढ़ेगी। संपत्ति के बंटवारे को लेकर भाई-बंधुओं से विवाद हो सकता है, लेकिन आप सभी के साथ बराबरी का न्याय करेंगे। आपकी निर्णय क्षमता में वृद्धि होगी। इस राशि के युवाओं को कोई बड़ा जॉब ऑफर हो सकता है। विदेश यात्रा के भी योग बन रहे हैं। प्रेम संबंध प्राप्त होंगे। दांपत्य जीवन में मधुरता आएगी।
        • मीन: मीन राशि के जातकों के लिए अष्टम भाव में गुरु वक्री होगा। चूंकि यह बृहस्पति की ही राशि है, लेकिन अष्टम स्थान शुभ नहीं होता है, इसलिए इस राशि के जातकों को वक्री गुरु का मिलाजुला प्रभाव दिखाई देगा। इस राशि के जातकों की मानसिक स्थिति बीच-बीच में विचलित करने वाली रहेगी। तनाव के कारण नकारात्मकता हावी होने लगेगी। शारीरिक अस्वस्थता महसूस करेंगे। हालांकि आर्थिक मसलों पर आपको जीत हासिल होगी।

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