जानिए मणिक्य रत्न के गुणों के बारे में ...
ऐसा माणिक्य जिसमें दो रंग दिखाई दे उसे नहीं पहनना चाहिए क्योंकि उसे पहनने से जीवन में अनेक प्रकार समस्यायें उत्पन्न होती है।
लखनऊ। मणिक्य रत्न बड़े काम की चीज है, आज हम आपको इसके बारे में कुछ खास बातें बताते हैं...
- विविध नाम-माणिक्य, पदम्राज, लोहित, शोण रत्न, रवि रत्न, कुरूविन्द, सौगन्धिक शोणोपल, वसु रत्न, याकूत और रूबी आदि अन्य नामों से माणिक्य को जाना जाता है।
- भौतिक गुण-इस रत्न की कठोरता 9 है, अपेक्षिक घनत्व-04.03, वर्तनाक 1.716 से 1.77, दुहरावर्तन 0.008 डिग्री द्विवर्णिता तीव्र।
- रायसायिनक रचना-एल्यूमिनियम आक्साईड।
प्राप्ति स्थान-उत्तम किस्म का माणिक्य वर्मा में पाया जाता है। इसका रंग गुलाब की पत्ती के रंग से लेकर गहरे लाल रंग का होता है। श्रीलंका के माणिक्य में वर्मा के माणिक्य की अपेक्षा पानी अधिक और लोच कम होता है। यह पीले और चितकबरे रंग का होता है। काबूल के माणिक्य में पानी ;मोटाद्ध और चुरचुरापन होता है। अफ्रीका ;टॉगानिकाद्ध का माणिक्य बहुत चुरचुरापन होता है। इसमें लाल रंग के साथ-साथ श्यामल चमक भी होती है। उत्तम कोटि का माणिक्य रत्न हिमालय पर्वत की चट्टानों और दक्षिण भारत में भी पाया जाता है।
उत्तम माणिक्य के गुण
- माणिक्य को अगर प्रातःकाल सूर्य के सामने रखें तो उसके चारों ओर लाल रंग की किरणें बिखरने लगती है।
- उत्तम कोटि का माणिक्य अॅधेरे में भी रखने पर वह सूर्य की चमक के समान प्रकाशित होता है।
- पत्थर पर माणिक्य को घिसने से अगर माणिक्य न घिसे और साथ में उसका वनज भी न घटे तो समझो माणिक्य अच्छी क्वाल्टिी का है।
- माणिक्य एक पारदर्शी होना चाहिए।
- प्रातःकाल सूर्य के सामने दपर्ण पर माणिक्य को रखें। यदि दर्पण के नीचे छाया भाग में किरणें दिखाई दे ंतो समझों माणिक्य उच्चकोटि का है।
- माणिक्य को गुलाब की पंखुण्यिों में रखने पर अगर वह चमकने लगे तो यह एक अच्छे माणिक्य की पहचान है।
- सौ ग्राम दूध में माणिक्य को डालने से दूध का रंग गुलाबी हो जाये तो समझो उत्तम कोटि का माणिक्य है।
- गोल अथवा लम्बे माणिक्य को अच्छा माना जाता है।
असली माणिक्य की पहचान
- सच्चे माणिक्य का आपेक्षिक गुरूतत्व नकली माणिक्य की अपेक्षा अधिक होता है।
- अच्छे माणिक्य को ऑखों पर रखने से ठंडक का अहसास होता है जबकि नकली माणिक्य में गरमाहट महसूस होती है।
- असली और नकली माणिक्य की जो परत होती है, उसमें काफी अन्तर होता है। असली माणिक्य की परत पतली होती है और नकली माणिक्य की परत अर्धवलयाकार होती है।
- असली माणिक्य चमकदार, स्निग्ध, कान्तियुक्त, अच्छे पानी का और चमकीला होता है।
दोषयुक्त माणिक्य हानिकारक होते है
- ऐसा माणिक्य जिसमें दो रंग दिखाई दे उसे नहीं पहनना चाहिए क्योंकि उसे पहनने से जीवन में अनेक प्रकार समस्यायें उत्पन्न होती है।
- जिस माणिक्य में आड़ी-तिरछी रेखायें हो, मकड़ी के जाल की तरह रेखायें हो। ऐसे माणिक्य को कदापि धारण न करें अन्यथा गृहस्थ जीवन में क्लेश बना रहता है।
- जिस माणिक्य का रंग दूध के समान हो या दूध के जैसे छींटे पड़े हो। ऐसा माणिक्य पहनने से आर्थिक समस्यायें घेरे रहती है और अचानक विपत्तियॉ आती है।
- धूयें के रंग के जैसे माणिक्य पहनान हानिकारक साबित हो सकता है।
- ऐसा माणिक्य जिसमें चमक न हो उसे सुन्न माणिक्य कहते है। इसे पहनना भी अशुभ होता है।
- जो माणिक्य अपने आपेक्षिक घनत्व से कम हो उसे हल्का माणिक्य कहते है। ये माणिक्य पहनना भी लाभप्रद नहीं होता है।
{promotion-urls}













Click it and Unblock the Notifications