कैसे पहने रत्न, क्या हैं इसका महत्व, जानिए यहां...
प्राचीन काल में स्त्री, हाथी दॉत, घोड़ा, सोना, चॉदी आदि की गणना भी रत्नों में की जाती थी।
लखनऊ। विशिष्ट प्रतिभा सम्पन्न, आकर्षण से युक्त, सुन्दर, तेजस्वी एंव सार युक्त गुण पदार्थ या मनुष्य का रत्न के नाम से उद्बोधन किया जाता है। देश के लिए विशिष्ट कार्य करने वाले व्यक्ति को देशरत्न कहा जाता है।
फिल्म के क्षेत्र में विशेष कार्य करने वाले व्यक्ति को फिल्म रत्न, साहित्य के क्षेत्र में विशेष योगदान देने वाले मनुष्य को साहित्य रत्न, धर्म के क्षेत्र में विशिष्ट कार्य करने वाले व्यक्ति को धर्म रत्न कहा जाता है। इसी प्रकार स्वतंत्र भारत की सर्वोच्च मानव उपाधि भारत रत्न है।

रत्न मुख्यतः खनिज पदार्थ
प्राचीन काल में स्त्री, हाथी दॉत, घोड़ा, सोना, चॉदी आदि की गणना भी रत्नों में की जाती थी। किन्तु वर्तमान काल में धातुओं तथा प्राणियों को अलग करके केवल बहुमूल्य पत्थरों को ही रत्न की श्रेणी में रखा गया है। रत्न मुख्यतः खनिज पदार्थ है। भूगर्भ में होने वाली विभिन्न प्रकार की रासायनिक क्रियाओं से धातुओं के संयोग से रत्नों का निर्माण होता है। विश्व के अनेक देशों में अनेक प्रकार के रत्नों की खानें पायी जाती है। वहॉ की खादानों से प्राप्त करके रत्नों का संस्कार किया जाता है तत्तपश्चात उसे बाजार में बिक्री हेतु उतारा जाता है।

84 रत्नों में से 9 रत्न प्रमुख
रत्न 84 प्रकार के होते है। 84 रत्नों में से 9 रत्न प्रमुख मानें जातें है। शेष को उपरत्न के रूप में स्वीकार किया गया है इसलिए सर्वत्र नौ रत्नों का ही विशेष महत्व है। क्योंकि भारतीय ज्योतिष के मुख्य नौं ग्रह इन नव रत्नों से सम्बन्धित है।

अब आइये जानते है किस व्यक्ति को कौन सा रत्न पहनना चाहिए...
1-माणिक्य- इस रत्न को अंग्रेजी में रूबी कहते है। रंग में यह रक्त गुलाबी, सूर्ख, श्याम होता है। यह सूर्य रत्न कहलाता है।
2-हीरा- डायमंड सफेद, गुलाबी, काला, नीला आदि का रंग का होता है। इसके चार वर्ण भेद होते है।
3-पन्ना- यह हरे रंग का नीम की पत्ती जैसा लोचदार पत्थर होता है।
4-नीलम- मोर की गर्दन जैसा नीला लोचदार व चमकदार उत्तम माना जाता है।
5-लहसुनिया- इसे कैटस आई भी कहते है क्योंकि इसमें बिल्ली के माफिक सूत पड़ा होता है। इसका रंग पिलास लिये तथा स्याही एंव सफेद लिए होता है।
6-मोती- यह सफेद, काला, पीला, नीला एंव आसमानी रंग का होता है।
7-मूंगा- कोरल सिन्दूरी लाल रंग का ( यह समुद्री जड़) होती है। फारसी में इसे मरंजान कहते है।
8-पुखराज- यह रत्न पीला व सफेद रंग होता है।
9-गोमेद- लाल धुयें के रंग का होता है। रक्त, श्याम तथा पीत आभा युक्त उत्तम माना जाता है।
कौन सा रत्न किस ग्रह से सम्बन्धित है-
माणिक्य-सूर्य, मोती-चन्द्र, मूॅगा-मंगल, पुखराज-बृहस्पति, हीरा-शुक्र, नीलम-शनि, गोमेद-राहु, लहसुनिया-केतु।

जन्म तारीख के अनुसार रत्नों का चुनाव
जन्म तारीख: निरयन सूर्य की राशि: उपयुक्त
14 अप्रैल से 13 मई: मेष: मूंगा
14 मई से 14 जून: वृष: हीरा
16 जून से 15 जुलाई:मिथुन:पन्ना
16 जुलाई 15 अगस्त: कर्क:मोती
16 अगस्त से 15 सितम्बर:सिंह:माणिक्य
16 सितम्बर से 16 अक्टूबर:कन्या:पन्ना
17 अक्टूबर से 15 नवम्बर:तुला:हीरा/ओपल
16 नवम्बर से 15 दिसम्बर:वृश्चिक:मूंगा
16 दिसम्बर से 14 जनवरी: धनु:पोखराज
15 जनवरी से 13 फरवरी: मकर:नीलम/नीलमणि
14 फरवरी से 13 मार्च: कुम्भ: नीलम/नीलमणि
14 मार्च से 14 अप्रैल: मीन: पोखराज

अंक ज्योतिष के अनुसार पहने रत्न
जन्म तारीख: अंक: रत्न
1, 10, 19, 28: 01:माणिक्य
2, 11, 20:02: मोती
3, 12, 21, 30:03:पोखराज
4, 13, 22, 31:04:मणिक्य
5, 14, 23:05: पन्ना/पन्ने की तुरमली
6, 15, 24:06: हीरा/ओपेल
7, 16, 25: 07:मोती/चन्द्रमणि
8, 17, 26:08: नीलम/लाजर्वत
9, 18, 27:09: मूंगा
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