Chandra Grahan 2025: चंद्र ग्रहण के दौरान आसमान में दिखेगा दुर्लभ लाल चांद, क्या है ब्लड मून के पीछे का साइंस
Chandra Grahan 2025: आसमान में एक अद्भुत खगोलीय घटना होने जा रही है। 7 सितंबर की रात एक दुर्लभ पूर्ण चंद्र ग्रहण (Blood Moon Lunar Eclipse) लगेगा, जिसमें चाँद का रंग सुर्ख लाल दिखाई देगा। यह नजारा खास तौर पर भारत और चीन में सबसे अच्छे तरीके से देखा जा सकेगा।
इसके अलावा अफ्रीका के पूर्वी हिस्से और पश्चिमी ऑस्ट्रेलिया से भी लोग इस दृश्य के साक्षी बन पाएंगे। आइए विस्तार से जानते हैं कि आखिर कैसे आसमान में सफेद स्वच्छ दिखने वाला चांद एक दम गहरे लाल रंग का दिखाई देने लगता है? क्या है इसके पीछे की खगोलीय कारण....

Blood Moon 2025: कब और कैसे दिखेगा ब्लड मून?
यह चंद्र ग्रहण रात 8:57 बजे (भारतीय समय) शुरू होगा और इसका पूर्ण ग्रहण चरण रात 11:00 बजे से 12:22 बजे तक चलेगा। यानी करीब पौने डेढ़ घंटे तक चाँद लाल-लाल रोशनी में नहाया हुआ दिखाई देगा। यह पूरा नजारा नंगी आंखों से सुरक्षित रूप से देखा जा सकता है, इसके लिए किसी खास चश्मे या सुरक्षा उपकरण की आवश्यकता नहीं है।
Why Moon Turns Red? क्या है ब्लड मून के पीछे का विज्ञान
जब पूर्ण चंद्र ग्रहण (Total Lunar Eclipse) होता है, तब पृथ्वी सूर्य और चाँद के बीच आ जाती है। इस स्थिति में सूर्य की रोशनी सीधे चाँद तक नहीं पहुँच पाती और पृथ्वी की छाया चाँद पर पड़ती है। लेकिन चाँद पूरी तरह काला नहीं होता, बल्कि लालिमा लिए हुए (Blood Moon) नजर आता है। इसके पीछे कई वैज्ञानिक कारण है -
पृथ्वी का वायुमंडल (Atmosphere Effect):
- जब सूर्य की रोशनी पृथ्वी के वातावरण से होकर गुजरती है, तो वह मुड़ जाती है (इस प्रक्रिया को Refraction कहते हैं)। वायुमंडल छोटी तरंग दैर्ध्य वाली नीली रोशनी (Blue Light) को ज्यादा बिखेर देता है और लंबी तरंग दैर्ध्य वाली लाल-नारंगी रोशनी (Red-Orange Light) को आगे बढ़ने देता है।
चाँद तक पहुँचती है लाल रोशनी:
- यही लाल रोशनी पृथ्वी के चारों ओर मुड़कर चाँद तक पहुँचती है और उसे लालिमा से भर देती है। इसी वजह से चंद्र ग्रहण के दौरान चाँद सुर्ख लाल या तांबे के रंग का दिखता है, जिसे हम Blood Moon कहते हैं।
पृथ्वी की धूल और मौसम का असर:
- कभी-कभी अगर वातावरण में धूल, प्रदूषण या ज्वालामुखी की राख ज्यादा हो, तो चाँद का रंग और गहरा लाल-भूरा हो सकता है। साफ-सुथरे मौसम में यह हल्का नारंगी-लाल नजर आता है।
सूर्य ग्रहण से अलग क्यों है चंद्र ग्रहण?
सूर्य ग्रहण और चंद्र ग्रहण दोनों ही दुर्लभ खगोलीय घटनाएँ हैं, लेकिन इनका स्वरूप और देखने का तरीका बिल्कुल अलग होता है। सूर्य ग्रहण तब होता है जब चाँद पृथ्वी और सूर्य के बीच आकर उसकी रोशनी को रोक देता है। यह केवल अमावस्या को संभव है और इसे नंगी आंखों से देखना खतरनाक माना जाता है, क्योंकि सूर्य की किरणें आंखों को नुकसान पहुँचा सकती हैं।
वहीं, चंद्र ग्रहण तब होता है जब पृथ्वी सूर्य और चाँद के बीच आ जाती है और पृथ्वी की छाया चाँद पर पड़ती है। यह केवल पूर्णिमा को होता है और इसे सुरक्षित तरीके से बिना किसी चश्मे के देखा जा सकता है। सूर्य ग्रहण सिर्फ कुछ मिनटों तक रहता है, जबकि चंद्र ग्रहण कई घंटों तक दिखाई देता है। सबसे खास बात यह है कि सूर्य ग्रहण पृथ्वी के छोटे हिस्से में ही देखा जा सकता है, जबकि चंद्र ग्रहण पृथ्वी के आधे हिस्से से एक साथ दिखाई देता है।
खगोल वैज्ञानिकों का मानना है कि इस बार का ब्लड मून चंद्र ग्रहण बेहद दुर्लभ और यादगार साबित होगा। ऐसे मौके बहुत कम आते हैं जब चाँद इतना बड़ा, चमकीला और लालिमा लिए हुए दिखाई देता है।












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