चैत्र अमावस्या 5 अप्रैल को, सिद्धि और पुण्यदायक योग बनेगा

नई दिल्ली। चैत्र नवरात्रि के ठीक एक दिन पहले आने वाली अमावस्या को चैत्री अमावस्या कहते हैं। इस बार चैत्री अमावस्या 5 अप्रैल 2019 शुक्रवार को आ रही है। 27 नक्षत्रों के अंतिम नक्षत्र रेवती और इंद्रा नामक योग में आ रही यह अमावस्या सर्व सिद्धिदायक और पुण्यदायक कही गई है। चैत्री अमावस्या सुख, सौभाग्य और धन-संपत्ति की प्राप्ति के लिहाज से विशेष महत्व रखती है। इस दिन समस्त सुखों की प्राप्ति के लिए कुछ खास उपाय किए जाते हैं। माना जाता है कि चैत्र नवरात्रि के ठीक एक दिन पहले आने वाली इस अमावस्या में गंगा आदि पवित्र नदियों में स्नान करके पितरों के निमित्त तर्पण, दान आदि करने से पारिवारिक कष्टों से मुक्ति मिलती है और घर में धन-संपत्ति के भंडार भरे रहते हैं।

 क्या करें चैत्री अमावस्या के दिन

क्या करें चैत्री अमावस्या के दिन

चैत्री अमावस्या 4 अप्रैल को दोपहर 12.51 से प्रारंभ होकर 5 अप्रैल को दोपहर 2.20 तक रहेगी। चैत्र नवरात्रि के एक दिन पूर्व आने वाली इस अमावस्या के दिन देवी की अगवानी की तैयारी की जाती है। पूरे घर के भीतर और बाहर से घर के चारों ओर गंगाजल का छिड़काव कर घर के बाहर चारों कोनों में कपूर जलाने से घर बुरी शक्तियों, नकारात्मक ऊर्जा से बचा रहता है और ऐसे घर में तीन देवियों लक्ष्मी, दुर्गा और सरस्वती का प्रवेश होता है। इससे समस्त सांसारिक सुखों की प्राप्ति होती है।

 पीले रंग की त्रिकोण ध्वजा

पीले रंग की त्रिकोण ध्वजा

चैत्री अमावस्या के दिन विष्णु या कृष्ण मंदिर के गुंबद पर पीले रंग की त्रिकोण ध्वजा लगाने का बड़ा महत्व है। माना जाता है जैसे-जैसे यह ध्वजा हवा में लहराती जाएगी आपका भाग्य भी चमकता जाएगा। जीवन की रूकावटें दूर होती जाएंगी और आप दिन-रात उन्न्ति करते जाएंगे। यदि आपका भाग्य साथ नहीं देता। अच्छा करने जाते हैं और उल्टा हो जाता है। कार्यों में अनावश्यक रूकावटें आती हों तो अमावस्या के दिन शाम के समय किसी कुएं में एक-एक चम्मच कर गाय का सवा पाव दूध डाले। इससे आपका बिगड़ा भाग्य बनने लगेगा। धन की आवक बढ़ेगी।

सुख-शांति और सौभाग्य प्राप्त होता है

सुख-शांति और सौभाग्य प्राप्त होता है

चैत्री अमावस्या के दिन पीपल के वृक्ष की जड़ में एक लोटा कच्चे दूध में बताशा और थोड़े से अक्षत डालकर अर्पित करेंगे तो इससे परिवार में सुख-शांति, सौभाग्य आता है।चैत्री अमावस्या का दिन शाम को पीपल के पेड़ के नीचे सरसो के तेल का दीपक लगाएं और अपने पितरों का स्मरण करें। पीपल की सात परिक्रमा लगाएं। ऐसा करने से पितृ प्रसन्न् होते हैं और फिर जीवन में किसी चीज की कमी नहीं रह जाती है।अमावस्या की शाम को शिव मंदिर में गाय के कच्चे दूध, दही, शहद से शिवजी का अभिषेक करें और उन्हें काले तिल अर्पित करें। इससे धन प्राप्ति के मार्ग में आ रही बाधाएं समाप्त होती है। आप अतुलनीय संपत्तियों के मालिक बनेंगे। अमावस्या शनिदेव का दिन भी माना जाता है। इसलिए इस दिन उनकी पूजा अवश्य करें। शनि मंदिर में नीले फूल अर्पित करें। काले तिल, काले साबुत उड़द, तिल का तेल, काजल और काला कपड़ा अर्पित करें। मंदिर में बैठकर ऊं शं शनैश्चराय नम: मंत्र की एक माला जाप करें। इससे आपके सारे संकट दूर हो जाएंगे। शनि के साथ अन्य ग्रह भी अनुकूल हो जाएंगे

 कालसर्प दोष की शांति के लिए

कालसर्प दोष की शांति के लिए

चैत्री अमावस्या के दिन किसी पवित्र नदी में स्नान करें और उसके किनारे बैठकर पंडित से पितरों के निमित्त तर्पण और दान करवाएं।>> - जिन लोगों का जन्म अमावस्या के दिन हुआ हो उनकी आर्थिक स्थिति हमेशा डांवाडोल रहती है। ऐसे बालक अपने माता-पिता की आर्थिक स्थिति को भी प्रभावित करते हैं। इसलिए जिनकी जन्म तिथि अमावस्या है वे प्रत्येक अमावस्या के दिन शिवजी का अभिषेक जरूर करवाएं।

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