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शिव योग, नाग करण में बना शनैश्चरी अमावस्या का योग, पितृ कार्यो के लिए सिद्ध है यह अमावस्या

संवत 2079 भाद्रपद मास की अमावस्या 27 अगस्त 2022 शनिवार को आ रही है। शनिवार के दिन आने के कारण शनैश्चरी अमावस्या का योग तो बना ही है इसके साथ ही इस दिन शिव योग और नाग करण भी है। शनैश्चरी अमावस्या के दिन शिव योग और नाग करण रहने से यह अमावस्या शनि की पीड़ा से मुक्ति दिलाने वाली तो है ही, कुंडली के पितृ दोष, नाग दोष, ग्रहण दोष, विष योग आदि से भी मुक्ति दिलाने वाली है।

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संवत 2079 भाद्रपद मास की अमावस्या 27 अगस्त 2022 शनिवार को आ रही है। शनिवार के दिन आने के कारण शनैश्चरी अमावस्या का योग तो बना ही है इसके साथ ही इस दिन शिव योग और नाग करण भी है। शनैश्चरी अमावस्या के दिन शिव योग और नाग करण रहने से यह अमावस्या शनि की पीड़ा से मुक्ति दिलाने वाली तो है ही, कुंडली के पितृ दोष, नाग दोष, ग्रहण दोष, विष योग आदि से भी मुक्ति दिलाने वाली है।

Amavasya

अमावस्या तिथि 26 अगस्त को दोपहर 12.26 बजे से प्रारंभ होकर 27 अगस्त को दोपहर 1.48 बजे तक रहेगी। चूंकिअमावस्या के पुण्यकाल में स्नान-दान आदि किए जाते हैं इसलिए पुण्यकाल 27 अगस्त को सूर्योदय के समय से प्रारंभ होकर दिवसर्पयत रहेगा। 27 अगस्त को शिव योग सूर्योदय से रात्रि 2 बजकर 5 मिनट तक रहेगा अर्थात् पूरे दिन शिव योग का सान्निध्य प्राप्त रहेगा। इसके साथ ही नाग करण अमावस्या तिथि की समाप्ति तक अर्थात् दोपहर 1.48 बजे तक रहेगा। इस प्रकार अमावस्या के पुण्यकाल में शनैश्चरी के साथ शिव योग और नाग करण की साक्षी रहेगी।

इस अमावस्या को सिद्ध पितृ अमावस्या भी कहा गया है। इतने विशिष्ट योग में आ रही शनैश्चरी अमावस्या के दिन अपने जीवन के संकटों का समाधान करने के लिए कुछ विशेष उपाय करने चाहिए।

इस दिन कुछ विशेष उपाय करने से सुख-समृद्धि बनी रहेगी

- शनि की साढ़ेसाती और ढैया अनेक प्रकार के कष्ट उत्पन्न करते हैं। इसलिए साढ़ेसाती और ढैया वाले जातक शनि की शांति के लिए शनैश्चरी अमावस्या के दिन ऊं शं शनैश्चराय मंत्र का जाप लावा स्टोन से बनी माला से करते हुए शनिदेव का तिल के तेल से अभिषेक करें। ऐसी 11 या 21 माला जाप करने से शनि की पीड़ा से मुक्ति मिलती है और साढ़ेसाती कष्टप्रद नहीं रह जाती।


- जन्मकुंडली में शनि-चंद्र की युति से विष योग बनता है। विष योग वाले जातक जीवनभर धोखाधड़ी के शिकार होते हैं। इन्हें हर जगह मात्र कष्ट ही मिलते हैं। जहरीले जीव जंतुओं से इन्हें सदैव हानि होती रहती है और ये अक्सर फूड पायजन या जहरीली वस्तुओं के शिकार हो जाते हैं। इनसे रक्षा के लिए शनैश्चरी अमावस्या के दिन भगवान शिव का पंचामृत अभिषेक करके नाग पूजा संपन्न करें। किसी सपेरे से सांप लेकर उसे जंगल में मुक्त करवाएं। पंचमुखी रुद्राक्ष धारण करें।

- यह अमावस्या पितृ कार्यो के लिए श्रेष्ठ है। यदि आपकी कुंडली में पितृदोष है तो इस अमावस्या के दिन किसी पंडित को घर बुलाकर या किसी पवित्र नदी के तट पर बैठकर पितरों के लिए तर्पण, श्राद्ध, पिंडदान आदि कर्म करें।


- आर्थिक परेशानियां दूर करने के लिए शनैश्चरी अमावस्या के दिन प्रात:काल पीपल के पेड़ की 108 परिक्रमा करते हुए उसके तने पर कच्चा सूत लपेटें। उसी के नीचे बैठकर विष्णुसहस्रनाम का पाठ करें। शाम के समय जौ के आटे के पांच दीपक बनाएं उनमें तिल का तेल भरें और पीपल के पेड़ के नीचे सूर्यास्त के बाद प्रज्वलित करें। इससे शीघ्र ही धन का आगमन होने लगता है।

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- इस दिन पितरों की संतुष्टि के निमित्त श्राद्ध आदि करके ब्राह्मणों को भोजन करवाएं और उचित दान-दक्षिणा देकर आशीर्वाद प्राप्त करें। गायों को हरा चारा खिलाएं, पक्षियों के लिए दाना रखें, गरीबों को खाने की वस्तुएं दान करें।

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English summary
Amavasya in August 2022 dates, time, shubh muhurat rituals and significance benefits
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