जानिए वास्तु और सूर्य का क्या संबंध है?
सूर्य साक्षात सृष्टि का प्रतीक है। पृथ्वी पर जो कुछ उत्पन्न है या सलामत है, वह सूर्य की ऊर्जा के कारण। वास्तु शास्त्र में भी सूर्य की महती भूमिका है। भवन निर्माण करते समय सर्वप्रथम यह विचार किया जाता है कि सूर्य की सकारात्मक ऊर्जा का अधिक से अधिक प्रवेश घर में कैसे हो।
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आज हम अपको बता रहे है कि सूर्य के भ्रमण से वास्तु शास्त्र का क्या सम्बन्ध है..
- सूर्योदय के पूर्व 4 बजे से 6 बजे का समय ब्रहम मुहूर्त माना गया है। यह समय असीम उर्जा का भण्डार होता है।
- इस समय सूर्य ईशान कोण(पूर्व-उत्तर) में रहता है। अतः यह समय योग, ध्यान, चिन्तन, पूजन व अध्ययन के लिए सर्वश्रेष्ठ होता है। इसलिए ईशान कोण में पूजन कक्ष व अध्ययन कक्ष आदि बनाना चाहिए।
- सूर्योदय से सुबह 9 बजे तक सूर्य पृथ्वी के पूर्वी हिस्से में रहता है। अतः घर इस प्रकार से बनाना चाहिए कि सूर्य की पर्याप्त रोशनी घर में प्रवेश कर सके। इसलिए भवन में पूर्व स्थान को खुला व साफ-सुथरा रखना चाहिए।
- सुबह 9 बजे से मध्यान्ह 12 बजे तक सूर्य आग्नेय कोण (पूर्व-दक्षिण) में रहता है। यह समय भोजन पकाने व ग्रहण करने के लिए उत्तम होता है। इस समय सूर्य की रोशनी भोजन को पकाने व पचाने के लिए श्रेष्ठ होती है। जिस कारण भवन के आग्नेय कोण में रसोई बनाना लाभप्रद होता है।
- मध्यान्ह 12 बजे से अपरान्ह 3 बजे तक सूर्य दक्षिण दिशा में गोचर करता है। इस वक्त सूर्य की रोशनी हानिकारक होती है, इसलिए यह समय विश्राम करने का होता है। इसी कारण घर में दक्षिण दिशा में शयन कक्ष होना शुभ माना जाता है।
- अपरान्ह 3 बजे से सांय 6 बजे तक कार्य करने का होता है। इस समय सूर्य नैऋत्य कोण (दक्षिण-पश्चिम) में रहता है। इस दिशा में घर के मुखिया का शयन कक्ष, कैश काउन्टर, पुस्तकालय व मशीने आदि लगानी चाहिए।
- सांय 6 बजे से रात्रि 9 बजे तक सूर्य पश्चिम दिशा में गोचर करता है। यह समय चर्चा व भोजन के लिए होता है, इसलिए पश्चिम दिशा में बैठक कक्ष होना श्रेष्ठ माना जाता है।
- रात्रि 9 बजे से मध्य रात्रि तक सूर्य पृथ्वी के वायव्य कोण (उत्तर-पश्चिम) में रहता है। इसलिए इस दिशा में बेडरूम,गैराज, गौशाला व नौकरों आदि का कमरा होना चाहिए।
- मध्य रात्रि से प्रातः 3 बजे तक सूर्य उत्तरी दिशा में भ्रमण कर रहा होता है। यह समय अत्यन्त गोपनीय होता है। इस दिशा में तिजोरी, कीमती वस्तुयें व आभूषण आदि रखने चाहिए।












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