जानिए भूमि खरीदने के लक्षण
मैं आपको कुछ ऐसे लक्षण बता रहा हॅू जिससे कि आप सभी जन भूमि के लक्षण के अनुरूप यह ज्ञात कर सकते है कि भूमि का प्रकार कौन सा है और वह कैसी है ? भवन निर्माण करने से पूर्व यह भी जान लेना चाहिए कि जिस भूमि पर वृक्ष लता, पौधे, झाड़ी, घास, कांटेदार वृक्ष आदि हो तो वह भूमि कैसी रहेगी ?

1- जिस भूमि पर आम, पपीता, आंवला, अमरूद, अनार, पलाश आदि के वृक्ष उगे हो या उग सकते हो, वह भूमि अति श्रेष्ठ मानी गई है।
2- जिन वृक्षों पर फल-फूल आते रहते है और लता एंव वनस्पतियां सरलता से वृद्धि करती हो, वह भूमि उत्तम कही गई है।
3- जिस भूमि पर कंटीले वृक्ष, झाड़, सूखी घास, बेर आदि के पेड़ उत्पन्न होते है, वह भूमि सामान्य कही जाती है।
4- जिस भूमि पर खटटे, कड़वे फलों वाले वृक्ष शमी, नीम, करौंदा, आकड़ा, बबूल, खेजड़ा आदि उगते है, वह भूमि मध्यम कही जायेगी।
5- जो व्यक्ति अपने भवन में सुखी रहना चाहता हो, उसे कभी भी उस भूमि पर निर्माण नहीं करना चाहिए, जॅहा पीपल या वटवृक्ष के वृक्ष हो। इन वृक्षों के आस-पास भी भवन होना शुभ नहीं होता है।
6- तुलसी का पौधा श्रेष्ठ कहा गया है। जिस भूमि पर तुलसी का पौधा फलता-फूलता हो, वहां पर भवन निर्माण करना श्रेष्ठ होता है। तुलसी का पौधा अपने चारों ओर 50 मी. तक का वातावरण विशुद्ध करता है। इसमें कुमि नाशक शक्ति विद्यमान होती है। काली तुलसी तो सदैव आराध्य होती है।
7- यदि भवन के समीप पूर्व में पीपल का वृक्ष, दक्षिण में गूलर, पश्चिम में बरगद, उत्तर में पाकड़ का वृक्ष हो तो शुभ होता है। सामान्यतः तो ये वृक्ष भूखण्ड के आस-पास न हो तो उत्तम है। यदि रखने है तो उपयुक्र्त दिशाओं में मुख्य भवन के बाद खुले क्षेत्र में लगायें। पूर्व दिशा में बरगद, दक्षिण में पाकड़, पश्चिम में पीपल और उत्तर में गूलर का होना सर्वथा वर्जित है।












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