अगर आप जमीन खरीदने जा रहे हैं तो जरूर जानें यह बात
भूमि का क्रय विभिन्न प्रकार की दृष्टियों से किया जाता है। अधिकांश लोग भूमि को भवन निर्माण करने के लिए खरीदते है। कुछ लोग व्यापारिक संस्थान बनाने के लिए भूमि का क्रय करते है। कुछ एक कालोनी बनाने के लिए भूमि का क्रय करके बाद में भूखण्ड गृहस्थों को बेच करके धन कमाते है और अनेक लोग धन का विनियोजन करने के लिए भूमि का क्रय करते है। जो भूमि आप खरीदने जा रहें है, वह आपके लिए लाभकारी रहेगी या हानि कारक इसका पता लगाना जरूरी होता है। भूमि का क्रय करने से पूर्व भूमि की शुभता का परीक्षण करना अति आवश्यक होता है।

भूमि के प्रकार-
वर्णानुसार भूमि चार प्रकार की होती है।
1- ब्राह्मणी भूमि।
2- क्षत्रिया भूमि।
3- वैश्या भमि।
4- शूद्रा भूमि।
1-ब्राह्मणी भूमि
यह भूमि सफेद रंग की मिट्टी वाली, स्वाद में मधुरता का अनुभव कराने वाली व सुन्दर सुगन्ध वाली होती है। इस भूमि को स्पर्श करने पर सुकून का अनुभव होता है। यह भूमि ग्रहस्थों के लिए शुभ मानी जाती है। इस प्रकार की भूमि पर भवन बनाकर रहने से परिवार का विकास, शन्ति, धन-धान्य आदि प्राकर के सुखों की प्राप्ति होती है। ब्राह्मणीभूमि पर साहात्यिक संस्था, विश्वविद्यालय, कालेज, मन्दिर, धर्मशाला व माॅगलिक कार्यो हेतु भवन निमार्ण करना चाहिए। इस भूमि पर मां लक्ष्मी व सरस्वती जी की विशेष कृपा बनी रहती है।
2- क्षत्रिया भूमि
लाल रंग की मिट्टी वाली, स्वाद में कषैली व रक्त गंन्ध से युक्त भूमि को क्षत्रिया भूमि कहते है। यह भूमि स्पर्श करने में कठोर होती है। यह भूमि राज्यप्रदा होती है। इस भूमि पर राजकीय कर्यालाय, सैनिक या बहादुरों के लिए भवन बनाना उपयुक्त होता है। इस भूमि से पराक्रम की उर्जा स्वतः होती है। इस प्रकार की भूमि पर सभागार, छावनी, शस्त्रागार, कारखाना, सैनिक कालोनी आदि बनवाना ज्यादा शुभ रहता है।
3- वैश्या भूमि
हल्के हरे रंग या पीले रंग की मिट्टी वाली, स्वाद में खट्टी व शहद की गन्ध से युक्त वैश्या भूमि होती है। यह भूमि व्यवसायियों के लिए उत्तम होती है। इस भूमि पर व्यवसायिक दुकानें, काम्पलेक्स, माल, प्रतिष्ठान, धनिकों के बगंले या कोठी आदि निर्मित करने से लाभ ही लाभ होता है।
4- शूद्रा भूमि
काले रंग की मिट्टी वाली, स्वाद में कड़वी एंव मदिरा सदृश्य गंध ये युक्त भूमि को शुद्रा भूमि कहते है। यह भूमि सिर्फ उद्योग धन्धों, श्रमिक कालोनी, कुष्ठ आश्रम या शमशान आदि के लिए उपयुक्त होती है। यह भूमि जनमानस के लिए उपयोगी नहीं होती है।












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