ज्‍योतिष की भविष्‍यवाणी- लोकसभा चुनाव इसी साल

गणतंत्र दिवस के मौके पर पूरे भारत में ढेर सारे कार्यक्रमों का आयोजन होगा। हर राज्‍य में परेड निकलेगी, रंगारंग कार्यक्रम होंगे और फिर बस। फिर दूसरे दिन रोजमर्रा की जिंदगी में भारतवारी रम जायेंगे। ऐसे में अगर एक ज्‍योतिष की दृष्टि से देखें तो हिन्‍दुस्‍तान में क्‍या परिवर्तन होने की संभावना है, इस बात का अंदाजा आपको हो सकता है। यही तस्‍वीर आपको यहां दिखा रहे हैं लखनऊ के ज्‍योति‍षाचार्य पं. अनुज के शुक्‍ल-

सरकार का होगा भारी विरोध

दिनांक 26 जनवरी 2013 ई0 को सांय 4:46 बजे जिस समय क्षितिज पर मिथुन लग्न उदित हो रही होगी, उस समय भारतीय गणतंत्र अपने 64 वें वर्ष में प्रवेश करेगा। वर्ष कुण्डली में मुन्था प्रथम भाव में स्थित है तथा मुन्थेश मित्र राशि में होकर अष्टम भाव में स्थित है। अतः सुविचारित योजनाओं व नीतियों के क्रियान्वयन में धन का व्यय अधिक होगा लेकिन अन्ततोगत्वा असफलता ही हाथ लगेगी।

लग्न का स्वामी बुध अपने मित्र के साथ अष्टमेश भाव पर कब्जा जमाये हुये है, जिस कारण देश के युवाओं का क्रोध व उत्साह एक नये अन्दोलन का जन्म ले सकता है। ऐसी स्थिति में सरकार को कठिन से कठिन परिस्थितियों का सामना करना पड़ेगा। तृतीय भाव का अधिपति अपनी शत्रु राशि में होकर अष्टम भाव में बैठा है। अतः शासक वर्ग को भारी विरोध व विसंगतियों का सामना करना पड़ेगा। धनेश स्वराशि का होकर धन भाव में स्थित है एंव जिसकी सप्तम दृष्टि अष्टम भाव पर पड़ रही है, जिसके कारण भारत को अन्तर्राष्टीय सम्बन्धों से लाभ होगा और विदेशी मुद्रा में वृद्धि होगी।

इसी साल हो सकते हैं लोकसभा चुनाव

सप्तम स्थान का अधिपति 12 वें भाव पर कब्जा किये हुये है। अतः महिला सुरक्षा के लिए कानून व कल्याण योजनाओं पर धन तो अधिक व्यय होगा किन्तु सकारात्मक परिणाम सामने नहीं आयेंगे। नवमेश शनि उच्च का होकर पंचम भाव में राहु के साथ संग्रस्थ है। राहु व शनि का पंचम भाव में एक साथ स्थित होना इस बात का संकेत है कि आगामी लोकसभा चुनावों में जनता एक ऐसा इतिहास रच सकती है, जो राजनैतिक पार्टियों के लिए अकल्पित होगा।

गणतंत्र की मूल कुण्डली में लग्न एंव दशमभाव के अधिपति नीच के गुरू की महादशा में गुरू का ही अन्तर चल रहा है, जो 20 सितम्बर 2013 तक चलेगा तत्पश्चात शनि का अन्तर प्रारम्भ होगा। शनि लाभेश एंव द्वादशेश होकर शत्रु राशि का होकर छठें भाव में बैठा है, जिसकी तृतीय व सप्तम दृष्टि क्रमशः आठवें व 12वें भाव पर पड़ रही है।

ये दोनों भाव परिवर्तन एंव विपत्तियों के सूचक है। शनि न्याय और अनुशासन का संकेतक है लेकिन भ्रष्टाचार और भ्रष्टाचारियों का सख्त विरोधी है। ये सभी योग इस बात का संदेश दे रहे है कि भ्रष्टाचारियों का बड़े पैमाने पर खुलासा होगा और किसी सामाजिक मुद्दे पर सरकार अचानक अल्पमत में आ सकती है। जिस कारण सितम्बर 2013 से लेकर दिसम्बर 2013 के मध्य चुनाव होने सम्भावना नजर आ रही है।

गणतंत्र दिवस से जुड़ीं तस्‍वीरें और उनके सामने देश के बारे में कुछ महत्‍वपूर्ण तथ्‍य-

गांव क्‍यों नहीं हैं विकसित

गांव क्‍यों नहीं हैं विकसित

देश के शहरों में ऊंची-ऊंची इमारतें खड़ी हो रही हैं, लेकिन आज भी हमारे ही देश में कई ऐसे गांव हैं, जहां बिजली नहीं पहुंचती। ऐसे गांव हैं, जहां स्‍कूल के रूप में कच्‍चे कमरे बना दिये गये हैं टीचर नहीं हैं। ऐसा क्‍यों?

भारत अशांति के मार्ग पर

भारत अशांति के मार्ग पर

विश्व को अध्यात्मिक रूप से शान्ति प्रदान कराने वाला भारत अशांति के मार्ग पर विकास की यात्रा कर रहा है। किसी भी देश का भविष्य मुख्यतः समाज-संस्कृति और राजनीति की व्यवहारिक प्रगतिशीलता व समतावादी स्वरूप पर निर्भर करता है। भारत का भविष्य कहे जाने वाले युवाओं का नैतिक रूप से क्षरण हो गया है। आखिर ऐसा क्यों?

महंगाई तेजी से बढ़ रही

महंगाई तेजी से बढ़ रही

देश में महंगाई तेजी से बढ़ रही है। पेट्रोल-डीजल के दाम आसमान पर होने की वजह से खान-पान की वस्‍तुएं भी महंगी हो गई हैं। सरकार की नीति है आम जनता की जेब से पैसा निकालो। आखिर ऐसा क्‍यों?

बेरोजगारी इतनी है

बेरोजगारी इतनी है

देश में बेरोजगारी इतनी है, कि पढ़े-लिखे युवाओं को ठेले पर फल बेचने पड़ रहे हैं। सरकार दावा करती है कि वो हर साल रोजगार के अवसर बढ़ा रही है, लेकिन आम युवाओं को कुछ हासिल नहीं हो रहा। ऐसा क्‍यों?

भ्रष्टाचार

भ्रष्टाचार

सरकार चाहे यूपीए की हो या एनडीए की या फिर किसी अन्‍य राजनीतिक दल की। भ्रष्‍टाचार हर राज्‍य में व्‍याप्‍त है। इससे निबटने के लिये लोकपाल बिल की बात हर छह महीने पर छेड़ी जाती है और हर बार ठंडे बस्‍ते में डाल दिया जाता है। ऐसा क्‍यों?

बढ़ते बलात्‍कार

बढ़ते बलात्‍कार

देश में बलात्‍कार तो ऐसे बढ़ रहे हैं, जैसे क्रिकेट का स्‍कोरबोर्ड। हर रोज बलात्‍कार की वारदातें देश भर से सामने आ रही हैं। 16 दिवंबर को दिल्‍ली गैंगरेप के बाद दिल्‍ली में ही बलात्‍कार के 76 बलात्‍कार हो चुके हैं। उन्‍हें फास्‍ट ट्रैक कोर्ट में क्‍यों नहीं भेजा?

सभ्‍यता और मानवता खत्‍म

सभ्‍यता और मानवता खत्‍म

भारतीय समाज में सभ्‍यता और मानवता खत्‍म होती दिखाई दे रही है। युवाओं में शिष्‍टाचार और ईमानदारी की कमी एक नये वायरस को जन्‍म दे चुकी है जो धीरे-धीरे देश को खोखला कर रहा है।

महिलायें असुरक्षा के भय से ग्रसित

महिलायें असुरक्षा के भय से ग्रसित

दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र में महिलायें असुरक्षा के भय से ग्रसित हैं। जब भय मन पर हावी होता है, तो भविष्य बोझ लगने लगता है। भय हमारा सबसे बड़ा शत्रु है, इससे पार पाना होना होगा।

घिनौनी राजनीति

घिनौनी राजनीति

देश में राजनीति शब्‍द नाम सुनकर ही कई लोगों को घिन आती है। भ्रष्‍टाचार में डूबे हुए राजनेताओं के कारण आज देश के तमाम अच्‍छे युवा इस क्षेत्र में करियर बनाना ही नहीं चाहते। राजनीति में अगर कोई करियर बनाना चाहते हैं तो वो फेलियर छात्र, गुंडागर्दी व दबंगई करने वाले छात्र। ऐसा क्‍यों?

क्‍या है भारत की जरूरत

क्‍या है भारत की जरूरत

आज भारतीय समाज की संस्कृति को पुनर्जीवित करने की आवश्यकता है। यह जिम्मेदारी बड़े पैमाने पर युवा आबादी पर है, जिसका गुस्सा, जोश एक व्यापक परिवर्तन के संकेत दे रहा है, किन्तु उन्हे विकृतियों पर नजर रखनी होगी जो उनके बीच ही मौजूद हो सकती है। मनोरोग के खिलाफ सामाजिक निगरानी एक बेहतरीन उपचार होती है।

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