साल 2013 में विवाह के शुभ मुहूर्त
लखनऊ से हमारे ज्योतिष पं. अनुज कुमार शुक्ल बता रहे हैं कि मकर संक्रान्ति से जहां एक ओर कड़ाके की ठंड से राहत मिली वहीं दूसरी ओर खरमास समाप्त होते ही शुभ कार्य शुरू हो गये। लेकिन नये वर्ष का शुभ विवाह मुहूर्त 16 जनवरी को पड़ रहा है। हलांकि इस वर्ष विवाह के शुभ मुहूर्त कुछ कम हैं।
इस साल जनवरी महीने में 7 शुभ मुहूर्त और फरवरी माह में 7 शुभ मुहूर्त है। तत्पश्चात मई माह में शुभ मूहूर्त मिलना प्रारम्भ होंगे लेकिन इस मध्य में विवाह के सामान्य मूहूर्त भी हैं, जिनमें शादी की जा सकती है। सामान्य मुहूर्तो में भी विवाह होता है। ऐसे में दिसम्बर तक शुभ मुहूर्तो के साथ 22 सामान्य मुहूर्त भी हैं। शुक्र अस्त होने के कारण इस वर्ष विवाह के बहुत ज्यादा शुभ मुहूर्तों की संख्या सिर्फ 19 हैं।
भारतीय ज्योतिष कहते हैं कि शुभ मुहूर्त पर विवाह करने से दांपत्य जीवन बहुत अच्छा रहता है। इसी परंपरा को निभाते हुए अधिकांश हिन्दू विवाह मुहूर्त देख कर किये जाते हैं, फिर चाहे मुहूर्त रात के ढाई बजे का ही क्यों न हो।
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सामान्य मुर्हूत जनवरी से मई तक
जनवरी में 16,17,18, 22, 23, 24, 28 और 31।
फरवरी माह में एक से आठ फरवरी तक।
अप्रैल माह में 24 से 30 तक।
मई माह में 1,6,7,11,12,13,17 से 29 तक।

सामान्य मुर्हूत जून से दिसंबर
जून माह में 2,3,4 तक।
जुलाई माह में 4,5,6 तथा 11 से 14 तक।
नवंबर माह में 18,19,20 तथा 24 से 30 तक।
दिसंबर माह में 2,4,5,6,10,11 और 12।

विवाह के बहुत शुभ मुहूर्त
जनवरी- 16, 17, 18, 20, 23, 30 व 31
फरवरी- 1, 4, 5, 6, 7, 13 व 14
मई- 26 व 28
जून- 1, 2 व 26।

क्यों जरूरी है मुहूर्त पर विवाह करना
हिन्दू विवाह तिथि की गणना पंचाग देखकर किया जाता है। शुभ विवाह मुहूर्त शुभ तिथि ,समय और नक्षत्र पर निर्भर करता है। हमारे जीवन में मुहूर्त का अत्यधिक महत्व है। ऋषि-मुनियों ने अपने चिंतन के बाद जिन सिद्धान्तों का प्रतिपादन किया, उनके संकलित स्वरूप का नाम मुहूर्त शास्त्र है। विवाह-मुहूर्त में रवि शुद्धि, गुरू शुद्धि एवं चंद्र शुद्धि का विशेष महत्व रखता है। देव गुरु बृहस्पति विवाह के बाद आपसी समझ से गृहस्थी के दायित्व को निभाने की शक्ति प्रदान करते हैं। इसलिए विवाह में कन्या की राशि से गुरू शुद्धि को देखा जाता है।

क्यों जरूरी है मुहूर्त पर विवाह करना
विवाह के बाद गृहस्थ के लिए संसाधन जुटाने की जिम्मेदारी पुरूष पर आती है। जिसका सूचक सूर्य को माना जाता है। इसलिए विवाह में वर की राशि से रवि शुद्धि को देखा जाता है। प्रत्येक कार्य की सफलता उसकी प्रक्रिया में एकाग्रता पर आधारित होती है। वर की राशि में सूर्य होने पर विवाह के बाद आर्थिक उन्नति के रास्ते खुलते हैं। ऐसा होने पर अक्सर लोग कहते हैं कि बहू के कदम घर में लक्ष्मी लाये।












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