श्रीकृष्णजन्माष्टमी विशेष : हरे रामा..हरे कृष्णा

Sri Krishna anmashtami
श्रीकृष्णजन्माष्टमी, हमारे देश में श्रीकृष्णजन्माष्टमी का त्यौहार अतिविशिष्ट रूप में मनाया जाता है। देश के प्रत्येक अंचल में इसकी पूर्ण प्रतिष्ठा है। श्री कृष्ण का अवतार विभिन्न परिस्थितियों में हुआ था। भगवान श्रीकृष्ण का लीला.विलास अनन्त है। जन्म लेते हुये चर्तुभुज रूप में प्रकट होकर फिर छोटा बालक बन जाना। कारागार के पहरेदारों का सो जाना तथा पिता वासुदेव की हथकड़ी, बेड़ी व दरवाजे का स्वतः खुल जाना।

यमुना नदीं में बाढ़ आ जाने पर भी रात्रि में ही श्री कृष्ण का गोकुल पहुंच जाना ये सब बातें आसान नहीं थी। बहुत से लोग इस व्रत में फलाहार करते हैं, परन्तु अधिकांश लोग इस व्रत को पूर्ण उपवास करके ही मनाते है। जो भी व्यक्ति जन्माष्टमी का व्रत करके पूजन-पाठ करता हैं। वह विष्णुलोक को प्राप्त करता है। ऐसा पुराणों में वर्णित है। परन्तु मेरे मतानुसार यदि किसी बालक का जन्म होता है तो सभी लोग उस दिन विभिन्न प्रकार के व्यंजनों का भोग करके उत्सव मनाते हैं तो फिर भगवान श्री कृष्ण के जन्म के समय हमें उपवास करने की आवश्यकता क्यों हैं? क्या हम लोग दुःखी है? आज के दिन मिष्ठान,व्यजंनों का भोग लगाकर लोंगो में वितरण करें तथा स्वंय भी सेवन करें। तभी हम प्रसन्नता के भाव प्रकट कर पायेंगे।


भाद्रपद कृष्ण अष्टमी को रात्रि 12 बजे मथुरा नगरी के कारागार में वासुदेव जी की पत्नी देवकी के गर्भ से 16 कलाओं से सम्पन्न भगवान श्री कृष्ण का अवतरण हुआ था। इस व्रत में सप्तमी सहित अष्टमी का ग्रहण निषिद्धि है.

पूर्वविद्धाष्टमी या तु उदये नवमीदिने।
मुहूर्तमपि संयुक्ता सम्पूर्णा साष्टमी भवेत।।
कलाकाष्ठामुहूर्तापि पदा कृष्णाष्टमी तिथि।
नवम्यां सैव ग्राहण स्यात सप्तमीसंयुता नहि।।

साधारणतया आजकल लोगों के इस व्रत में दो मत है। स्र्मात लोग अर्धरात्रि का स्पर्श होने पर या रोहिणी नक्षत्र का योग होने पर सप्तमी सहित अष्टमी में भी उपवास करते है। किन्तु वैष्णव लोग सप्तमी का लेशमात्र भी स्पर्श होने पर दूसरे दिन ही उपवास करते है।

व्रत का नियम: प्रातःकाल उठकर स्नानादि नित्यकर्म से निवृत होकर व्रत का निम्न संकल्प करें।

ऊँ विष्णुए अदेत्यादि क्रोधी नामक संवत्सरे
सूर्य दक्षिणायने वर्षतौ भाद्रपदमासे कृष्ण पक्षे
श्री कृष्णजन्माष्टम्या तिथौ आमुकवासरे आमुकनामांह
मम चतुवर्गसिद्धिद्वारा श्री कृष्णदेवप्रीतये जन्माष्टमी
व्रतांगत्वेन श्री कृष्णदेवस्य यथमिलितोपचारैः पूजन करिस्ये।

इसके पश्चात केले के खम्भे आम अथवा अशोक के पत्तों आदि से घर का द्वार सजायें तथा दरवाजे के मुख्य द्वार पर मंगल कलश भी स्थापित करें। रात्रि में भगवान श्री कृष्ण की मूर्ति का विधिपूर्वक पंचामृत से स्नान कराकरए षोडशपचार से विष्णु भगवान करते समय इस मन्त्र का जाप करें।

ऊँ नमो भगवते वासुदेवाय नमः।

जन्मोत्सव के पश्चात कर्पूरादि प्रज्जवलित कर भगवान की आरती करें व प्रसाद का वितरण करें।

विशेषः1. जो भी व्यक्ति कर्ज से परेशान है या फिर उनकी आर्थिक स्थिति कमजोर है। ऐसे लोग ये उपाय करें तो लाभ मिलेगा।
जन्माष्टमी के दिन श्रीकृष्ण जी की मूर्ति के समक्ष तीन मुट्ठी चावल एक पीले कपड़े में बांधकर रख दें और उसके पश्चात विधिवत पूजन करें। दूसरे दिन उन्हीं चावलों की खीर बनाकर सभी लोग ग्रहण करें।

2. जिन महिलाओं को सन्तान नहीं होती या फिर होकर मर जाती है। वे महिलायें यह उपाय करें तो उन्हे अवश्य लाभ मिलेगा।

भगवान श्री कृष्ण की मूर्ति के समक्ष एक साबुत नींबू रखकर पूजन व प्रार्थना करें। उसके पश्चात उसी नींबू को अपने पास रख लें। जब भी सन्तान के लिये प्रयास करें उससे आधा घन्टे पहले एक गिलास पानी में थोड़ी चीनी व रखा हुआ नींबू निचोड़कर रख लें। संसर्ग क्रिया के पश्चात उस पेय पदार्थ को एक ही बार में ग्रहण कर लें।

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