AI Weather Forecast: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस बना किसानों के लिए देवदूत, 3.8 करोड़ लोगों की जिंदगी बदल दी!
AI Weather Forecast: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस ऐसी तकनीक है जिसका इस्तेमाल रोज़मर्रा के कामों से लेकर कृषि क्षेत्र में भी बड़े पैमाने पर हो रहा है। इस साल गर्मियों में भारत के 3.8 करोड़ किसानों को एआई (Artificial Intelligence) आधारित पूर्वानुमानों के जरिए मानसून की शुरुआत की जानकारी मिली। किसानों के लिए ये सटीक पूर्वानुमान बेहद उपयोगी हैं। इससे किसानों को सही समय पर बीज बोने और फसल प्रबंधन के फैसले लेने में मदद मिली। यह पूर्वानुमान गूगल रिसर्च (Google Research) के मॉडल न्यूरलजीसीएम NeuralGCM पर आधारित थे।
यह मॉडल पारंपरिक फिजिक्स-आधारित मॉडलिंग को मशीन लर्निंग के साथ मिलाकर काम करता है। इसकी वजह से मौसम से जुड़े सटीक और किफायती पूर्वानुमान मिलते हैं। भारत के किसानों के लिए मौसम के सटीक पूर्वानुमान बहुत उपयोगी हैं। कृषकों की निर्भरता अभी भी फसल की बुआई से लेकर कटाई तक बारिश पर है।

AI Weather Forecast: गूगल की नई तकनीक का कमाल
पारंपरिक मौसम और जलवायु मॉडल बेहद जटिल और महंगे होते हैं, जिन्हें चलाने के लिए सुपरकंप्यूटर की जरूरत पड़ती है। गूगल रिसर्च की टीम ने इसमें बदलाव की कोशिश की है। गूगल की रिसर्च टीम ने एक नया मॉडल NeuralGCM तैयार किया है। यह मॉडल ऐतिहासिक मौसम डेटा और भौतिक विज्ञान दोनों का उपयोग करता है। खास बात यह है कि यह इतना हल्का है कि इसे एक साधारण लैपटॉप पर भी चलाया जा सकता है।
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शिकागो यूनिवर्सिटी के सहयोग से तैयार
जब NeuralGCM को ओपन-सोर्स किया गया, तो यूनिवर्सिटी ऑफ शिकागो की टीम ने इसे किसानों की मदद के लिए इस्तेमाल किया था। उन्होंने महसूस किया कि भारत में छोटे किसानों के लिए सबसे बड़ी चुनौती यह तय करना है कि बीज कब बोएं। चूंकि हर साल मॉनसून के समय का सटीक अनुमान लगाना कठिन होता है, इसलिए एआई ने इस समस्या का समाधान दिया। टीम ने NeuralGCM को यूरोपियन सेंटर फॉर मीडियम-रेंज वेदर फोरकास्ट्स (ECMWF) के AI मॉडल और ऐतिहासिक डेटा के साथ मिलाकर टेस्ट किया। इस तकनीक ने मॉनसून की शुरुआत को एक महीने पहले ही सही अनुमान लगा दिया था। साथ ही आने वाले समय में एक असामान्य सूखे की अवधि को भी पकड़ लिया।
Artificial Intelligence से किसानों को मिलेगा लाभ
भारतीय कृषि मंत्रालय के सहयोग से इस पहल के तहत किसानों को एसएमएस के जरिए एडवांस मौसम की जानकारी दी गई। इससे किसान यह तय कर सके कि कब बुआई करें, ज्यादा बीज खरीदें या फसल बदलें। शिकागो यूनिवर्सिटी के शोध के अनुसार, सही समय पर सटीक जानकारी मिलने से किसानों की वार्षिक आय लगभग दोगुनी हो सकती है। यह पहल इस बात का उदाहरण है कि रिसर्च से निकली एआई तकनीक कैसे जमीन पर बदलाव ला सकती है और किसानों को जलवायु संकट से निपटने की ताकत दे सकती है।
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