AI Use In Election: आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस ही तय करेगा चुनावों की दिशा? जानें चुनावी प्रणाली पर AI का असर
AI Use In Election: भारतीय लोकतंत्र के लिए चुनाव जनमत का उत्सव होता है। जनता सरकार और विपक्ष दोनों के मुद्दों और कामकाज पर एक तरीके से मुहर लगाती है। भारतीय लोकतंत्र की खूबसूरती रही है कि सत्ता का परिवर्तन हमेशा जनमत के जरिए हुआ है। हर चुनाव करोड़ों लोगों की राय और भागीदारी से तय होता है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का प्रभाव जिस तरीके से पूरी दुनिया में बढ़ रहा है, इससे चुनाव प्रक्रिया भी अछूती नहीं रहने वाली है। भविष्य में चुनावी रणनीतियों, मतदाता जुड़ाव और नतीजों के पूर्वानुमान पर एआई के प्रभाव से इनकार नहीं किया जा सकता है।
AI Use In Election: चुनाव के हर क्षेत्र में बढ़ेगा AI का दायरा
आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस का असर चुनावों में बड़े पैमाने पर डेटा एनालिसिस में देखा जाएगा। अमेरिका के राष्ट्रपति चुनाव (2024) में चुनावी कैंपेन कंपनियों ने आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस का इस्तेमाल किया था। भारत में भी सोशल मीडिया पोस्ट, मतदाताओं का मूड भांपने, स्थानीय मुद्दे, और पिछले मतदान पैटर्न वगैरह के विश्लेषण के लिए एआई का इस्तेमाल होगा। इसका असर पार्टियों के टार्गेटेड कैंपेन और व्यक्तिगत प्रचार रणनीति बनाने से लेकर चुनावी मौसम में मुद्दे उठाने के लिए भी किया जा सकता है।

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छोटे-छोटे समूहों तक पहुंचने के लिए होगा AI का इस्तेमाल
AI आधारित बोट्स (जैसे WhatsApp या Facebook Messenger चैटबॉट्स) लाखों वोटरों से व्यक्तिगत बातचीत करने में सक्षम हैं। एआई का इस्तेमाल इनके जरिए समाज के सभी समूहों तक पहुंचने के लिए किया जा सकता है। कोई किसान है, कोई युवा बेरोजगार या कोई महिला है सबको उनके मुद्दों के हिसाब से चुनावी वादे समझाए जा सकेंगे। इससे प्रचार पहले से ज्यादा प्रभावी होगा। साथ ही, इन चैटबॉट्स से मिले जवाबों का विश्लेषण राजनीतिक दल अलग-अलग समूहों की अपेक्षाओं और मंशा को समझने के लिए भी कर सकेंगे।
AI के साथ जुड़े हैं Deepfake जैसे कई खतरे
आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस के कुछ घातक प्रभाव भी हो सकते हैं और इसलिए इसका इस्तेमाल बहुत सावधानी से करने की जरूरत है। डीपफेक वीडियो बनाकर किसी भी नेता का नकली बयान लगाया जा सकता है। इसी तरह से एआई का इस्तेमाल फेक न्यूज तैयार करने और उसका प्रचार करने के लिए भी किया जा सकता है। आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस के बढ़ते इस्तेमाल के दौर में सरकारों से लेकर आम नागरिक तक सबको सतर्क रहने की जरूरत है।
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