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AI in Courtrooms: अब न्याय का फैसला भी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस करेगा? जानें कोर्ट के कामकाज पर कैसा असर होगा

AI in Courtrooms: कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) को अब इस दौर की हकीकत के तौर पर स्वीकार कर लिया गया है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस टेक्नोलॉजी पर गूगल और माइक्रोसॉफ्ट जैसी कंपनियां काफी पैसा खर्च कर रही हैं। यह सिर्फ तकनीकी कंपनियों तक सीमित नहीं रहने वाला है। अब मेडिकल और न्यायिक सेवाओं में भी एआई का इस्तेमाल होने जा रहा है। हालिया सालों में में न्याय व्यवस्था में भी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की दस्तक हो चुकी है।

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की दुनिया का लगातार विस्तार हो रहा है। कई देशों में अदालती फैसलों की व्याख्या से लेकर कानूनी प्रक्रियाओं के बारे में बताने के लिए एआई का इस्तेमाल होने लगा है। सवाल अपनी जगह पर कायम है कि क्या इंसाफ की बेंच पर अब इंसानों की जगह मशीनें ले सकती हैं?

AI in Courtrooms

AI in Courtrooms: अदालतों में होगा प्रयोग?

चीन जैसे देशों में पहले ही AI आधारित सिस्टम ट्रैफिक का इस्तेमाल होने लगा है। अमेरिका में भी रिस्क एसेसमेंट एल्गोरिद्म का इस्तेमाल अपराधियों की सज़ा तय करने में हो रहा है। भारत में, अभी AI का उपयोग सीमित है। भविष्य में इसका इस्तेमाल अदालती कार्रवाई में किया जा सकता है। जैसे सुप्रीम कोर्ट में केसों की डिजिटल लिस्टिंग, वर्चुअल सुनवाई, और लीगल डॉक्युमेंट समराइज में AI की भूमिका देखी जा रही है।

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आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से न्याय प्रभावित होने की आशंका

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस तकनीक का इस्तेमाल न्यायिक प्रणाली में गति और दक्षता लाने के लिए किया जा सकता है। अदालती फैसलों पर इसके प्रभाव को लेकर अभी कुछ नहीं कहा जा सकता है। AI मशीन है और यह वही डेटा सीखता है जो इंसानों ने तैयार किया होता है। अगर वह डेटा पूर्वाग्रहों से भरा है, तो निर्णय भी पक्षपातपूर्ण हो सकते हैं। जैसे कि अमेरिका में एक आपराधिक मामले में AI ने अश्वेत लोगों को खतरनाक बताया था, जबकि असल आंकड़े ऐसे नहीं हैं। यह डेटा के सीमित दायरे को बताने के लिए काफी है।

भारत में AI का इस्तेमाल कोर्ट रूम में हो सकता है?

भारत में अदालतों में एआई के इस्तेमाल को लेकर अभी बहस चल रही है। सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने एक फैसले पर टिप्पणी करते हुए कहा है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का इस्तेमाल सपोर्ट सिस्टम के तौर पर हो सकता है, लेकिन यह मानवीय विवेक और बुद्धि की जगह नहीं ले सकता है। विशेषज्ञों का भी मानना है कि AI न्यायिक फैसलों के क्षेत्र में सहायक उपकरण हो सकता है। कोर्ट के ऐसे क्लर्कियल काम जिनमें मानवीय विवेक नहीं तकनीक की जरूरत है वहां एआई का इस्तेमाल किया जा सकता है।

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